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तेल भंडार बढ़ाएं और व्यापार में विविधता लाएं: ऊर्जा के झटकों पर रघुराम राजन की चेतावनी

By Arth Vani Desk · 2026-06-17

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत से अपने रणनीतिक तेल भंडार (strategic oil reserves) का विस्तार करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अस्थिर ऊर्जा मार्गों पर भारत की निर्भरता और कम विदेशी निवेश, रुपये की स्थिरता और घरेलू मुद्रास्फीति के लिए प्रमुख जोखिम हैं।

Key takeaways

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत से अपने रणनीतिक तेल भंडार (strategic oil reserves) का विस्तार करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अस्थिर ऊर्जा मार्गों पर भारत की निर्भरता और कम विदेशी निवेश, रुपये की स्थिरता और घरेलू मुद्रास्फीति के लिए प्रमुख जोखिम हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लचीलेपन को लेकर चेतावनी जारी की है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों में संभावित व्यवधानों के बीच, राजन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को वैश्विक झटकों से खुद को सुरक्षित करने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए, क्योंकि ये झटके स्थानीय कीमतों को बढ़ा सकते हैं और राष्ट्रीय मुद्रा को कमजोर कर सकते हैं।

रणनीतिक बफ़र्स की आवश्यकता

भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है। वैश्विक शिपिंग लेन में किसी भी प्रकार का व्यवधान सीधे भारतीय पेट्रोल पंपों पर ईंधन की ऊंची कीमतों में बदल जाता है, जिससे परिवहन लागत और खाद्य मुद्रास्फीति पर 'डोमिनो इफेक्ट' पड़ता है। राजन का तर्क है कि वर्तमान रणनीतिक तेल भंडार—जो आपात स्थिति के लिए बनाए गए भूमिगत भंडारण केंद्र हैं—का काफी विस्तार करने की आवश्यकता है।

बड़े बफ़र्स बनाकर, भारत अल्पकालिक वैश्विक संकटों के दौरान भी ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है, जिससे कीमतों में अचानक होने वाली उस वृद्धि को रोका जा सकता है जो मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यवसायों की जेब पर भारी पड़ती है।

व्यापार विविधीकरण और रुपया

पूर्व गवर्नर ने भारतीय रुपये (₹) की संवेदनशीलता की ओर भी इशारा किया। उन्होंने मुद्रा के अवमूल्यन को उच्च आयात बिलों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के अपेक्षाकृत निम्न स्तर के संयोजन से जोड़ा। इसका मुकाबला करने के लिए, राजन ने दो-आयामी रणनीति का सुझाव दिया है:

दीर्घकालिक मुद्रास्फीति जोखिम

औसत खुदरा उपभोक्ता के लिए, राजन की चेतावनी इस बात की याद दिलाती है कि वैश्विक घटनाएं स्थानीय बचत को कैसे प्रभावित करती हैं। जब ऊर्जा की लागत बढ़ती है, तो जीवन यापन की लागत भी बढ़ जाती है। राजन कमोडिटी एक्सपोजर पर दीर्घकालिक दृष्टिकोण की वकालत करते हैं, और सरकार से ऊर्जा सुरक्षा को केवल एक लॉजिस्टिक मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि वित्तीय स्थिरता के स्तंभ के रूप में देखने का आग्रह करते हैं। रणनीतिक बफ़र्स और विविध व्यापार के बिना, भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के रहमों-करम पर बनी रहेगी।

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय या निवेश संबंधी सलाह शामिल नहीं है; पाठकों को कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले एक पेशेवर सलाहकार से परामर्श करना चाहिए।

Frequently asked questions

वैश्विक तेल संकट मेरे दैनिक बजट को कैसे प्रभावित करते हैं?

चूंकि भारत अपने अधिकांश तेल का आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में उछाल से पेट्रोल और डीजल की लागत बढ़ जाती है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो जाती है और अंततः किराने के सामान और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।

'रणनीतिक तेल भंडार' (Strategic oil reserves) क्या हैं?

ये सरकार द्वारा बनाए गए कच्चे तेल के बड़े भंडार हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या बड़े आपूर्ति व्यवधानों के दौरान देश के पास पर्याप्त ईंधन उपलब्ध हो।

रघुराम राजन रुपये को लेकर चिंतित क्यों हैं?

उनका मानना है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता और अपर्याप्त विदेशी निवेश रुपये को कमजोर कर रहे हैं, जिससे विदेश से खरीदी जाने वाली हर चीज महंगी हो जाती है।

Source: Economictimes
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