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केंद्र ने SC को सूचित किया कि वह 18 साल से कम उम्र वालों को सोशल मीडिया से रोकने के लिए आईटी नियमों में संशोधन की योजना बना रहा है

By Arth Vani Desk · 2026-09-30

केंद्र ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट (SC) को आईटी नियमों में संशोधन करने के अपने इरादे के बारे में सूचित किया है, जिसका उद्देश्य 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंचने से रोकना है। यह महत्वपूर्ण नियामक परिवर्तन पूरे भारत में नाबालिगों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा और संरक्षण को बढ़ाना चाहता है। विशिष्ट संशोधनों और उनके कार्यान्वयन पर आगे के विवरण की प्रतीक्षा है।

Key takeaways

ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल शासन के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, केंद्र ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट (SC) को सूचित किया है कि वह मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में संशोधन करने की योजना बना रहा है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंचने से रोकना है, जो भारत में नाबालिगों के लिए इंटरनेट के उपयोग को विनियमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार द्वारा यह खुलासा युवा व्यक्तियों पर सोशल मीडिया के प्रभाव के बारे में बढ़ती वैश्विक चिंता को उजागर करता है। जबकि नियोजित संशोधनों के विशिष्ट विवरण अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, यह घोषणा डिजिटल क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े उपाय पेश करने के सरकार के इरादे का संकेत देती है।

भारतीय परिवारों के लिए यह संशोधन क्यों मायने रखता है

भारतीय खुदरा पाठकों, विशेषकर माता-पिता के लिए, इस संभावित संशोधन के महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। यह कदम मुख्य रूप से नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा, गोपनीयता और भलाई से संबंधित चिंताओं से प्रेरित है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जहां एक ओर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं, वहीं बच्चों को साइबरबुलिंग, अनुपयुक्त सामग्री, गोपनीयता उल्लंघनों और संभावित शोषण जैसे जोखिमों से भी अवगत कराते हैं।

वर्तमान परिदृश्य और भविष्य की संभावनाएं

विश्व स्तर पर, कई देश इसी तरह की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिसमें बच्चों की ऑनलाइन पहुंच को विनियमित करने के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए जा रहे हैं। आईटी नियमों में संशोधन करने का केंद्र का निर्णय भारत को उन देशों में रखता है जो डिजिटल क्षेत्र में अपनी युवा आबादी के लिए सुरक्षात्मक उपायों को कानून बनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं। वर्तमान आईटी नियम, जबकि डिजिटल आचरण और मध्यस्थ दायित्व के विभिन्न पहलुओं को संबोधित करते हैं, स्पष्ट रूप से नाबालिग व्यक्तियों को सोशल मीडिया से नहीं रोकते हैं। यह प्रस्तावित संशोधन मौजूदा ढांचे में एक नया अतिरिक्त होगा।

इन संशोधनों की सटीक समय-सीमा, साथ ही आयु सत्यापन विधियों, गैर-अनुपालन के लिए दंड और प्रवर्तन तंत्र से संबंधित उनके विशिष्ट प्रावधान अभी तक सामने नहीं आए हैं। एक बार जब मसौदा संशोधन सार्वजनिक हो जाएंगे, तो वे संभवतः सार्वजनिक परामर्श की अवधि से गुजरेंगे, जिससे हितधारकों, जिनमें टेक कंपनियां, बाल अधिकार संगठन और आम जनता शामिल हैं, को प्रतिक्रिया देने की अनुमति मिलेगी। यह नए नियमों के अंतिम स्वरूप को आकार देने में एक महत्वपूर्ण चरण होगा।

Inc42 FinTech द्वारा पहली बार रिपोर्ट किया गया यह कदम, यह बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म नाबालिग उपयोगकर्ताओं के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं, इसका एक व्यापक पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। माता-पिता और अभिभावकों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वे इन विधायी परिवर्तनों के आगे बढ़ने के साथ सूचित रहें, यह समझते हुए कि वे उनके बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल स्वतंत्रता को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी या निवेश सलाह का गठन नहीं करती है। नीतिगत विवरण के लिए पाठकों को आधिकारिक सरकारी स्रोतों से परामर्श करना चाहिए।

Frequently asked questions

केंद्र सोशल मीडिया के लिए कौन सा नया नियम बनाने की योजना बना रहा है?

केंद्र आईटी नियमों में संशोधन करने की योजना बना रहा है ताकि 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंचने या उनका उपयोग करने से रोका जा सके।

सरकार यह बदलाव क्यों कर रही है?

यह बदलाव बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और संरक्षण को बढ़ाने के लिए विचाराधीन है, जिसमें साइबरबुलिंग, अनुपयुक्त सामग्री के संपर्क और नाबालिगों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग से जुड़े गोपनीयता जोखिमों के बारे में चिंताओं को दूर किया जा सके।

इस संभावित संशोधन से कौन प्रभावित होगा?

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जो वर्तमान में सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, उनके माता-पिता या अभिभावक, और भारत में संचालित होने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन प्रस्तावित परिवर्तनों से सीधे प्रभावित होंगे।

Source: Inc42 FinTech
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