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CAG रिपोर्ट: नागपुर नगर निगम के पास ₹1,646 करोड़ अप्रयुक्त निधि, स्मार्ट सिटी खाता घाटे में

By Arth Vani Desk · 2026-11-03

भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने नागपुर नगर निगम (NMC) को केंद्र और राज्य सरकार की ₹1,646 करोड़ की बड़ी राशि के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र (utilisation certificates) जमा न करने के लिए इंगित किया है। इसके अलावा, ऑडिट में यह भी उजागर हुआ है कि नागरिक निकाय का समर्पित स्मार्ट सिटी परियोजना खाता वर्तमान में नकारात्मक शेष (negative balance) के साथ चल रहा है। यह रिपोर्ट नागपुर में विकास परियोजनाओं के लिए आवंटित सार्वजनिक धन के वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही के संबंध में गंभीर चिंताएं उठाती है।

Key takeaways

भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने नागपुर नगर निगम (NMC) के भीतर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया है, जिसमें ₹1,646 करोड़ के चौंका देने वाले उपयोगिता प्रमाण पत्र (UCs) लंबित हैं। यह बड़ी राशि केंद्र और राज्य सरकार के उन निधियों का प्रतिनिधित्व करती है जो विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लिए आवंटित की गई थीं, जिनका NMC ने अभी तक औपचारिक रूप से हिसाब नहीं दिया है।

CAG के निष्कर्षों के अनुसार, इन निधियों के लिए जवाबदेही की कमी एक गंभीर चिंता का विषय है। उपयोगिता प्रमाण पत्र आवश्यक दस्तावेज होते हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकारी अनुदान और सहायता को उनके इच्छित उद्देश्य के अनुसार कैसे खर्च किया गया है। इतनी बड़ी राशि के लिए इन प्रमाण पत्रों की अनुपस्थिति नगर निकाय द्वारा वित्तीय निगरानी और पारदर्शिता में एक महत्वपूर्ण चूक को इंगित करती है।

स्मार्ट सिटी खाते में नकारात्मक शेष

चिंताओं को बढ़ाते हुए, CAG रिपोर्ट ने यह भी बताया कि नागपुर नगर निगम का समर्पित स्मार्ट सिटी परियोजना खाता नकारात्मक शेष (negative balance) के साथ चल रहा है। यह विशेष अवलोकन नागपुर में केंद्र सरकार की प्रमुख शहरी विकास पहलों में से एक के वित्तीय स्वास्थ्य और कार्यान्वयन की प्रगति पर सवाल उठाता है। एक नकारात्मक शेष यह बताता है कि खर्च उपलब्ध निधियों से अधिक हो सकता है, जिससे मिशन के दायरे में परियोजना में देरी या वित्तीय अस्थिरता हो सकती है।

स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य 'स्मार्ट समाधान' के अनुप्रयोग के माध्यम से नागरिकों को मुख्य बुनियादी ढांचा और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करके टिकाऊ और समावेशी शहरों को बढ़ावा देना है। ऐसे बड़े पैमाने पर, बहु-वर्षीय परियोजनाओं की सफलता के लिए प्रभावी वित्तीय प्रबंधन महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट किया गया नकारात्मक शेष नियोजित स्मार्ट पहलों के समय पर निष्पादन में बाधा डाल सकता है, जिससे शहर के निवासियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा जिन्हें बेहतर बुनियादी ढांचे और सेवाओं से लाभ मिलना है।

वित्तीय जवाबदेही के निहितार्थ

CAG की भूमिका सरकारी राजस्व और खर्चों का ऑडिट करना है, यह सुनिश्चित करना कि सार्वजनिक धन का प्रभावी ढंग से और पारदर्शी तरीके से उपयोग किया जाए। यह ऑडिट रिपोर्ट वित्तीय अनुशासन और शासन का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। ₹1,646 करोड़ के लिए लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों का मतलब है कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास उचित आश्वासन की कमी है कि इन निधियों का उचित उपयोग किया गया है या नहीं। प्रमाणन की इस कमी से भविष्य के अनुदानों की रिहाई भी बाधित हो सकती है, जिससे धन की कमी के कारण चल रही या नियोजित परियोजनाएं रुक सकती हैं।

नागपुर के नागरिकों के लिए, ये निष्कर्ष विलंबित परियोजनाओं, निधियों के दुरुपयोग, या वादों के विकास में प्रगति की कमी के बारे में चिंताओं को जन्म देते हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक धन के शहर के इच्छित कल्याण और विकास के लिए उपयोग किया जाना सुनिश्चित करने हेतु कड़े वित्तीय नियंत्रण और दस्तावेजीकरण के समय पर जमा करने के महत्व को रेखांकित करती है।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently asked questions

उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) एक ऐसा दस्तावेज है जो इस बात की पुष्टि करता है कि सरकारी अनुदान या सहायता को उन्हीं विशिष्ट उद्देश्यों के लिए खर्च किया गया है जिनके लिए उन्हें आवंटित किया गया था। यह वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए महत्वपूर्ण है, यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग न हो और भविष्य के अनुदान जारी करने में मदद करता है।

स्मार्ट सिटी खाते में नकारात्मक शेष का क्या अर्थ है?

नकारात्मक शेष का अर्थ है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के खर्च उपलब्ध निधियों से अधिक हो सकते हैं। इससे परियोजना में देरी, वित्तीय अस्थिरता हो सकती है और मिशन के तहत शहरी विकास पहलों के समय पर कार्यान्वयन पर संभावित रूप से प्रभाव पड़ सकता है।

ऐसे मामलों में CAG की क्या भूमिका है?

भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) भारत की सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्था है। इसकी भूमिका संघ और राज्य सरकारों की प्राप्तियों और व्यय का ऑडिट करना है, यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का उचित लेखा-जोखा और पारदर्शी उपयोग हो, जिससे सार्वजनिक वित्त में जवाबदेही को बढ़ावा मिले।

Source: GNews Govt Schemes
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