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ग्लोबल इन्वेस्टिंग: आपके पोर्टफोलियो के लिए अमेरिकी बाजार ही एकमात्र विकल्प क्यों नहीं है

By Arth Vani Desk · 2026-06-15

वित्तीय विशेषज्ञ देविना मेहरा ने भारतीय निवेशकों को वैश्विक विविधीकरण (diversification) के लिए अमेरिकी शेयर बाजार से आगे देखने की सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश करने से गिरते रुपये और घरेलू बाजार की अस्थिरता के खिलाफ संपत्ति की रक्षा करने में मदद मिलती है।

Key takeaways

भारतीय रिटेल निवेशक अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए तेजी से घरेलू सीमाओं से बाहर देख रहे हैं। हालांकि भारतीय शेयर बाजार ने लचीलापन दिखाया है, लेकिन ET Alpha Wealth Summit के वित्तीय विशेषज्ञों का सुझाव है कि वास्तविक विविधीकरण के लिए वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। फर्स्ट ग्लोबल की संस्थापक देविना मेहरा ने इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की कि भारतीयों को सामान्य गलतियों से बचते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश कैसे करना चाहिए।

वैश्विक स्तर पर जाने का तर्क

कई निवेशक आश्चर्य करते हैं कि जब भारतीय बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है तो उन्हें विदेश में निवेश क्यों करना चाहिए। मेहरा दो प्राथमिक कारणों पर प्रकाश डालती हैं: वैश्विक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में भारत का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा और भारतीय रुपये (₹) के मूल्यह्रास (depreciation) का दीर्घकालिक रुझान। विदेशी मुद्राओं में संपत्ति रखने से निवेशक एक स्वाभाविक सुरक्षा कवच (hedge) बनाते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वैश्विक बेंचमार्क के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर भी उनकी क्रय शक्ति स्थिर बनी रहे।

'सिर्फ अमेरिका' की आदत छोड़ें

भारतीय निवेशक सबसे बड़ी गलतियों में से एक यह करते हैं कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका को पूरी दुनिया का प्रतिनिधि मान लेते हैं। हालांकि वॉल स्ट्रीट तकनीकी दिग्गजों का घर है, लेकिन मेहरा "अमेरिका ही दुनिया है" वाली मानसिकता के खिलाफ चेतावनी देती हैं। पूरी तरह से एक विदेशी देश पर निर्भर रहना—भले ही वह अमेरिका जैसा बड़ा देश हो—वास्तविक विविधीकरण नहीं है। इसके बजाय, निवेशकों को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अवसरों की तलाश करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका पोर्टफोलियो किसी एक राष्ट्र के आर्थिक चक्रों के प्रति अत्यधिक असुरक्षित न हो।

सफल अंतरराष्ट्रीय निवेश के नियम

वैश्विक बाजारों को प्रभावी ढंग से समझने के लिए, मेहरा रिटेल निवेशकों के लिए तीन मुख्य सिद्धांतों का सुझाव देती हैं:

रणनीतिक विविधीकरण

अंततः, अंतरराष्ट्रीय निवेश का लक्ष्य केवल उच्च रिटर्न प्राप्त करना नहीं है, बल्कि आपके पोर्टफोलियो के समग्र जोखिम को कम करना है। विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में निवेश फैलाकर, भारतीय निवेशक घरेलू मंदी से खुद को बचा सकते हैं और उन क्षेत्रों में निवेश कर सकते हैं—जैसे कि उन्नत सेमीकंडक्टर्स या वैश्विक लॉजिस्टिक्स—जो शायद भारतीय सूचकांकों में पूरी तरह से प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.