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विदेशी निवेशकों ने जून में ₹62,800 करोड़ निकाले: रिटेल निवेशकों के लिए क्या जानना ज़रूरी है

By Arth Vani Desk · 2026-06-14

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजारों में अपनी बिकवाली जारी रखी, और जून के पहले पखवाड़े में ₹62,853 करोड़ से अधिक की निकासी की। जहां वैश्विक अनिश्चितताएं इस निकास का कारण हैं, वहीं घरेलू संस्थागत समर्थन छोटे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बना हुआ है।

Key takeaways

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजारों में अपनी बिकवाली जारी रखी, और जून के पहले पखवाड़े में ₹62,853 करोड़ से अधिक की निकासी की। जहां वैश्विक अनिश्चितताएं इस निकास का कारण हैं, वहीं घरेलू संस्थागत समर्थन छोटे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बना हुआ है।

भारतीय इक्विटी बाजार पर वैश्विक दबाव बना हुआ है क्योंकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जून के पहले पखवाड़े में अपनी बिकवाली का सिलसिला जारी रखा। ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी संस्थानों ने महीने के पहले दो हफ्तों में ही भारतीय शेयरों से ₹62,853 करोड़ से अधिक निकाल लिए हैं, जो पिछले अवधियों में देखी गई भारी निकासी के रुख को आगे बढ़ाता है।

निकासी के पीछे वैश्विक चुनौतियां

इस बड़े पैमाने पर बिकवाली के प्राथमिक कारण वैश्विक अस्थिरता में निहित हैं। अंतरराष्ट्रीय फंड मैनेजर वर्तमान में लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक विकास में मंदी की बढ़ती चिंताओं से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थितियों में, विदेशी पूंजी आमतौर पर भारत जैसे उभरते बाजारों (emerging markets) से बाहर निकलती है और विकसित बाजारों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा की ओर रुख करती है।

भारतीय रुपये की गिरती कीमत भी इस दबाव को बढ़ा रही है। एक विदेशी निवेशक के लिए, गिरता हुआ रुपया उनके निवेश के मूल्य को कम कर देता है जब उसे वापस डॉलर में बदला जाता है, जिससे अक्सर मौजूदा मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए समय से पहले निकासी शुरू हो जाती है।

रिटेल पोर्टफोलियो के लिए राहत की बात

हालांकि ₹62,800 करोड़ से अधिक की निकासी चिंताजनक लगती है, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि बिकवाली की तीव्रता कम हो सकती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पिछले हफ्तों में देखी गई भारी अस्थिरता की तुलना में इन निकासी की गति थोड़ी धीमी हुई है।

इसके अलावा, भारतीय बाजार ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। पिछले दशकों के विपरीत, जहाँ इतनी बड़ी विदेशी निकासी से बाजार क्रैश हो जाता था, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के मजबूत निवेश और रिटेल प्रतिभागियों के निरंतर सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) ने एक महत्वपूर्ण सहारा प्रदान किया है। यह घरेलू लिक्विडिटी FPI के बहिर्वाह के बावजूद शेयर की कीमतों को फ्री-फॉल (तेजी से गिरने) से बचाने में मदद कर रही है।

निवेशकों को क्या उम्मीद करनी चाहिए?

अल्पकालिक रूप से, बाजार में अस्थिरता रहने की संभावना है क्योंकि यह वैश्विक समाचारों और मुद्रा के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया करता है। हालांकि, लंबी अवधि के प्रतिभागियों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक कहानी अभी भी रुचि का विषय बनी हुई है। FPIs द्वारा वर्तमान निकासी को भारतीय कॉर्पोरेट आय में विश्वास की कमी के बजाय सुरक्षा की ओर एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.