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SEBI के धोखाधड़ी के आरोपों से 30% की गिरावट के बाद Rajesh Exports में लगा अपर सर्किट

By Arth Vani Desk · 2026-06-15

SEBI द्वारा राजस्व में भारी हेरफेर के आरोपों के बाद एक हफ्ते तक चली बिकवाली के बाद Rajesh Exports के शेयरों में 5% की रिकवरी आई। हालांकि कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और इसे रिपोर्टिंग की गलतफहमी बताया है, लेकिन खुदरा निवेशकों को भारी अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।

Key takeaways

SEBI द्वारा राजस्व में भारी हेरफेर के आरोपों के बाद एक हफ्ते तक चली बिकवाली के बाद Rajesh Exports के शेयरों में 5% की रिकवरी आई। हालांकि कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और इसे रिपोर्टिंग की गलतफहमी बताया है, लेकिन खुदरा निवेशकों को भारी अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।

Rajesh Exports में लौटी अस्थिरता

Nifty 200 इंडेक्स का प्रमुख हिस्सा रहे Rajesh Exports के शेयरों में शेयर बाजारों पर 5% की तेज उछाल देखी गई और इसमें अपर सर्किट लगा। यह रिकवरी सात दिनों की उस भीषण गिरावट के बाद आई है जिसमें कंपनी का मार्केट वैल्यू लगभग 30% तक घट गया था। यह अस्थिरता कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग पद्धतियों के संबंध में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा की जा रही उच्च-स्तरीय जांच के कारण उत्पन्न हुई है।

SEBI का अंतरिम आदेश

बाजार नियामक ने हाल ही में एक अंतरिम आदेश जारी किया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी बड़े पैमाने पर राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर (revenue inflation) दिखाने में शामिल थी। कथित अकाउंटिंग अनियमितताओं के पैमाने ने निवेश जगत में हलचल मचा दी है, विशेष रूप से इस बात पर कि कंपनी की बहियों में टर्नओवर को कैसे दर्ज किया गया था। खुदरा निवेशकों के लिए, यह खबर मिड-टू-लार्ज-कैप संस्थाओं के भीतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस जोखिमों की एक कड़ी चेतावनी के रूप में आई है।

कंपनी ने धोखाधड़ी के आरोपों से किया इनकार

नियामक कार्रवाई के जवाब में, Rajesh Exports ने अपने राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के आरोपों को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। कंपनी प्रबंधन ने इस विसंगति को जानबूझकर की गई धोखाधड़ी के बजाय "रिपोर्टिंग की गलतफहमी" बताया है। कंपनी के बचाव के मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:

खुदरा निवेशकों पर प्रभाव

5% अपर सर्किट द्वारा दी गई अस्थायी राहत के बावजूद, शेयर अभी भी अनिश्चितता के घेरे में बना हुआ है। केवल सात कारोबारी सत्रों में, 30% की गिरावट ने लंबी अवधि के निवेशकों की महत्वपूर्ण पूंजी को खत्म कर दिया। बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि जब तक SEBI अंतिम फैसला नहीं सुनाता या कंपनी को कथित ₹15.15 लाख करोड़ के धोखाधड़ी मामले से मुक्त नहीं कर देता, तब तक शेयर की कीमतों में खबरों के आधार पर उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

औसत निवेशक के लिए, यह स्थिति बुनियादी प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) अनुपात से परे देखने के महत्व को उजागर करती है। जब SEBI जैसा प्रमुख नियामक अंतरिम आदेश के साथ हस्तक्षेप करता है, तो यह अक्सर गहरी संरचनात्मक या पारदर्शिता संबंधी समस्याओं का संकेत देता है जिन्हें अदालतों या नियामक समझौतों के माध्यम से हल होने में महीनों, या साल भी लग सकते हैं।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और खरीदने या बेचने की सिफारिश नहीं है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.