Google पर एंड्रॉइड डिफ़ॉल्ट खोज विकल्प हटाने के लिए स्विस जांच का सामना करना पड़ा
Google पर स्विट्जरलैंड के प्रतिस्पर्धा आयोग, COMCO द्वारा देश में एंड्रॉइड डिवाइसों पर 'चॉइस स्क्रीन' सुविधा को कथित तौर पर हटाने के लिए जांच की जा रही है। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को प्रारंभिक डिवाइस सेटअप के दौरान अपने पसंदीदा डिफ़ॉल्ट खोज इंजन का चयन करने की अनुमति देती है और अन्य यूरोपीय देशों में उपलब्ध है।
Key takeaways
- Google पर स्विट्जरलैंड में एक ऐसी सुविधा को हटाने के लिए जांच की जा रही है जो एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं को अपने डिफ़ॉल्ट खोज इंजन का चयन करने की अनुमति देती है।
- 'चॉइस स्क्रीन' सुविधा अभी भी अन्य यूरोपीय देशों में उपलब्ध है, जिससे स्विट्जरलैंड में इसे हटाना नियामकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
- जांच का उद्देश्य खोज इंजन प्रदाताओं के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना और उपभोक्ता पसंद की रक्षा करना है।
- यह बड़ी तकनीकी कंपनियों के बाजार प्रथाओं की निगरानी के लिए वैश्विक नियामक प्रयासों पर प्रकाश डालता है।
Google वर्तमान में स्विस प्रतिस्पर्धा नियामक, COMCO, द्वारा अपने एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम को लेकर जांच का सामना कर रहा है। जांच का मुख्य बिंदु Google की 'चॉइस स्क्रीन' सुविधा है, जो आमतौर पर उपयोगकर्ताओं को एक नया एंड्रॉइड डिवाइस सेट करते समय अपने डिफ़ॉल्ट खोज इंजन का चयन करने की अनुमति देती है।
COMCO के अनुसार, Google ने कथित तौर पर स्विट्जरलैंड में उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से इस 'चॉइस स्क्रीन' कार्यक्षमता को हटा दिया है। इस कदम ने ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि यही सुविधा अन्य यूरोपीय देशों में एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। उपलब्धता में इस विसंगति ने स्विस नियामक को Google की प्रथाओं की जांच शुरू करने के लिए प्रेरित किया है।
'चॉइस स्क्रीन' सुविधा क्या है?
'चॉइस स्क्रीन' एक उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफ़ेस है जिसे उपभोक्ताओं को उनके डिवाइस की डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स पर अधिक नियंत्रण देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जब एक नया एंड्रॉइड स्मार्टफोन या टैबलेट पहली बार सक्रिय होता है, तो यह स्क्रीन आमतौर पर दिखाई देती है, जो उपयोगकर्ताओं को खोज इंजनों के चयन के साथ प्रस्तुत करती है जिसमें से वे अपना पसंदीदा विकल्प चुन सकते हैं। यह विकल्प फिर डिवाइस के ब्राउज़र या खोज बार के माध्यम से की गई वेब खोजों के लिए डिफ़ॉल्ट बन जाता है।
नियामक दृष्टिकोण से ऐसी सुविधा का उद्देश्य अक्सर खोज इंजन प्रदाताओं के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना होता है। उपयोगकर्ताओं को एक स्पष्ट विकल्प प्रदान करके, इसका उद्देश्य एक ही प्रदाता को पूर्व-स्थापना या डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स के माध्यम से बाजार पर हावी होने से रोकना है जिसे उपयोगकर्ता सक्रिय रूप से नहीं बदल सकते हैं।
स्विट्जरलैंड जांच क्यों कर रहा है?
COMCO की जांच इस अवलोकन से उपजी है कि जबकि 'चॉइस स्क्रीन' यूरोप के अन्य हिस्सों में मौजूद है, इसे स्विट्जरलैंड में हटा दिया गया है। नियामक संभवतः यह जांच कर रहे हैं कि क्या यह हटाना मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम स्पेस में Google की प्रमुख बाजार स्थिति का दुरुपयोग है। ऐसे कार्य संभावित रूप से उपभोक्ता पसंद को सीमित कर सकते हैं और स्विस बाजार में काम कर रहे अन्य खोज इंजन प्रदाताओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
भारतीय खुदरा पाठकों के लिए, जबकि यह विशिष्ट जांच स्विट्जरलैंड में हो रही है, यह बड़े प्रौद्योगिकी कंपनियों की प्रथाओं की जांच करने वाले नियामकों के व्यापक वैश्विक रुझान को उजागर करता है। ये जांचें अक्सर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने और उपभोक्ता हितों की रक्षा पर केंद्रित होती हैं, जिसका दुनिया भर में प्रौद्योगिकी उत्पादों और सेवाओं की पेशकश पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है। जबकि इस विशिष्ट स्विस जांच से भारतीय उपयोगकर्ताओं पर वर्तमान में कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है, यह उस चल रहे वैश्विक नियामक वातावरण को रेखांकित करता है जिसके भीतर तकनीकी दिग्गज काम करते हैं।
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय या निवेश सलाह का गठन नहीं करता है।
Frequently asked questions
एंड्रॉइड पर 'चॉइस स्क्रीन' सुविधा क्या है?
'चॉइस स्क्रीन' सुविधा उपयोगकर्ताओं को एक नए एंड्रॉइड डिवाइस के प्रारंभिक सेटअप के दौरान अपने पसंदीदा डिफ़ॉल्ट खोज इंजन, जैसे Google, बिंग, या डकडकगो का चयन करने की अनुमति देती है।
स्विट्जरलैंड में Google की जांच क्यों की जा रही है?
स्विट्जरलैंड के प्रतिस्पर्धा नियामक, COMCO द्वारा Google की जांच की जा रही है, क्योंकि उसने कथित तौर पर स्विट्जरलैंड में 'चॉइस स्क्रीन' सुविधा को हटा दिया है, जबकि यह अन्य यूरोपीय देशों में उपलब्ध है।
क्या यह जांच भारत में एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करती है?
यह विशिष्ट जांच स्विट्जरलैंड में है और भारत में एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं को सीधे प्रभावित नहीं करती है। हालांकि, यह तकनीकी कंपनियों की जांच करने वाले नियामकों के वैश्विक रुझान को दर्शाता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से दुनिया भर में भविष्य के उत्पाद प्रस्तावों को प्रभावित कर सकता है।