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बाजार के शोर को नज़रअंदाज़ करें: एक्सपर्ट ने AI और ग्लोबल केपेक्स को भारत के लिए बड़ी जीत बताया

By Arth Vani Desk · 2026-06-15

निवेश दिग्गज हिरेन वेद ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी है कि वे अल्पकालिक बाजार की चिंता को छोड़ दें और ग्लोबल कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) साइकिल जैसे संरचनात्मक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करें। जबकि आय (earnings) को लेकर डर बना हुआ है, AI क्रांति और मैन्युफैक्चरिंग में भारत की भूमिका लंबी अवधि के विकास का एक शक्तिशाली चालक बनी हुई है।

Key takeaways

निवेश दिग्गज हिरेन वेद ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी है कि वे अल्पकालिक बाजार की चिंता को छोड़ दें और ग्लोबल कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) साइकिल जैसे संरचनात्मक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करें। जबकि आय (earnings) को लेकर डर बना हुआ है, AI क्रांति और मैन्युफैक्चरिंग में भारत की भूमिका लंबी अवधि के विकास का एक शक्तिशाली चालक बनी हुई है।

ऐसे युग में जहां बाजार की स्क्रीनें नकारात्मक खबरों के जरा से संकेत पर लाल हो जाती हैं, Alchemy Capital Management के सह-संस्थापक और CIO, हिरेन वेद, भारतीय रिटेल निवेशकों से अस्थायी 'नैरेटिव' और दीर्घकालिक आर्थिक वास्तविकता के बीच अंतर करने का आग्रह कर रहे हैं। जैसे-जैसे घरेलू सूचकांकों में उतार-चढ़ाव बढ़ रहा है, संदेश स्पष्ट है: अंतर्निहित संरचनात्मक रुझान आसपास के शोर की तुलना में अधिक मजबूत बने हुए हैं।

ग्लोबल केपेक्स सुपरसाइकिल

वेद द्वारा रेखांकित सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक ग्लोबल कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) सुपरसाइकिल का उदय है। वर्षों के सुस्त निवेश के बाद, दुनिया भर की कंपनियां एक बार फिर इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी में पैसा लगा रही हैं। भारत के लिए, यह एक बड़े अवसर के रूप में तब्दील हो रहा है क्योंकि देश खुद को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब और सप्लाई चेन विविधीकरण में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रहा है।

निवेशक अक्सर तिमाही-दर-तिमाही आय के उतार-चढ़ाव से विचलित हो जाते हैं। हालांकि, वेद का सुझाव है कि ये डर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा सकते हैं। जबकि कुछ क्षेत्रों को अस्थायी मंदी का सामना करना पड़ सकता है, व्यवसाय लचीले और अनुकूलनीय साबित हो रहे हैं, और वे इन बड़े निवेश विषयों की ओर बढ़ रहे हैं जो महीनों के बजाय वर्षों तक चलते हैं।

भारत का 'हिडन' AI प्ले

हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अक्सर सिलिकॉन वैली की घटना के रूप में देखा जाता है, लेकिन वेद भारतीय बाजार के भीतर एक छिपे हुए अवसर की ओर इशारा करते हैं। भारत केवल AI का उपभोक्ता नहीं है; यह वैश्विक AI कार्यान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण बैकएंड बन रहा है।

घबराहट के बजाय धैर्य

आज रिटेल निवेशकों के लिए मुख्य चुनौती बाजार की अस्थिरता के दौरान अपना विश्वास बनाए रखना है। दैनिक सुर्खियों पर प्रतिक्रिया करने की प्रवृत्ति अक्सर गुणवत्तापूर्ण शेयरों से समय से पहले बाहर निकलने का कारण बनती है। वेद इस बात पर जोर देते हैं कि धन का सृजन धैर्य और स्थायी रुझानों को जल्दी पहचानने की क्षमता का परिणाम है।

संरचनात्मक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करके—जैसे कि भारतीय उद्योग का आधुनिकीकरण और सेवाओं का टेक-संचालित विकास—निवेशक वर्तमान 'earnings anxiety' (आय की चिंता) को स्पष्ट परिप्रेक्ष्य के साथ संभाल सकते हैं। लक्ष्य उन थीमों में निवेशित रहना है जिनमें अगले दशक तक चलने की क्षमता है, चाहे Sensex या Nifty में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव कुछ भी हो।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह का गठन नहीं करती है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.