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NSE के मेगा IPO की चर्चा तेज होने के साथ IFCI के शेयरों ने 52-सप्ताह का नया उच्च स्तर छुआ

By Arth Vani Desk · 2026-06-12

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की आगामी पब्लिक लिस्टिंग को लेकर बढ़ी उम्मीदों के चलते IFCI के शेयरों में 20% का उछाल आया और यह एक साल के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। एक्सचेंज में एक हितधारक होने के नाते, IFCI को देश के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट ऑपरेटर से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की बढ़ती रुचि का लाभ मिल रहा है।

Key takeaways

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की आगामी पब्लिक लिस्टिंग को लेकर बढ़ी उम्मीदों के चलते IFCI के शेयरों में 20% का उछाल आया और यह एक साल के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। एक्सचेंज में एक हितधारक होने के नाते, IFCI को देश के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट ऑपरेटर से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की बढ़ती रुचि का लाभ मिल रहा है।

IFCI Ltd के शेयरों में स्टॉक एक्सचेंजों पर भारी उछाल देखा गया, जिसने 20% के अपर सर्किट को छू लिया और 52-सप्ताह का नया उच्च स्तर बनाया। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब बाजार भारतीय इतिहास के सबसे प्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में से एक: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की लिस्टिंग के लिए तैयार हो रहा है।

कनेक्शन: IFCI में क्यों आ रही है तेजी

हालांकि IFCI एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है, लेकिन इसकी वर्तमान स्टॉक गति काफी हद तक इसके निवेश पोर्टफोलियो से जुड़ी हुई है। कंपनी स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL) के माध्यम से NSE में एक महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी रखती है। चूंकि सार्वजनिक बाजारों में आने के बाद NSE का मूल्यांकन (valuation) आसमान छूने की उम्मीद है, इसलिए IFCI जैसी होल्डिंग कंपनियों के वैल्यूएशन को भी निवेशकों द्वारा फिर से आंका जा रहा है।

रिटेल और संस्थागत निवेशक अक्सर 'प्रॉक्सी' शेयरों की तलाश करते हैं जब कोई बड़ी कंपनी सार्वजनिक होने वाली होती है। इस मामले में, IFCI उन निवेशकों के लिए एक गेटवे के रूप में कार्य करता है जो NSE के संभावित लिस्टिंग लाभों से फायदा उठाना चाहते हैं।

NSE IPO की राह

NSE पिछले कई वर्षों से पब्लिक लिस्टिंग की योजना बना रहा है, लेकिन नियामक बाधाओं और पुराने कानूनी मामलों के कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई। हालांकि, हाल के घटनाक्रम संकेत देते हैं कि एक्सचेंज बाजार नियामक के पास अपने ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने के करीब पहुंच रहा है। यदि IPO आगे बढ़ता है, तो इक्विटी और डेरिवेटिव दोनों सेगमेंट में NSE की दबदबे वाली स्थिति को देखते हुए, यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक ऐतिहासिक घटना होने की उम्मीद है।

प्रदर्शन आउटलुक

स्टॉक ने विभिन्न समय सीमाओं में निरंतर वृद्धि दिखाई है, जिससे उन निवेशकों को पुरस्कृत किया गया है जिन्होंने इसकी एसेट होल्डिंग्स की दीर्घकालिक क्षमता पर नज़र रखी। इस सेंटिमेंट को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं:

बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि हालांकि मौजूदा तेजी IPO की चर्चा से प्रेरित है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और लिस्टिंग की सटीक समयरेखा के संबंध में NSE और नियामक की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। बाहरी IPO घटनाओं के आधार पर IFCI के प्रदर्शन की गारंटी नहीं दी जा सकती।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.