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एआई-संचालित यूपीआई भुगतानों के लिए मानवीय निगरानी का प्रस्ताव

By Arth Vani Desk · 2026-07-16

भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने एआई एजेंटों के माध्यम से किए जाने वाले उच्च-मूल्य वाले भुगतानों के लिए अनिवार्य मानवीय हस्तक्षेप का सुझाव दिया है। यह तब आया है जब एनपीसीआई और फिनटेक कंपनियां ऐसी प्रणालियाँ विकसित कर रही हैं जो एआई को यूपीआई लेनदेन शुरू करने की अनुमति दे सकती हैं, जिसका उद्देश्य सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

Key takeaways

भारत में डिजिटल भुगतानों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण विकास में, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणालियों द्वारा संसाधित उच्च-मूल्य वाले लेनदेन में अनिवार्य मानवीय निगरानी का प्रस्ताव रखा है। यह कदम विशेष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और विभिन्न फिनटेक फर्म सक्रिय रूप से ऐसे प्रोटोकॉल पर काम कर रही हैं जो एआई एजेंटों को लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से लेनदेन निष्पादित करने में सक्षम बनाएंगे।

एआई-संचालित लेनदेन में सुरक्षा सुनिश्चित करना

CERT-In के प्रस्ताव का मूल 'ह्यूमन-इन-द-लूप' तंत्र को पेश करना है, खासकर उन भुगतानों के लिए जिनमें पर्याप्त राशि शामिल होती है। इसका मतलब है कि भले ही एक एआई प्रणाली भुगतान शुरू करे या संसाधित करे, इसे अंतिम रूप देने से पहले एक मानव को इसकी समीक्षा और अनुमोदन करने की आवश्यकता होगी। इस सिफारिश के पीछे प्राथमिक उद्देश्य पूरी तरह से स्वायत्त एआई भुगतान प्रणालियों से जुड़े संभावित जोखिमों, जैसे त्रुटियों, धोखाधड़ी या सुरक्षा उल्लंघनों को कम करना है।

वित्त में एजेंटिक एआई का उदय

एजेंटिक एआई उन एआई प्रणालियों को संदर्भित करता है जो विशिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकती हैं, अक्सर लगातार मानवीय इनपुट के बिना निर्णय लेकर और कार्रवाई करके। भुगतानों के संदर्भ में, इसका मतलब एक एआई सहायक हो सकता है जो उपयोगकर्ता के वित्त का प्रबंधन करता है, बिलों का भुगतान करता है, या यहां तक कि पूर्व-निर्धारित नियमों या सीखे गए व्यवहारों के आधार पर निवेश-संबंधी लेनदेन भी करता है। जबकि यह अत्यधिक सुविधा और दक्षता प्रदान करता है, ऐसी स्वायत्तता के वित्तीय निहितार्थों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है।

यूपीआई का विकास और एआई एकीकरण

यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतानों में क्रांति ला दी है, जिससे लेनदेन सहज और तत्काल हो गए हैं। जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी आगे बढ़ती है, यूपीआई में एआई को एकीकृत करने से उपयोगकर्ता अनुभव को और बढ़ाया जा सकता है, नियमित वित्तीय कार्यों को स्वचालित किया जा सकता है, और संभावित रूप से वित्तीय सेवाओं के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, यह एकीकरण नई चुनौतियां भी लाता है, खासकर जब एआई शामिल होता है तो लेनदेन की जवाबदेही और सुरक्षा के संबंध में।

मानवीय हस्तक्षेप क्यों महत्वपूर्ण है

CERT-In का प्रस्ताव भारतीय नियामक निकायों द्वारा तकनीकी नवाचार को उपभोक्ता संरक्षण और वित्तीय सुरक्षा के साथ संतुलित करने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे एनपीसीआई और फिनटेक कंपनियां एआई भुगतान क्षेत्र में नवाचार करना जारी रखती हैं, ये दिशानिर्देश भारतीयों के डिजिटल लेनदेन करने के तरीके के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय या निवेश सलाह का गठन नहीं करता है।

Frequently asked questions

भुगतानों के संदर्भ में 'एजेंटिक एआई' क्या है?

एजेंटिक एआई उन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियों को संदर्भित करता है जो स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और कार्यों को निष्पादित करने के लिए कार्य कर सकती हैं, जैसे कि लगातार मानवीय पर्यवेक्षण के बिना भुगतान शुरू करना या संसाधित करना।

एआई भुगतानों के लिए मानवीय निगरानी का प्रस्ताव क्यों दिया जा रहा है?

उच्च-मूल्य वाले लेनदेन में धोखाधड़ी, त्रुटियों और सुरक्षा उल्लंघनों जैसे संभावित मुद्दों को रोकने के लिए मानवीय निगरानी का प्रस्ताव किया गया है, जिससे एआई-संचालित भुगतान प्रणालियों में जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

यह मेरे यूपीआई लेनदेन को कैसे प्रभावित करेगा?

यदि लागू किया जाता है, तो यह प्रस्ताव मुख्य रूप से एआई एजेंटों के माध्यम से किए गए उच्च-मूल्य वाले लेनदेन को प्रभावित करेगा। आपके द्वारा सीधे शुरू किए गए नियमित यूपीआई लेनदेन के लिए, शायद कोई बदलाव नहीं होगा। इसका उद्देश्य भविष्य की एआई-संचालित भुगतान विधियों के लिए सुरक्षा की एक परत जोड़ना है।

Source: Medianama
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