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टैक्स राहत के बाद भारतीय बॉन्ड में विदेशी निवेश ₹8,795 करोड़ बढ़ा

By Arth Vani Desk · 2026-06-09

टैक्स में महत्वपूर्ण छूट मिलने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ा दी है। 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत पूंजी के इस प्रवाह से रुपये को मजबूती मिलने और घरेलू ऋण बाजार में लिक्विडिटी में सुधार होने की उम्मीद है।

Key takeaways

टैक्स में महत्वपूर्ण छूट मिलने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ा दी है। 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के तहत पूंजी के इस प्रवाह से रुपये को मजबूती मिलने और घरेलू ऋण बाजार में लिक्विडिटी में सुधार होने की उम्मीद है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय ऋण (debt) बाजार के प्रति नया उत्साह दिखा रहे हैं, और उन्होंने सरकारी प्रतिभूतियों में ₹8,795 करोड़ का अतिरिक्त निवेश किया है। यह उछाल भारत सरकार द्वारा 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के माध्यम से किए गए निवेश पर ब्याज आय और पूंजीगत लाभ (capital gains) पर टैक्स छूट देने के रणनीतिक कदम के बाद आया है।

निवेश प्रवाह के पीछे के मुख्य कारक

निवेश में इस अचानक वृद्धि का मुख्य कारण वैश्विक निवेशकों के लिए टैक्स के बोझ को कम करने का सरकार का निर्णय है। FAR प्रतिभूतियों के लिए ब्याज और पूंजीगत लाभ पर टैक्स हटाकर, भारत ने अपने सॉवरेन ऋण को अन्य उभरते बाजारों की तुलना में काफी आकर्षक बना दिया है। यह पहल भारत के ऋण बाजार को वैश्विक वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकृत करने और स्थिर, दीर्घकालिक विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

रुपये और लिक्विडिटी पर प्रभाव

विदेशी फंडों के इस प्रवाह से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह के प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:

ऋण बाजार के लिए एक नया युग

'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) की शुरुआत गैर-निवासियों को बिना किसी निवेश सीमा के निर्दिष्ट सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की अनुमति देने के लिए की गई थी। इस सुलभता को हालिया टैक्स प्रोत्साहनों के साथ जोड़कर, सरकार ने प्रवेश की बाधाओं को सफलतापूर्वक कम कर दिया है। खुदरा निवेशकों और व्यापक बाजार के लिए, यह एक परिपक्व होते वित्तीय परिदृश्य का संकेत है जहां भारतीय सॉवरेन ऋण वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो का एक मुख्य हिस्सा बनता जा रहा है।

जैसे-जैसे वैश्विक बॉन्ड सूचकांक भारतीय प्रतिभूतियों को शामिल करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, ये नीतिगत बदलाव यह सुनिश्चित करते हैं कि घरेलू बाजार विदेशी पूंजी के निरंतर प्रवाह के लिए तैयार है, जिससे सरकार को राजकोषीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऋणदाताओं का एक विविध समूह मिल सके।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.