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मध्य पूर्व में तनाव कम होने से वैश्विक बाजारों में उछाल; जापान का Nikkei 4% चढ़ा

By Arth Vani Desk · 2026-06-12

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को रद्द करने के फैसले से शांति की उम्मीदें बढ़ने के बाद शुक्रवार को इक्विटी बाजारों में जोरदार रिकवरी देखी गई। जापान के Nikkei इंडेक्स ने 4% की बढ़त के साथ इस तेजी का नेतृत्व किया, जो वैश्विक निवेशक धारणा में सकारात्मक बदलाव का संकेत है और भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

Key takeaways

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को रद्द करने के फैसले से शांति की उम्मीदें बढ़ने के बाद शुक्रवार को इक्विटी बाजारों में जोरदार रिकवरी देखी गई। जापान के Nikkei इंडेक्स ने 4% की बढ़त के साथ इस तेजी का नेतृत्व किया, जो वैश्विक निवेशक धारणा में सकारात्मक बदलाव का संकेत है और भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

वैश्विक राहत से बाजारों में आई तेजी

वैश्विक वित्तीय बाजारों में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण 'रिलीफ रैली' देखी गई क्योंकि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिले। इस बदलाव का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के खिलाफ नियोजित सैन्य हमलों को रोकने का फैसला था। इस कदम ने संघर्ष के तात्कालिक डर को राजनयिक समाधान की नई उम्मीदों में बदल दिया है, जिससे निवेशकों को इक्विटी जैसे जोखिम भरे एसेट्स की ओर लौटने का प्रोत्साहन मिला है।

टेक शेयरों ने संभाली कमान

यह सकारात्मक माहौल जापान में सबसे अधिक दिखाई दिया, जहाँ Nikkei 225 शेयर औसत में 4% से अधिक का उछाल आया। यह तेजी व्यापक थी, लेकिन टेक्नोलॉजी सेक्टर स्पष्ट विजेता बनकर उभरा। निवेशकों ने सेमीकंडक्टर और चिप से संबंधित शेयरों में भारी खरीदारी की, जो वैश्विक व्यापार और स्थिरता के प्रति संवेदनशील होते हैं। Advantest और Tokyo Electron जैसे प्रमुख दिग्गजों ने पर्याप्त बढ़त दर्ज की, जो हाई-टेक सप्लाई चेन में व्यापक विश्वास को दर्शाता है।

व्यापक बाजारों और भारत पर प्रभाव

व्यापक Topix इंडेक्स ने भी महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज की, जिससे पुष्टि हुई कि रिकवरी केवल कुछ लार्ज-कैप शेयरों तक सीमित नहीं थी। भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए, इस तरह के वैश्विक उतार-चढ़ाव महत्वपूर्ण संकेतक हैं। ऐतिहासिक रूप से, मध्य पूर्व के तनाव में कमी से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता कम होती है और उभरते बाजारों में एक सामान्य 'रिस्क-ऑन' सेंटिमेंट पैदा होता है। जब Nikkei जैसे वैश्विक दिग्गज इतनी बड़ी बढ़त दर्ज करते हैं, तो यह अक्सर भारतीय शेयर बाजारों की शुरुआत के लिए एक सकारात्मक टोन सेट करता है और दलाल स्ट्रीट पर समग्र मूड में सुधार करता है।

डी-एस्केलेशन पर ध्यान

हालांकि बाजार अभी भी सुर्खियों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, लेकिन वर्तमान ध्यान युद्ध के खतरे से हटकर संभावित स्थिरता की ओर चला गया है। प्रमुख वैश्विक शक्तियों के बीच बयानबाजी में नरमी ने उन इक्विटी बाजारों को राहत दी है जो हाल ही में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण दबाव में थे। जब तक शांति की दिशा में प्रगति बनी रहती है, बाजार विश्लेषकों को डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो और अंतर्राष्ट्रीय सूचकांकों में पूंजी के निरंतर प्रवाह की उम्मीद है।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.