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सोने और चांदी की कीमतों को लगा झटका, क्योंकि अमेरिकी फेड रेट में कटौती की उम्मीदें हुईं धुंधली

By Arth Vani Desk · 2026-06-12

पिछले एक साल में कीमती धातुओं में देखी गई भारी तेजी अब थमती नजर आ रही है, क्योंकि बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों और लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति ने अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित कटौती में देरी कर दी है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय निवेशकों को कीमतों में गिरावट के दौर के लिए तैयार रहना चाहिए।

Key takeaways

पिछले एक साल में कीमती धातुओं में देखी गई भारी तेजी अब थमती नजर आ रही है, क्योंकि बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों और लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति ने अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित कटौती में देरी कर दी है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय निवेशकों को कीमतों में गिरावट के दौर के लिए तैयार रहना चाहिए।

बाजार की धारणा में बदलाव

भारतीय परिवारों के लिए, सोना लंबे समय से सबसे सुरक्षित संपत्ति (safe-haven asset) रहा है, जिसने पिछले बारह महीनों में प्रभावशाली रिटर्न दिया है। हालांकि, अब हवा का रुख बदलता दिख रहा है। बाजार विशेषज्ञ अब चेतावनी दे रहे हैं कि सोने की इस दौड़ (gold rush) में एक बड़ा गतिरोध आ सकता है। ऐतिहासिक तेजी के बाद, सोना और चांदी दोनों में गिरावट देखी जा रही है क्योंकि वैश्विक व्यापक आर्थिक कारक कीमती धातुओं के प्रतिकूल हो रहे हैं।

मुद्रास्फीति और ब्याज दर का संबंध

इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति पर बदलता नजरिया है। इस साल की शुरुआत में, निवेशक ब्याज दरों में तेजी से कटौती पर दांव लगा रहे थे। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर सोने को कम आकर्षक बनाती हैं क्योंकि यह धातु कोई ब्याज या लाभांश नहीं देती है। इसके विपरीत, जब दरें गिरती हैं, तो सोना पसंदीदा संपत्ति बन जाता है।

वर्तमान में, दो प्रमुख कारक ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए हुए हैं:

भारतीय निवेशकों पर प्रभाव

अमेरिकी डॉलर की मजबूती, जिसे उच्च ब्याज दरों से समर्थन मिलता है, पारंपरिक रूप से वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों पर दबाव डालती है। भारत में खुदरा निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि पिछले साल ₹ (INR) के संदर्भ में देखी गई तीव्र वृद्धि अल्पावधि में दोहराए जाने की संभावना नहीं है। हालांकि सोना एक विविध पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, लेकिन आसान और दोहरे अंकों वाले मासिक लाभ का दौर फिलहाल रुक सकता है।

चांदी पर भी समान दबाव

चांदी, जिसे अक्सर सोने का अधिक अस्थिर (volatile) विकल्प माना जाता है, भी दबाव महसूस कर रही है। चूंकि संस्थागत निवेशक बॉन्ड बाजार में उच्च प्रतिफल (yields) पाने के लिए कीमती धातुओं में अपनी स्थिति कम कर रहे हैं, इसलिए चांदी की कीमतें दबाव में रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को पिछली उल्कापिंड जैसी वृद्धि जारी रहने की उम्मीद करने के बजाय 'उतार-चढ़ाव भरे सफर' और भविष्य में संभावित गिरावट के लिए तैयार रहना चाहिए।

अस्वीकरण: कीमती धातुओं के निवेश में बाजार जोखिम होता है; पिछला प्रदर्शन भविष्य के परिणामों का संकेतक नहीं है और इस सामग्री को वित्तीय सलाह नहीं, बल्कि केवल सूचनात्मक माना जाना चाहिए।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.