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ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्मों की संख्या 18 महीने पहले अपने चरम पर थी, 'ज़ोंबी' फर्मों की संख्या बढ़ रही है, कहते हैं आर्कटोस के CEO

By Arth Vani Desk · 2026-10-28

आर्कटोस पार्टनर्स के CEO इयान चार्ल्स के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सक्रिय निजी बाज़ार निवेश फर्मों की संख्या लगभग 18 महीने पहले अपने चरम पर पहुँच गई थी और अब इसमें गिरावट आ रही है। यह प्रवृत्ति 'ज़ोंबी फर्मों' – जो अपने अगले निवेश माध्यमों के लिए धन सुरक्षित करने में असमर्थ हैं – की संख्या में वृद्धि के कारण है।

Key takeaways

आर्कटोस पार्टनर्स के CEO इयान चार्ल्स के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सक्रिय निजी बाज़ार निवेश फर्मों की संख्या लगभग 18 महीने पहले अपने चरम पर पहुँच गई थी और अब इसमें गिरावट आ रही है। यह प्रवृत्ति 'ज़ोंबी फर्मों' – जो अपने अगले निवेश माध्यमों के लिए धन सुरक्षित करने में असमर्थ हैं – की संख्या में वृद्धि के कारण है।

वैश्विक निजी बाजारों का परिदृश्य महत्वपूर्ण बदलाव से गुजर रहा है, जिसमें सक्रिय निवेश फर्मों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। प्राइवेट इक्विटी के लिए तरलता समाधान (liquidity solutions) में विशेषज्ञता रखने वाली फर्म आर्कटोस पार्टनर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इयान चार्ल्स ने बताया कि सक्रिय निजी बाजार फर्मों की संख्या लगभग 18 महीने पहले अपने चरम पर पहुंच गई थी।

तब से, इस क्षेत्र में संकुचन देखा गया है, जिसका मुख्य कारण 'ज़ोंबी फर्मों' की संख्या में वृद्धि है। ये वे प्राइवेट इक्विटी फर्म हैं जो अपने अगले फंड जुटाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, जिससे वे नए निवेश करने या अपनी परिचालन गतिविधियों को पहले की सक्रिय गति से जारी रखने में असमर्थ हो गई हैं। नई पूंजी सुरक्षित करने में यह अक्षमता निजी निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

'ज़ोंबी' प्राइवेट इक्विटी फर्म क्या हैं?

निजी बाजारों के संदर्भ में, एक 'ज़ोंबी फर्म' ज़रूरी नहीं कि एक ऐसी कंपनी है जो दिवालिया हो गई हो, बल्कि यह एक निवेश फर्म है जो निवेशकों (जैसे पेंशन फंड, एंडाउमेंट या उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्ति) से नए फंड लॉन्च करने के लिए ताज़ा पूंजी आकर्षित नहीं कर पा रही है। नए फंड के बिना, ये फर्म अनिवार्य रूप से रुक गई हैं, नए निवेश अवसरों का पीछा करने या अपनी मौजूदा पोर्टफोलियो कंपनियों को प्रभावी ढंग से समर्थन देने में असमर्थ हैं।

उच्च ब्याज दरों और आर्थिक अनिश्चितताओं से चिह्नित मौजूदा माहौल ने प्राइवेट इक्विटी फर्मों के लिए पूंजी जुटाना अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। निवेशक अधिक चयनात्मक हो रहे हैं, और धन जुटाने की प्रक्रिया तेजी से प्रतिस्पर्धी और लंबी हो गई है।

व्यापक बाजार और भारतीय निवेशकों के लिए निहितार्थ

हालांकि वैश्विक प्राइवेट इक्विटी फंडों में सीधा निवेश आमतौर पर संस्थागत या उच्च-निवल-मूल्य वाले निवेशकों के लिए होता है, इस प्रवृत्ति के व्यापक निहितार्थ हैं। निजी बाजारों में मंदी से वित्तीय बाजारों में समग्र पूंजी प्रवाह और भावना प्रभावित हो सकती है। यह एक सख्त फंडिंग माहौल का संकेत देता है, जो सार्वजनिक बाजार के मूल्यांकन और निजी तौर पर आयोजित कंपनियों, जिनमें भारत में विकास पूंजी की तलाश करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं, के लिए पूंजी की उपलब्धता को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है।

भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए, यह वैश्विक विकास वित्तीय बाजारों के चक्रीय स्वरूप और उचित परिश्रम के महत्व की याद दिलाता है, खासकर कम तरल निवेश माध्यमों में। जबकि भारत में अधिकांश खुदरा निवेशक आमतौर पर सार्वजनिक इक्विटी, म्यूचुअल फंड या निश्चित आय उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, निजी बाजारों में वैश्विक रुझानों को समझना व्यापक आर्थिक स्वास्थ्य और बड़े संस्थागत खिलाड़ियों द्वारा अपनाई गई निवेश रणनीतियों में संभावित बदलावों के बारे में जानकारी प्रदान कर सकता है, जो अंततः घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकता है।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें निवेश सलाह शामिल नहीं है।

Frequently asked questions

एक 'निजी बाजार फर्म' क्या करती है?

एक निजी बाजार फर्म, जैसे कि एक प्राइवेट इक्विटी फर्म, उन कंपनियों में निवेश करती है जो स्टॉक एक्सचेंजों पर सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध नहीं हैं। वे निजी व्यवसायों को खरीदने, विकसित करने और अंततः बेचने के लिए संस्थागत निवेशकों और उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों से पूंजी जुटाते हैं।

इस संदर्भ में 'प्राइवेट इक्विटी ज़ोंबी फर्मों' का क्या अर्थ है?

इस संदर्भ में, 'ज़ोंबी फर्म' उन प्राइवेट इक्विटी निवेश फर्मों को संदर्भित करती हैं जो अपने अगले निवेश फंड के लिए पूंजी जुटाने में असमर्थ हैं। इसका मतलब है कि वे नए निवेश नहीं कर सकते हैं और मौजूदा पोर्टफोलियो का प्रबंधन करने के बावजूद संचालन के लिए संघर्ष कर सकते हैं।

यह वैश्विक प्रवृत्ति भारतीय खुदरा निवेशकों को कैसे प्रभावित करती है?

हालांकि अधिकांश भारतीय खुदरा निवेशक सीधे वैश्विक प्राइवेट इक्विटी में निवेश नहीं करते हैं, इस क्षेत्र में मंदी वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेशक भावना में व्यापक बदलाव का संकेत दे सकती है। यह सार्वजनिक बाजार के रुझानों और समग्र आर्थिक तरलता को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है, जो अंततः भारतीय इक्विटी या अन्य परिसंपत्ति वर्गों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है जहां खुदरा निवेशक सक्रिय हैं।

Source: Mint Markets
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