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इंफोसिस के शेयरों में 9% की गिरावट: आईटी सेक्टर में वैश्विक चुनौतियों के चलते ₹40,000 करोड़ स्वाहा

By Arth Vani Desk · 2026-06-19

इंफोसिस के शेयरों में आज भारी गिरावट आई और यह 52-हफ्तों के नए निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे कुछ ही मिनटों में बाजार मूल्य से लगभग ₹40,000 करोड़ साफ हो गए। यह गिरावट वैश्विक दिग्गज कंपनी एक्सेंचर (Accenture) द्वारा राजस्व अनुमान घटाने के बाद आई है, जिससे भारतीय आईटी क्षेत्र में व्यापक मंदी की आशंका बढ़ गई है।

Key takeaways

इंफोसिस के शेयरों में आज भारी गिरावट आई और यह 52-हफ्तों के नए निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे कुछ ही मिनटों में बाजार मूल्य से लगभग ₹40,000 करोड़ साफ हो गए। यह गिरावट वैश्विक दिग्गज कंपनी एक्सेंचर (Accenture) द्वारा राजस्व अनुमान घटाने के बाद आई है, जिससे भारतीय आईटी क्षेत्र में व्यापक मंदी की आशंका बढ़ गई है।

आईटी निवेशकों के लिए एक बड़ी चेतावनी

भारत की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के निवेशकों के लिए आज सुबह काफी कठिन रही, क्योंकि कंपनी के शेयर की कीमत 9% गिर गई और यह 52-हफ्तों के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। इस अचानक आई गिरावट के कारण मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) में लगभग ₹40,000 करोड़ का भारी नुकसान हुआ। रिटेल निवेशकों के लिए, जो इंफोसिस को एक स्थिर ब्लू-चिप स्टॉक मानते हैं, यह उतार-चढ़ाव एक स्पष्ट अनुस्मारक है कि भारतीय सॉफ्टवेयर निर्यातक वैश्विक आर्थिक रुझानों से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं।

एक्सेंचर का ट्रिगर

इस बिकवाली का मुख्य कारण अटलांटिक के दूसरी ओर से आई खबर थी। वैश्विक आईटी सेवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एक्सेंचर (Accenture), जो अक्सर उद्योग की दिशा तय करती है, ने वर्ष के लिए अपने राजस्व वृद्धि के अनुमान को घटा दिया है। टेक्नोलॉजी सेवाओं की दुनिया में, एक्सेंचर को अक्सर एक अग्रणी संकेतक माना जाता है; जब वे मंदी का संकेत देते हैं, तो इंफोसिस, टीसीएस (TCS) और विप्रो (Wipro) जैसी भारतीय कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ता है। संशोधित पूर्वानुमान बताता है कि वैश्विक कंपनियां अपने खर्चों में कटौती कर रही हैं और नई टेक्नोलॉजी परियोजनाओं में देरी कर रही हैं।

आईटी खर्च क्यों कम हो रहा है?

बाजार वर्तमान में 'डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग' (वैकल्पिक खर्च) में कमी को लेकर चिंतित है। सरल शब्दों में, यह वह पैसा है जिसे कंपनियां नई और आधुनिक परियोजनाओं पर खर्च करती हैं जो दैनिक कामकाज के लिए अनिवार्य नहीं होती हैं। इस सावधानी के पीछे कई कारण हैं:

सेक्टर के लिए इसके क्या मायने हैं

इंफोसिस में आई यह भारी गिरावट महज एक अकेली घटना नहीं है; यह आने वाले वर्ष के लिए भारतीय आईटी क्षेत्र के विकास पथ को लेकर बाजार की घबराहट को दर्शाती है। जब इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनी इतनी बुरी तरह गिरती है, तो यह अक्सर पूरे निफ्टी आईटी (Nifty IT) इंडेक्स को नीचे खींच लेती है, जिससे म्यूचुअल फंड और व्यक्तिगत पोर्टफोलियो दोनों प्रभावित होते हैं। विश्लेषक अब बारीकी से देख रहे हैं कि क्या अन्य भारतीय आईटी दिग्गज भी अपनी आगामी तिमाही नतीजों में इसी तरह की चिंताएं व्यक्त करेंगे।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है; निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently asked questions

आज इंफोसिस के शेयरों में गिरावट क्यों आई?

एक्सेंचर द्वारा अपने राजस्व अनुमान को कम करने के कारण यह गिरावट आई, जिससे यह संकेत मिला कि वैश्विक कंपनियां आईटी सेवाओं पर अपना खर्च कम कर रही हैं।

आईटी के संदर्भ में 'डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग' क्या है?

इसका अर्थ उस बजट से है जो कंपनियां व्यवसाय चलाने के लिए आवश्यक बुनियादी रखरखाव के बजाय नए और वैकल्पिक तकनीकी प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित करती हैं।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व भारतीय आईटी शेयरों को कैसे प्रभावित करता है?

जब यूएस फेड ब्याज दरों को ऊंचा रखता है, तो यह अमेरिकी कंपनियों के लिए लागत बढ़ा देता है, जिससे वे तकनीकी निवेश में कटौती करती हैं। इसका सीधा असर भारतीय आईटी निर्यातकों के राजस्व पर पड़ता है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.