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Swift ने अनुपालन चुनौतियों के बीच बैंकों के लिए ISO 20022 की समय-सीमा बढ़ाई

By Arth Vani Desk · 2026-08-28

Swift ने वित्तीय संस्थानों के लिए ISO 20022 भुगतान संदेशों के लिए संरचित डाक पते अपनाने की पिछली निर्धारित नवंबर की समय-सीमा को स्थगित कर दिया है। यह विस्तार कई बैंकों द्वारा नई वैश्विक मानक के साथ अपनी प्रणालियों को संरेखित करने के लिए अधिक समय का अनुरोध करने के बाद आया है, जिसका उद्देश्य सीमा-पार भुगतानों की सटीकता और दक्षता को बढ़ाना है।

Key takeaways

वैश्विक अंतरबैंक वित्तीय दूरसंचार नेटवर्क, Swift ने ISO 20022 भुगतान संदेशों के भीतर असंरचित से संरचित डाक पतों में परिवर्तन करने वाले बैंकों के लिए अपनी समय-सीमा के विस्तार की घोषणा की है। नवंबर के लिए निर्धारित मूल समय-सीमा को वित्तीय संस्थानों से व्यापक अनुरोधों के बाद आगे बढ़ा दिया गया है, जिन्हें नए मानक का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है।

यह कदम भुगतान अवसंरचना को आधुनिक बनाने के चल रहे वैश्विक प्रयास में एक महत्वपूर्ण विकास है। ISO 20022 वित्तीय संस्थानों के बीच इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के आदान-प्रदान के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है। वित्तीय लेनदेन, विशेष रूप से सीमा-पार भुगतानों के क्षेत्र में, गति, पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाने के लिए इसका अपनाया जाना महत्वपूर्ण है।

ISO 20022 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

ISO 20022 मूल रूप से वित्तीय मैसेजिंग के लिए एक नई, समृद्ध भाषा है। पुराने, अधिक प्रतिबंधात्मक मैसेजिंग प्रारूपों के विपरीत, यह प्रत्येक भुगतान संदेश के भीतर कहीं अधिक विस्तृत जानकारी ले जाने की अनुमति देता है। इसमें प्रेषक और प्राप्तकर्ता के पतों के लिए संरचित डेटा शामिल है, जो अस्पष्टताओं को खत्म करने और त्रुटियों की संभावना को कम करने में मदद करता है।

भारतीय बैंकों और उनके ग्राहकों के लिए, ISO 20022 का पूर्ण अपनाने का मतलब अंतरराष्ट्रीय प्रेषण और अन्य सीमा-पार लेनदेन के लिए एक अधिक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है। वर्तमान में, कई भुगतान संदेश पतों के लिए असंरचित पाठ क्षेत्रों का उपयोग करते हैं, जिससे मैन्युअल हस्तक्षेप, देरी और संभावित गलत व्याख्या या डेटा प्रविष्टि त्रुटियों के कारण उच्च लागत हो सकती है। संरचित प्रारूप में जाने से यह सुनिश्चित होता है कि पते की जानकारी लगातार स्वरूपित और मशीन-पठनीय है, जिससे सीधे प्रसंस्करण दरें (straight-through processing rates) बेहतर होती हैं।

देरी क्यों?

नवंबर की समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय मौजूदा बैंकिंग प्रणालियों में नई संरचित पते की आवश्यकताओं को एकीकृत करने की जटिलता से उपजा है। भारत सहित विश्व भर के वित्तीय संस्थानों को अपने आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने, अपने भुगतान प्रसंस्करण अनुप्रयोगों को अपडेट करने और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण संसाधन निवेश करने की आवश्यकता है। दैनिक रूप से संसाधित होने वाले लेनदेन की भारी मात्रा और भुगतान प्रणालियों की महत्वपूर्ण प्रकृति को देखते हुए, एक सहज और त्रुटि-मुक्त संक्रमण सुनिश्चित करना सर्वोपरि है। बैंकों ने दैनिक संचालन को बाधित किए बिना इन परिवर्तनों का ठीक से परीक्षण और परिनियोजन (deploy) करने के लिए सामूहिक रूप से अधिक समय का अनुरोध किया।

भारतीय ग्राहकों पर प्रभाव

हालांकि ISO 20022 प्रवासन एक आंतरिक बैंकिंग उद्योग का कार्य है, इसका सफल कार्यान्वयन अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में शामिल भारतीय खुदरा ग्राहकों को ठोस लाभ प्रदान करेगा। इनमें शामिल हैं:

यह विस्तार बैंकों को आवश्यक समायोजन करने के लिए पर्याप्त समय देता है, जो अंततः एक अधिक मजबूत और कुशल वैश्विक भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा जिससे भारतीय ग्राहकों को सीधा लाभ होगा। हालांकि कोई नई समय-सीमा निर्दिष्ट नहीं की गई है, यह कदम नए वैश्विक मानक में एक स्थिर और प्रभावी संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए Swift की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently asked questions

ISO 20022 क्या है?

ISO 20022 वित्तीय संस्थानों के बीच आदान-प्रदान किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जिसे वित्तीय लेनदेन, विशेष रूप से भुगतानों के लिए समृद्ध डेटा और अधिक दक्षता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Swift ने ISO 20022 संरचित पतों की समय-सीमा क्यों बढ़ाई?

Swift ने समय-सीमा बढ़ाई क्योंकि कई बैंकों ने भुगतान संदेशों में संरचित डाक पतों की नई आवश्यकताओं का अनुपालन करने के लिए अपनी जटिल आईटी प्रणालियों और प्रक्रियाओं को अपडेट करने के लिए अधिक समय का अनुरोध किया था।

यह परिवर्तन भारतीय खुदरा ग्राहकों को कैसे प्रभावित करता है?

जबकि यह परिवर्तन मुख्य रूप से बैंकों को प्रभावित करता है, भारतीय खुदरा ग्राहकों को अंततः वैश्विक भुगतान प्रसंस्करण में कम त्रुटियों और बढ़ी हुई दक्षता के कारण सुगम, तेज़ और अधिक सटीक अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण से लाभ होगा।

Source: Finextra
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