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शेयर बाजारों और रुपये को मजबूती देने के लिए सरकार ने विदेशी निवेश के नियमों में ढील दी

By Arth Vani Desk · 2026-06-15

भारत ने अपनी पोर्टफोलियो निवेश योजना को विदेशी व्यक्तियों और संस्थाओं के व्यापक दायरे के लिए खोल दिया है। निवेश की सीमाओं को दोगुना करने और प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाकर, इस कदम का उद्देश्य रुपये को स्थिर करना और भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में नकदी प्रवाह को बढ़ाना है।

Key takeaways

भारत ने अपनी पोर्टफोलियो निवेश योजना को विदेशी व्यक्तियों और संस्थाओं के व्यापक दायरे के लिए खोल दिया है। निवेश की सीमाओं को दोगुना करने और प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाकर, इस कदम का उद्देश्य रुपये को स्थिर करना और भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में नकदी प्रवाह को बढ़ाना है।

भारत के वित्तीय बाजारों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नियामक बदलाव में, सरकार ने सूचीबद्ध शेयरों में विदेशी निवेश को नियंत्रित करने वाले नियमों में ढील दी है। विदेशी व्यक्ति और संस्थाएं, जिन्हें तकनीकी रूप से 'भारत के बाहर निवासी व्यक्ति' (PROI) कहा जाता है, अब पोर्टफोलियो निवेश योजना (PIS) के माध्यम से भारतीय इक्विटी बाजारों में अधिक स्वतंत्र रूप से भाग ले सकते हैं।

बाजार की तरलता (Liquidity) को बढ़ावा देना

इस नीतिगत अपडेट के पीछे प्राथमिक उद्देश्य पूंजी के बहिर्वाह (outflow) को रोकना और भारतीय रुपये को आवश्यक सहायता प्रदान करना है। विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय कंपनियों के शेयर खरीदना आसान बनाकर, सरकार को विदेशी मुद्रा के प्रवाह में वृद्धि की उम्मीद है। औसत रिटेल निवेशक के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि बढ़ी हुई विदेशी भागीदारी से आमतौर पर शेयर बाजार में बेहतर तरलता आती है और यह घरेलू पोर्टफोलियो के मूल्यांकन (valuations) को सहारा दे सकता है।

उच्च सीमाएं और नए प्रावधान

अद्यतन दिशानिर्देश निवेश परिदृश्य में कई प्रमुख बदलाव पेश करते हैं:

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

यह नियामक बदलाव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार की अस्थिरता के कारण अक्सर विदेशी संस्थागत निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकाल लेते हैं। कौन निवेश कर सकता है इसके आधार को व्यापक बनाकर, भारत ऐसी अस्थिरता के खिलाफ एक बफर (सुरक्षा कवच) बना रहा है। इन प्रवाहों द्वारा समर्थित मजबूत रुपया आयातित मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जिससे परोक्ष रूप से भारतीय नागरिकों के घरेलू बजट को लाभ होता है।

जबकि ये बदलाव विदेशी प्रतिभागियों को लक्षित हैं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे घरेलू रिटेल संपत्ति सृजन के लिए एक अधिक मजबूत वातावरण तैयार होगा।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं देती है; कृपया निवेश निर्णय लेने से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श लें।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.