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आरबीआई गवर्नर ने राज्यों से डीबीटी के लिए यूएलआई, प्रोग्रामेबल सीबीडीसी अपनाने का आग्रह किया

By Arth Vani Desk · 2026-10-28

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भारतीय राज्यों से आग्रह किया है कि वे अपनी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणालियों में एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफ़ेस (यूएलआई) और प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) को एकीकृत करें। इस पहल का उद्देश्य देश भर में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी वितरण की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है।

Key takeaways

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने पूरे भारत में राज्य सरकारों से दो उन्नत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर: एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफ़ेस (ULI) और एक प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को अपनाने और उनका लाभ उठाने का आग्रह किया है। इस सिफारिश के पीछे प्राथमिक उद्देश्य प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाओं की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में उल्लेखनीय सुधार करना है।

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण भारत की कल्याण वितरण प्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार है। डीबीटी के तहत, सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभ सीधे बिचौलियों को छोड़कर लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित किए जाते हैं। यह तंत्र लीकेज को कम करने और यह सुनिश्चित करने में सहायक रहा है कि वित्तीय सहायता इच्छित प्राप्तकर्ताओं तक तुरंत पहुंचे। सामान्य उदाहरणों में खाना पकाने की गैस, खाद्यान्न, छात्रवृत्ति और विभिन्न पेंशन योजनाओं के लिए सब्सिडी शामिल हैं।

एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफ़ेस (यूएलआई) को समझना

एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफ़ेस (ULI) एक प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे भारत के विशाल लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न हितधारकों, जिनमें परिवहन सेवा प्रदाता, वेयरहाउसिंग ऑपरेटर और नियामक निकाय शामिल हैं, को एक ही डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र पर एकीकृत करना है। ऐसा करके, ULI आपूर्ति श्रृंखला में दृश्यता बढ़ाने, पारगमन समय को कम करने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने का प्रयास करता है। डीबीटी के लिए, विशेष रूप से खाद्यान्न या कृषि इनपुट जैसे सामानों की भौतिक डिलीवरी से जुड़ी योजनाओं में, यूएलआई परिवर्तनकारी साबित हो सकता है। यह सामानों की बेहतर ट्रैकिंग को सक्षम कर सकता है, डिलीवरी मार्गों को अनुकूलित कर सकता है, और भौतिक लाभों का समय पर और सत्यापन योग्य वितरण सुनिश्चित कर सकता है, जिससे चोरी कम होगी और समग्र सेवा वितरण में सुधार होगा।

प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) की खोज

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) फिएट मुद्रा का एक डिजिटल रूप है, जिसे केंद्रीय बैंक द्वारा जारी और विनियमित किया जाता है। निजी क्रिप्टोकरेंसी के विपरीत, यह संप्रभु धन है और भौतिक बैंक नोटों के समान विश्वास और सुरक्षा प्रदान करता है। सीबीडीसी का 'प्रोग्रामेबल' पहलू डीबीटी के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। प्रोग्रामेबल सीबीडीसी डिजिटल मुद्रा में ही विशिष्ट शर्तों या नियमों को एम्बेड करने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए, किसी विशेष कल्याणकारी योजना के लिए प्रोग्रामेबल सीबीडीसी के माध्यम से हस्तांतरित धन को केवल विशिष्ट वस्तुओं या सेवाओं (जैसे भोजन, दवा), एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के भीतर, या एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर खर्च करने के लिए 'प्रोग्राम' किया जा सकता है। यह सुविधा धन के दुरुपयोग की संभावना को काफी कम कर देगी, यह सुनिश्चित करेगी कि लाभों का उपयोग उनके इच्छित उद्देश्य के लिए किया जाए, और सरकारी व्यय के लिए उच्च स्तर की लेखा-परीक्षण योग्यता और जवाबदेही प्रदान करेगी।

गवर्नर का आह्वान एक अधिक तकनीकी रूप से उन्नत और कुशल सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली के लिए आरबीआई के दृष्टिकोण को उजागर करता है। डीबीटी फ्रेमवर्क में यूएलआई और प्रोग्रामेबल सीबीडीसी को एकीकृत करके, राज्य संभावित रूप से कई लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इनमें लाभों का तेजी से वितरण, धन की बढ़ी हुई सुरक्षा और पता लगाने की क्षमता, प्रशासनिक ऊपरी लागत में उल्लेखनीय कमी, और भ्रष्टाचार तथा धन के दुरुपयोग के खिलाफ एक मजबूत जांच शामिल है। यह कदम भारत के व्यापक डिजिटल परिवर्तन एजेंडा के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य बेहतर शासन और नागरिक सेवाओं के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना है।

जबकि पूर्ण कार्यान्वयन विवरण और समय-सीमा व्यक्तिगत राज्य सरकारों और आरबीआई से आगे नियामक स्पष्टता पर निर्भर करेगी, इन प्रौद्योगिकियों पर जोर एक ऐसे भविष्य को रेखांकित करता है जहां सरकारी कल्याणकारी योजनाएं न केवल प्रत्यक्ष बल्कि अधिक स्मार्ट, अधिक सुरक्षित और अत्यधिक पारदर्शी होंगी।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently asked questions

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) क्या हैं?

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) एक ऐसी प्रणाली है जहां सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जाते हैं, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार को कम करना और एलपीजी सब्सिडी, छात्रवृत्ति और पेंशन जैसी विभिन्न योजनाओं के लिए धन की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना है।

एक एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफ़ेस (यूएलआई) डीबीटी में कैसे मदद कर सकता है?

यूएलआई, लॉजिस्टिक्स सेवाओं को एकीकृत करके, डीबीटी योजनाओं के तहत भौतिक लाभों (जैसे खाद्य राशन या उपकरण) की कुशल ट्रैकिंग और वितरण में मदद कर सकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे लाभार्थियों तक तेजी से और अधिक विश्वसनीय रूप से पहुंचें, जबकि चोरी की संभावना कम हो।

'प्रोग्रामेबल' सीबीडीसी क्या है और यह डीबीटी से कैसे संबंधित है?

प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) पैसे का एक डिजिटल रूप है जिसमें एम्बेडेड नियम हो सकते हैं, जिससे डीबीटी के माध्यम से वितरित धन को विशिष्ट उपयोगों (जैसे केवल भोजन के लिए, एक निश्चित अवधि के भीतर) के लिए प्रोग्राम किया जा सके। यह सुनिश्चित करता है कि पैसा इच्छित अनुसार खर्च किया जाए, जिससे जवाबदेही बढ़ती है और दुरुपयोग कम होता है।

Source: GNews Banking
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