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FY26 में Curefoods का राजस्व 23% बढ़कर ₹916 करोड़ हुआ, शुद्ध घाटा बढ़कर ₹192 करोड़ पर पहुँचा

By Arth Vani Desk · 2026-09-18

प्रमुख फूड-टेक स्टार्टअप Curefoods ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में अपने परिचालन राजस्व (operating revenue) में साल-दर-साल 23% की वृद्धि दर्ज की है, जो ₹916 करोड़ तक पहुँच गया है। हालाँकि, इसी अवधि के दौरान इसका शुद्ध घाटा (net loss) भी 13% बढ़कर ₹192 करोड़ हो गया।

Key takeaways

भारतीय फूड-टेक कंपनी Curefoods, जिसने हाल ही में अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) की योजनाओं को टाल दिया है, ने वित्त वर्ष 2026 में अपने परिचालन राजस्व में 23% की महत्वपूर्ण साल-दर-साल वृद्धि देखी, जो बढ़कर ₹916 करोड़ हो गई। यह पिछले वित्त वर्ष (FY25) में रिपोर्ट किए गए ₹746 करोड़ की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि है।

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास दाखिल कंपनी के समेकित वित्तीय विवरणों (consolidated financial statements) से प्राप्त ये वित्तीय आंकड़े कंपनी के बढ़ते परिचालन पैमाने को दर्शाते हैं। Curefoods क्लाउड किचन और मल्टी-ब्रांड रेस्तरां का एक नेटवर्क संचालित करती है, जिसमें EatFit, CakeZone और Great Indian Khichdi जैसे लोकप्रिय ब्रांड शामिल हैं।

राजस्व वृद्धि के बीच शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी

राजस्व में मजबूत वृद्धि के बावजूद, Curefoods के शुद्ध घाटे में भी साल-दर-साल आधार पर 13% की बढ़ोतरी देखी गई। FY26 के लिए शुद्ध घाटा ₹192 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹170 करोड़ था। यह इंगित करता है कि जहाँ कंपनी अधिक बिक्री कर रही है, वहीं उसके खर्च भी बढ़ रहे हैं, जिससे बॉटम-लाइन घाटा बढ़ रहा है।

प्रतिस्पर्धी फूड-टेक क्षेत्र में विकास पर केंद्रित कई स्टार्टअप्स के बीच शुद्ध घाटे में वृद्धि एक सामान्य प्रवृत्ति है, जो अक्सर तत्काल लाभप्रदता के बजाय बाजार विस्तार और ग्राहक अधिग्रहण को प्राथमिकता देते हैं। इस क्षेत्र की कंपनियां अपने परिचालन को बढ़ाने के लिए अक्सर तकनीक, लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश करती हैं।

भारतीय फिनटेक और फूड-टेक परिदृश्य के लिए इसके मायने

Curefoods का वित्तीय प्रदर्शन भारत के तेजी से विकसित हो रहे फूड-टेक उद्योग की गतिशीलता की झलक पेश करता है। बढ़ते डिजिटल अपनाने और ऑनलाइन फूड डिलीवरी व विविध व्यंजनों के लिए उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के कारण यह क्षेत्र लगातार महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहा है।

भारतीय खुदरा निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए, ये आंकड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के भीतर विकास की संभावनाओं और अंतर्निहित जोखिमों को रेखांकित करते हैं। जहाँ उच्च राजस्व वृद्धि आकर्षक हो सकती है, वहीं इसके साथ होने वाला घाटा स्थायी लाभप्रदता (sustainable profitability) प्राप्त करने में कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है। Curefoods की IPO योजनाओं पर रोक सार्वजनिक बाजारों के प्रति एक सतर्क दृष्टिकोण का भी सुझाव देती है, जो संभवतः अधिक अनुकूल परिस्थितियों या मजबूत वित्तीय मैट्रिक्स की प्रतीक्षा कर रही है।

एक ही छत के नीचे कई फूड ब्रांडों के अधिग्रहण और समेकन की कंपनी की रणनीति का उद्देश्य 'इकोनॉमी ऑफ स्केल' और बाजार में प्रभुत्व हासिल करना है। हालाँकि, ब्रांडों के विविध पोर्टफोलियो को प्रबंधित करने में परिचालन संबंधी जटिलताएँ और महत्वपूर्ण ओवरहेड खर्च भी आते हैं, जो लाभप्रदता को प्रभावित कर सकते हैं।

जैसे-जैसे भारतीय फूड-टेक बाजार परिपक्व हो रहा है, Curefoods जैसी कंपनियों पर आगे निवेश आकर्षित करने और अंततः सार्वजनिक लिस्टिंग पर विचार करने के लिए लाभप्रदता का एक स्पष्ट रास्ता दिखाने का दबाव बढ़ेगा। आक्रामक विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना इस क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय या निवेश संबंधी सलाह शामिल नहीं है।

Frequently asked questions

What was Curefoods' operating revenue in FY26?

Curefoods' operating revenue in FY26 was ₹916 crore, a 23% increase from the previous year.

Did Curefoods make a profit or loss in FY26?

Curefoods reported a net loss of ₹192 crore in FY26, which is a 13% increase from its net loss in FY25.

Why did Curefoods pause its IPO plans?

The article states Curefoods recently paused its IPO plans, but does not provide the specific reasons for this decision.

Source: ET Fintech & Tech
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