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NSE IPO: ₹30,000 करोड़ के पब्लिक इश्यू में SBI और 4 अन्य PSU बेचेंगे 2.37 करोड़ शेयर

By Arth Vani Desk · 2026-06-18

भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज, NSE, अपने ₹30,000 करोड़ के विशाल सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक ऑफर) के साथ आगे बढ़ रहा है। SBI और IDBI बैंक सहित पांच सरकारी संस्थान इस बहुप्रतीक्षित मार्केट डेब्यू के हिस्से के रूप में 2.37 करोड़ शेयर बेचने के लिए तैयार हैं।

Key takeaways

भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज, NSE, अपने ₹30,000 करोड़ के विशाल सार्वजनिक निर्गम (पब्लिक ऑफर) के साथ आगे बढ़ रहा है। SBI और IDBI बैंक सहित पांच सरकारी संस्थान इस बहुप्रतीक्षित मार्केट डेब्यू के हिस्से के रूप में 2.37 करोड़ शेयर बेचने के लिए तैयार हैं।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की लंबे समय से प्रतीक्षित सार्वजनिक लिस्टिंग एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। बाजार नियामक SEBI के पास जमा किए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, पांच प्रमुख सरकारी संस्थान मिलकर 2.37 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहे हैं, जिसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) माना जा रहा है।

प्रमुख शेयरधारक कम कर रहे हैं अपनी हिस्सेदारी

बेचने वालों के समूह का नेतृत्व प्रमुख सरकारी बैंक कर रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और IDBI बैंक उन पांच सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) शेयरधारकों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी होल्डिंग का एक हिस्सा बेचने की प्रतिबद्धता जताई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब एक्सचेंज वर्षों की नियामक बाधाओं और आंतरिक देरी के बाद प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म, BSE पर अपने शेयरों को लिस्ट करने की कोशिश कर रहा है।

रिकॉर्ड-ब्रेकिंग वैल्यूएशन

प्रस्तावित IPO भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक ब्लॉकबस्टर इवेंट होने की उम्मीद है। शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि कुल इश्यू साइज लगभग ₹30,000 करोड़ हो सकता है। यदि ये आंकड़े सही रहते हैं, तो NSE की वैल्यूएशन ₹5 लाख करोड़ के चौंका देने वाले आंकड़े पर होगी, जिससे यह दुनिया की सबसे मूल्यवान वित्तीय बुनियादी ढांचा (financial infrastructure) कंपनियों में से एक बन जाएगी।

रिटेल निवेशकों के लिए यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पूरा इश्यू 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के रूप में तैयार किया गया है। इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई राशि सीधे बेचने वाले शेयरधारकों—बैंकों और संस्थानों—के पास जाएगी, न कि खुद NSE के पास उसके व्यावसायिक संचालन के लिए।

यह IPO क्यों महत्वपूर्ण है?

भारतीय इक्विटी और डेरिवेटिव बाजार में NSE का दबदबा है। इसकी लिस्टिंग कई कारणों से एक ऐतिहासिक घटना मानी जाती है:

हालांकि DRHP दाखिल करना एक बड़ा कदम है, लेकिन लिस्टिंग की अंतिम समयसीमा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की मंजूरी पर निर्भर करेगी। बाजार प्रतिभागी नियामक की प्रतिक्रिया पर कड़ी नजर रख रहे हैं, जिससे यह तय होगा कि शेयर बिक्री वास्तव में जनता के लिए कब खुलेगी।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस सहित सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें।

Frequently asked questions

NSE IPO के संदर्भ में 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) क्या है?

OFS का अर्थ है कि SBI और IDBI बैंक जैसे मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी जनता को बेच रहे हैं; जुटाई गई राशि इन विक्रेताओं के पास जाती है न कि कंपनी (NSE) के बैंक खाते में।

इस शेयर बिक्री में कौन से PSU बैंक भाग ले रहे हैं?

फाइलिंग में पांच PSU शेयरधारकों की पहचान की गई है, जिसमें विशेष रूप से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और IDBI बैंक को 2.37 करोड़ शेयरों के पूल में प्रमुख विक्रेताओं के रूप में उल्लेखित किया गया है।

NSE IPO को भारतीय बाजार के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

₹5 लाख करोड़ की वैल्यूएशन के साथ भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज के रूप में, इसकी लिस्टिंग रिटेल निवेशकों को देश के प्राथमिक ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के एक हिस्से का मालिक बनने का सीधा मौका देती है।

Source: Economictimes
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