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दलाल स्ट्रीट पर बुल्स की वापसी: Sensex और Nifty ने दो महीनों में दर्ज की सबसे बड़ी बढ़त

By Arth Vani Desk · 2026-06-13

भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार को जोरदार रिकवरी देखी गई क्योंकि प्रमुख सूचकांक 2% से अधिक उछल गए, जो आठ हफ्तों में उनका सबसे अच्छा एक दिवसीय प्रदर्शन है। वैश्विक तनाव में कमी और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी गिरावट ने इस तेजी को हवा दी।

Key takeaways

भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार को जोरदार रिकवरी देखी गई क्योंकि प्रमुख सूचकांक 2% से अधिक उछल गए, जो आठ हफ्तों में उनका सबसे अच्छा एक दिवसीय प्रदर्शन है। वैश्विक तनाव में कमी और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी गिरावट ने इस तेजी को हवा दी।

दलाल स्ट्रीट पर चारों ओर हरियाली

लगातार अस्थिरता के दौर के बाद, भारतीय इक्विटी बाजारों ने शुक्रवार को शानदार वापसी की। Sensex और Nifty दोनों सूचकांकों ने दो महीने से अधिक समय में अपनी सबसे तेज बढ़त दर्ज की, जिससे उन खुदरा निवेशकों को राहत मिली है जिन्होंने हाल ही में अपने पोर्टफोलियो की वैल्यू में उतार-चढ़ाव देखा था। इस व्यापक तेजी में प्रमुख सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक चढ़ गए, ऐसा प्रदर्शन पिछले आठ हफ्तों में दलाल स्ट्रीट पर नहीं देखा गया था।

वैश्विक संकेतों ने घरेलू सेंटिमेंट को दी मजबूती

इस अचानक उछाल का प्राथमिक कारण वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में बदलाव था। विदेशी संघर्षों के कारण निवेशकों की जो चिंता बढ़ी हुई थी, वह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की रिपोर्टों के बाद काफी कम हो गई। इस कूटनीतिक शुरुआत ने बाजार सहभागियों को यह विश्वास दिलाया है कि व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का जोखिम कम हो रहा है।

तेल की कीमतों ने भारत पर दबाव कम किया

भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऊर्जा की कीमतें बाजार को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक हैं। कूटनीतिक तनाव कम होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई। कच्चे तेल की गिरती कीमतों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि वे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और सरकार पर राजकोषीय बोझ को कम करने में मदद करती हैं। इस घटनाक्रम ने सभी क्षेत्रों में खरीदारी की रुचि जगाई, विशेष रूप से ऊर्जा-संवेदनशील उद्योगों में।

रिटेल पोर्टफोलियो पर प्रभाव

शुक्रवार की तेजी ने खुदरा निवेशकों और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को सीधा लाभ पहुंचाया है। शेयर की कीमतों में तेज उछाल से विभिन्न फंड श्रेणियों में नेट एसेट वैल्यू (NAV) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। विश्लेषकों का सुझाव है कि हालांकि लंबी अवधि का रुझान व्यापक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहता है, लेकिन वर्तमान रिकवरी यह दर्शाती है कि वैश्विक दबाव कम होने पर बाजार में लचीलापन बना रहता है।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.