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RBI की मिस-सेलिंग पर सख्ती: बैंक कर्मचारियों के लिए थर्ड-पार्टी इंसेंटिव पर नए नियमों ने लगाई रोक

By Arth Vani Desk · 2026-06-16

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक कर्मचारियों द्वारा बीमा और निवेश उत्पादों की आक्रामक 'मिस-सेलिंग' को रोकने के लिए सख्त नए दिशानिर्देश पेश किए हैं। जनवरी 2027 से, थर्ड-पार्टी कंपनियां अब बैंक कर्मचारियों को सीधे प्रोत्साहन (इंसेंटिव) नहीं दे सकेंगी, और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी कड़े नियमों का सामना करना होगा।

Key takeaways

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक कर्मचारियों द्वारा बीमा और निवेश उत्पादों की आक्रामक 'मिस-सेलिंग' को रोकने के लिए सख्त नए दिशानिर्देश पेश किए हैं। जनवरी 2027 से, थर्ड-पार्टी कंपनियां अब बैंक कर्मचारियों को सीधे प्रोत्साहन (इंसेंटिव) नहीं दे सकेंगी, और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी कड़े नियमों का सामना करना होगा।

भारतीय रिटेल उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए एक बड़े कदम के तहत, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक नए नियामक ढांचे की घोषणा की है जिसका उद्देश्य बैंक कर्मचारियों द्वारा बीमा पॉलिसियों और म्यूचुअल फंड जैसे थर्ड-पार्टी उत्पादों की आक्रामक बिक्री पर अंकुश लगाना है। यह कदम 'मिस-सेलिंग' के संबंध में व्यापक शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां ग्राहकों को अक्सर उन वित्तीय उत्पादों को खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं होती है।

बाहरी फर्मों से सीधे इंसेंटिव का अंत

नए मानदंडों के तहत, जो 1 जनवरी, 2027 से प्रभावी होने वाले हैं, RBI ने थर्ड-पार्टी कंपनियों (जैसे बीमा फर्मों या AMC प्रदाताओं) को बैंकों या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के कर्मचारियों को सीधे इंसेंटिव देने से सख्त रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। हालांकि बैंकों को अभी भी प्रदर्शन के लिए अपने कर्मचारियों को पुरस्कृत करने की अनुमति है, लेकिन बाहरी प्रभाव जो अक्सर उच्च-दबाव वाली बिक्री रणनीति की ओर ले जाता है, उसे समाप्त कर दिया जाएगा।

यह बदलाव यह सुनिश्चित करता है कि बैंक कर्मचारी की प्राथमिक निष्ठा ग्राहक और नियोक्ता के प्रति बनी रहे, न कि बाहरी उत्पाद निर्माताओं द्वारा दिए जाने वाले कमीशन के पीछे भागने में। RBI का मानना है कि इससे अधिक पारदर्शी माहौल बनेगा जहां उत्पाद योग्यता और ग्राहक की आवश्यकताओं के आधार पर बेचे जाएंगे।

जबरन बंडलिंग पर रोक

नियामक ने 'प्रोडक्ट बंडलिंग' के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर ऋण या अन्य सेवा की खरीद को ग्राहक द्वारा बीमा पॉलिसी या निवेश योजना खरीदने की शर्त से जोड़ दिया जाता है। नए नियम अनिवार्य करते हैं कि:

इन्फ्लुएंसर्स और डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स

समय की मांग को देखते हुए, RBI ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जो बैंकों या NBFCs के लिए वित्तीय उत्पादों का प्रचार करते हैं, उन्हें अब डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSAs) माना जाएगा। इसका मतलब है कि वे पारंपरिक एजेंटों के समान ही सख्त अनुपालन और पारदर्शिता मानकों के अधीन होंगे। यह कदम 'फिनफ्लुएंसर्स' (Finfluencers) को पक्षपाती या असत्यापित वित्तीय सलाह से अपने फॉलोअर्स को गुमराह करने से रोकने के लिए बनाया गया है।

डिजिटल प्रमोटरों को विनियमित एजेंटों के रूप में मानकर, RBI का लक्ष्य बैंकों को उनके द्वारा नियुक्त इन्फ्लुएंसर्स द्वारा साझा की गई जानकारी के लिए जवाबदेह ठहराना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वित्तीय उत्पादों का विपणन सच्चा और भारतीय कानून के अनुरूप बना रहे।

यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय या कानूनी सलाह शामिल नहीं है; पाठकों को आधिकारिक RBI सूचनाओं के माध्यम से नियामक अपडेट की पुष्टि करनी चाहिए।

Frequently asked questions

क्या मेरा बैंक अभी भी मुझे बीमा या म्यूचुअल फंड बेच पाएगा?

हाँ, बैंक अभी भी ये उत्पाद बेच सकते हैं, लेकिन वे अब आपको अन्य सेवाओं की शर्त के रूप में इन्हें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, और उनके कर्मचारियों को उत्पाद कंपनियों से सीधा रिवॉर्ड नहीं मिलेगा।

'प्रोडक्ट बंडलिंग' क्या है और यह मेरी मदद कैसे करता है?

बंडलिंग तब होती है जब कोई बैंक आपको लोन देने के लिए पॉलिसी खरीदने को मजबूर करता है; RBI का नया नियम इसे रोकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि आप केवल वही उत्पाद खरीदें जो आप वास्तव में चाहते हैं या जिनकी आपको आवश्यकता है।

ये नए RBI नियम मेरे बैंक पर कब से लागू होंगे?

नया ढांचा 1 जनवरी, 2027 से पूरी तरह से लागू और प्रभावी होने वाला है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.