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बैंकों ने अनिवासी भारतीयों (NRIs) को उच्च ब्याज वाली जमा राशि में स्विच करने में मदद करने के लिए RBI से अनुमति मांगी

By Arth Vani Desk · 2026-06-19

भारतीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अनुरोध कर रहे हैं कि अनिवासी भारतीयों (NRIs) को भारी जुर्माने के बिना मौजूदा विदेशी मुद्रा जमा को तोड़ने और उन्हें उच्च ब्याज दरों पर फिर से निवेश करने की अनुमति दी जाए। यह कदम डॉलर की आवक बढ़ाने के लिए मुद्रा हेजिंग (hedging) लागतों को वहन करने की RBI की एक अस्थायी योजना के बाद उठाया गया है।

Key takeaways

भारतीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अनुरोध कर रहे हैं कि अनिवासी भारतीयों (NRIs) को भारी जुर्माने के बिना मौजूदा विदेशी मुद्रा जमा को तोड़ने और उन्हें उच्च ब्याज दरों पर फिर से निवेश करने की अनुमति दी जाए। यह कदम डॉलर की आवक बढ़ाने के लिए मुद्रा हेजिंग (hedging) लागतों को वहन करने की RBI की एक अस्थायी योजना के बाद उठाया गया है।

भारतीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक विशेष ढील के लिए पैरवी कर रहे हैं जो अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इस प्रस्ताव में NRI ग्राहकों को समय से पहले निकासी से जुड़े सामान्य वित्तीय दंड का सामना किए बिना अपनी मौजूदा विदेशी मुद्रा जमा को "तोड़ने और फिर से बुक करने" (break and rebook) और उन्हें नई, उच्च-रिटर्न वाली योजनाओं में निवेश करने की अनुमति मांगी गई है।

उच्च दरों के पीछे की रणनीति

देश में अधिक विदेशी मुद्रा आकर्षित करने और भारतीय रुपये को स्थिर करने के लिए, RBI ने हाल ही में नई डॉलर-सावधि जमा (dollar-term deposits) के लिए एक स्वैप सुविधा शुरू की है। इस व्यवस्था के तहत, जो सितंबर के अंत तक जुटाई गई जमा राशि के लिए मान्य है, केंद्रीय बैंक हेजिंग की पूरी लागत वहन करेगा। हेजिंग अनिवार्य रूप से विनिमय दर (exchange rate) में उतार-चढ़ाव के खिलाफ बीमा का एक रूप है, जो आमतौर पर बैंकों के लिए एक बड़ा खर्च होता है।

इस लागत को हटाकर, RBI ने बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) योजना के तहत विदेशी मुद्रा स्वीकार करना बहुत सस्ता बना दिया है। केंद्रीय बैंक के लक्ष्यों के अनुरूप, वाणिज्यिक बैंक अब इन बचतों का लगभग पूरा लाभ सीधे जमाकर्ताओं को दे रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुछ महीने पहले उपलब्ध दरों की तुलना में बहुत अधिक आकर्षक ब्याज दरें मिल रही हैं।

मौजूदा जमाकर्ताओं के लिए चुनौती

जबकि नए जमाकर्ता पहले से ही इन बढ़ी हुई दरों का लाभ उठा रहे हैं, कई NRIs का पैसा पुराने FCNR(B) खातों में बंद है जो कम रिटर्न देते हैं। वर्तमान बैंकिंग नियम आमतौर पर जुर्माना लगाते हैं या कम ब्याज दर देते हैं यदि कोई जमाकर्ता परिपक्वता तिथि (maturity date) से पहले खाता बंद कर देता है। कई लोगों के लिए, ये जुर्माने वर्तमान में नई, उच्च-दर वाली योजनाओं में स्विच करने से होने वाले किसी भी लाभ को खत्म कर देंगे।

बैंक बदलाव के लिए दबाव क्यों डाल रहे हैं?

बैंक सितंबर के अंत में RBI की विंडो बंद होने से पहले अधिक से अधिक विदेशी मुद्रा जुटाने के इच्छुक हैं। "ब्रेक एंड रीबुक" विकल्प की अनुमति देकर, वे मौजूदा ग्राहकों को उच्च दरों पर ही सही, भारतीय बैंकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने के लिए प्रोत्साहित करने की उम्मीद करते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, यह विदेशी मुद्रा का निरंतर और बढ़ा हुआ प्रवाह सुनिश्चित करता है, जो वैश्विक बाजार की अस्थिरता के दौरान महत्वपूर्ण है।

यदि RBI इस अनुरोध को स्वीकार कर लेता है, तो यह संभवतः NRIs के लिए अपने पोर्टफोलियो को अनुकूलित करने के लिए एक अल्पकालिक अवसर होगा। फिलहाल, बैंकिंग उद्योग इन जुर्माना-मुक्त बदलावों को आगे बढ़ाने के लिए नियामक (regulator) से अंतिम संकेत का इंतजार कर रहा है।

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें कोई वित्तीय सलाह नहीं दी गई है। पाठकों को FCNR(B) जमा शर्तों और प्रचलित RBI नियमों के संबंध में एक योग्य सलाहकार या अपने संबंधित बैंकों से परामर्श करना चाहिए।

Frequently asked questions

FCNR(B) जमा क्या है?

यह NRIs के लिए एक सावधि जमा (fixed deposit) खाता है जो उन्हें अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में पैसा बचाने की अनुमति देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वे भारतीय रुपये के मूल्य में उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हों।

बैंक अभी इन जमाओं पर उच्च ब्याज दरों की पेशकश क्यों कर रहे हैं?

RBI अस्थायी रूप से 'हेजिंग लागत'—मुद्रा परिवर्तनों से सुरक्षा की लागत—को कवर कर रहा है, जिससे बैंक उन बचतों को उच्च ब्याज के रूप में ग्राहकों तक पहुँचा पा रहे हैं।

क्या मैं अपनी वर्तमान जमा राशि को तुरंत उच्च दर पर स्विच कर सकता हूँ?

वर्तमान में, आपको अपनी जमा राशि को समय से पहले तोड़ने के लिए जुर्माना भरना पड़ सकता है; हालाँकि, बैंक इन जुर्मानों को माफ करने के लिए RBI की मंजूरी का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि आप स्विच कर सकें और अधिक कमा सकें।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.