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भारत के प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में घरेलू पूंजी की हिस्सेदारी बढ़ी: EY रिपोर्ट

By Arth Vani Desk · 2026-08-21

EY की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है, जिसमें घरेलू फंड तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कुल निवेश 2025 की दूसरी छमाही में दर्ज किए गए $3.4 बिलियन (लगभग ₹28,220 करोड़) के समान रहा, जो मुख्य रूप से कॉर्पोरेट पुनर्वित्त (refinancing) और अधिग्रहण वित्तपोषण (acquisition financing) द्वारा संचालित था।

Key takeaways

EY इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जिसमें घरेलू पूंजी की बढ़ती हिस्सेदारी देखी जा रही है। देश में कुल प्राइवेट क्रेडिट निवेश 2025 की दूसरी छमाही में देखे गए स्तरों के बराबर था, जो लगभग $3.4 बिलियन तक पहुंच गया, जिसका अर्थ ₹83 प्रति अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर पर लगभग ₹28,220 करोड़ है।

EY इंडिया में डेट और स्पेशल सिचुएशंस के पार्टनर, विशाल बंसल ने इस बदलाव पर प्रकाश डालते हुए कहा, "घरेलू पूंजी की बढ़ती हिस्सेदारी भारत के प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में सबसे महत्वपूर्ण विकासों में से एक है।" यह एक परिपक्व होते वित्तीय इकोसिस्टम को दर्शाता है जहां भारतीय निवेशक और संस्थान देश के क्रेडिट परिदृश्य में तेजी से योगदान दे रहे हैं।

प्राइवेट क्रेडिट क्या है?

प्राइवेट क्रेडिट का तात्पर्य गैर-बैंक ऋणदाताओं द्वारा सीधे कंपनियों को दिए जाने वाले ऋण से है, जो अक्सर पारंपरिक बैंकिंग चैनलों को दरकिनार कर देते हैं। ये ऋण व्यवसायों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए जा सकते हैं और इसमें आमतौर पर संस्थागत निवेशक या विशेष फंड शामिल होते हैं। यह वित्तपोषण के एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में कार्य करता है, विशेष रूप से मध्यम आकार के व्यवसायों या उन कंपनियों के लिए जिनकी विशिष्ट फंडिंग आवश्यकताएं पारंपरिक बैंक पूरी नहीं कर पाते हैं।

बाजार गतिविधि के प्रमुख चालक

रिपोर्ट ने प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में मजबूत गतिविधि के पीछे कई प्रमुख चालकों की पहचान की है। इनमें शामिल हैं:

ये कारक बताते हैं कि भारतीय व्यवसाय सक्रिय रूप से लचीले और समय पर फंडिंग समाधान तलाश रहे हैं, और प्राइवेट क्रेडिट मार्केट इस मांग को प्रभावी ढंग से पूरा कर रहा है।

घरेलू पूंजी का महत्व

प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में घरेलू भारतीय पूंजी की बढ़ती भागीदारी एक महत्वपूर्ण विकास है। ऐतिहासिक रूप से, भारत जैसे उभरते बाजारों में अधिकांश प्राइवेट क्रेडिट अंतरराष्ट्रीय फंडों से आता रहा है। स्थानीय फंडों की बड़ी हिस्सेदारी कई सकारात्मक संकेत देती है:

भारतीय व्यवसायों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

भारतीय व्यवसायों के लिए, विशेष रूप से वे जो पारंपरिक बैंक ऋण मानदंडों में फिट नहीं बैठते हैं, घरेलू प्राइवेट क्रेडिट का उदय पूंजी तक व्यापक पहुंच प्रदान करता है। यह विकास, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे सकता है। व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए, स्थानीय पूंजी द्वारा समर्थित एक विविध और मजबूत क्रेडिट बाजार वित्तीय स्थिरता और लचीलेपन को बढ़ाता है। यह सुनिश्चित करता है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भी आर्थिक गतिविधि और विकास को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण फंडिंग उपलब्ध रहे।

EY की रिपोर्ट द्वारा रेखांकित यह रुझान भारत के विकसित होते वित्तीय परिदृश्य पर जोर देता है, जहां स्थानीय निवेशकों के बढ़ते समूह के समर्थन से वैकल्पिक वित्तपोषण चैनल प्रमुखता प्राप्त कर रहे हैं।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently asked questions

What exactly is 'private credit'?

Private credit involves direct loans made by non-bank lenders, such as specialized funds or institutional investors, to businesses. Unlike traditional bank loans or publicly traded bonds, these are private arrangements, often tailored to a company's unique funding needs.

Why is the rise of domestic capital in this market important for India?

A growing share of domestic capital in private credit reduces India's reliance on foreign funds, making the market more stable and less vulnerable to global economic shifts. It also signifies the increasing strength and sophistication of India's own financial institutions and investors in supporting local businesses.

How does this trend benefit Indian businesses?

For Indian businesses, especially those that might not meet traditional bank lending criteria, the growth of private credit with domestic backing offers an expanded and more flexible source of funding. This can help them finance growth, acquisitions, or refinance existing debt, contributing to overall economic development.

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.