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मात्रा से बेहतर गुणवत्ता: FY26 में NSE का लिस्टिंग रेवेन्यू बढ़कर ₹352 करोड़ हुआ

By Arth Vani Desk · 2026-07-22

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के लिस्टिंग रेवेन्यू में FY26 में 12% की वृद्धि देखी गई, जो IPO की कुल संख्या में कमी के बावजूद ₹352 करोड़ तक पहुंच गया। यह वृद्धि सार्वजनिक बाजार में प्रवेश करने वाली बड़ी और उच्च-मूल्य वाली कंपनियों की ओर बदलाव के कारण हुई है।

Key takeaways

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के लिस्टिंग रेवेन्यू में FY26 में 12% की वृद्धि देखी गई, जो IPO की कुल संख्या में कमी के बावजूद ₹352 करोड़ तक पहुंच गया। यह वृद्धि सार्वजनिक बाजार में प्रवेश करने वाली बड़ी और उच्च-मूल्य वाली कंपनियों की ओर बदलाव के कारण हुई है।

भारतीय पूंजी बाजारों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने लिस्टिंग व्यवसाय में 12% की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने वाली कंपनियों की कुल संख्या में गिरावट के बावजूद, एक्सचेंज की लिस्टिंग सेवाओं से आय बढ़कर ₹352 करोड़ हो गई है।

मेगा-लिस्टिंग का उदय

IPO वॉल्यूम में गिरावट के साथ-साथ हुई यह रेवेन्यू वृद्धि भारतीय बाजार में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन को रेखांकित करती है। पिछले वर्षों की तुलना में भले ही कम कंपनियों ने सार्वजनिक होने का विकल्प चुना, लेकिन बाजार में प्रवेश करने वाली कंपनियां पैमाने और मूल्यांकन (valuation) के मामले में काफी बड़ी थीं। एक्सचेंज व्यवसाय में, लिस्टिंग शुल्क अक्सर कंपनी के आकार और जुटाई जाने वाली पूंजी के आधार पर निर्धारित किया जाता है। फलस्वरूप, कुछ उच्च-मूल्य वाले 'मेगा IPO' दर्जनों छोटी लिस्टिंग की तुलना में एक्सचेंज के लिए अधिक आय उत्पन्न कर सकते हैं।

यह रुझान बताता है कि भारत का प्राथमिक बाजार (primary market) परिपक्वता के चरण में प्रवेश कर रहा है। छोटी फर्मों की उच्च-आवृत्ति वाली भीड़ के बजाय, बाजार अब स्थापित दिग्गजों को आकर्षित कर रहा है। NSE के लिए, इसका मतलब अधिक स्थिर और उच्च-मूल्य वाला आय प्रवाह है, जो यह साबित करता है कि लिस्टिंग व्यवसाय का स्वास्थ्य अब केवल नई कंपनियों की संख्या पर निर्भर नहीं है।

रिटेल निवेशकों के लिए उच्च दांव

औसत रिटेल निवेशक के लिए, बड़ी लिस्टिंग की ओर यह बदलाव निवेश परिदृश्य में बदलाव का संकेत देता है। बड़ी कंपनियां आम तौर पर अधिक पारदर्शिता, ऐतिहासिक डेटा और वैश्विक संस्थागत निवेशकों की महत्वपूर्ण रुचि लाती हैं। हालांकि इससे लिस्टिंग के बाद का माहौल अधिक स्थिर हो सकता है, लेकिन यह एक ऐसा क्षेत्र भी बनाता है जहां व्यवसाय की गुणवत्ता IPO सीजन के प्रचार (hype) से अधिक मायने रखती है।

चूंकि एक्सचेंज इन उच्च-मूल्य वाली प्रविष्टियों से लाभ कमाना जारी रखे हुए है, इसलिए निवेशकों का ध्यान दीर्घकालिक प्रदर्शन पर बना हुआ है। 'बिग-टिकट' बाजार की ओर यह बदलाव स्मॉल-कैप तेजी की तुलना में सट्टेबाजी के कम अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन यह रिटेल वेल्थ क्रिएशन (संपत्ति निर्माण) के लिए अधिक पेशेवर और मजबूत वातावरण प्रदान करता है।

अस्वीकरण: यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं है; सभी निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं।

Frequently asked questions

अगर IPO कम थे तो NSE का रेवेन्यू कैसे बढ़ा?

लिस्टिंग शुल्क अक्सर कंपनी के आकार और मूल्यांकन पर आधारित होता है; कुछ बहुत बड़ी कंपनियां कई छोटी कंपनियों की तुलना में अधिक रेवेन्यू उत्पन्न कर सकती हैं।

बड़े IPO की ओर यह बदलाव एक रिटेल निवेशक के रूप में मेरे लिए क्या मायने रखता है?

इसका सामान्य अर्थ उच्च पारदर्शिता के साथ अधिक स्थिर निवेश विकल्प है, क्योंकि बड़ी कंपनियां सख्त संस्थागत जांच के दायरे में होती हैं।

यदि लिस्टिंग की संख्या कम हो रही है, तो क्या IPO बूम खत्म हो गया है?

नहीं, बाजार केवल विकसित हो रहा है; हालांकि लिस्टिंग की संख्या कम है, लेकिन जुटाई जा रही कुल राशि अधिक बनी हुई है, जो एक स्वस्थ लेकिन अधिक चयनात्मक बाजार का संकेत देती है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.