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₹26 लाख करोड़ वाले ग्लोबल फंड्स अभी भी भारत पर बड़ा दांव लगाने से क्यों कतरा रहे हैं?

By Arth Vani Desk · 2026-06-19

भारत की आर्थिक वृद्धि के बावजूद, 100 प्रमुख उभरते बाजार (EM) फंडों में से 70 अभी भी भारतीय शेयरों पर 'अंडरवेट' (underweight) बने हुए हैं। ये वैश्विक निवेशक अन्य देशों की तुलना में ऊंचे स्टॉक वैल्यूएशन के कारण सतर्क हैं, जो स्थानीय पोर्टफोलियो की गति को प्रभावित कर सकता है।

Key takeaways

भारत की आर्थिक वृद्धि के बावजूद, 100 प्रमुख उभरते बाजार (EM) फंडों में से 70 अभी भी भारतीय शेयरों पर 'अंडरवेट' (underweight) बने हुए हैं। ये वैश्विक निवेशक अन्य देशों की तुलना में ऊंचे स्टॉक वैल्यूएशन के कारण सतर्क हैं, जो स्थानीय पोर्टफोलियो की गति को प्रभावित कर सकता है।

विकास बनाम निवेश का विरोधाभास

भारत को वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में सराहा जा रहा है। हालांकि, वैश्विक निवेश पैटर्न का गहरा विश्लेषण एक चौंकाने वाला रुझान दिखाता है: दुनिया के सबसे बड़े मनी मैनेजर्स उतने उत्साहित नहीं हैं जितना कोई सोच सकता है। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि शीर्ष 100 इमर्जिंग मार्केट (EM) फंडों में से लगभग 70 वर्तमान में भारत पर 'अंडरवेट' हैं। इसका मतलब है कि ये फंड MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स जैसे वैश्विक बेंचमार्क द्वारा अनुशंसित हिस्सेदारी के मुकाबले भारतीय शेयरों में कम निवेश रखते हैं।

'बड़ा पैसा' सतर्क क्यों है

इस झिझक का मुख्य कारण भारत के भविष्य में विश्वास की कमी नहीं है, बल्कि निवेश की वर्तमान कीमत है। चीन, ब्राजील या दक्षिण कोरिया जैसे अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर काफी ऊंचे प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। एक वैश्विक फंड मैनेजर के लिए, रिकॉर्ड ऊंचाई पर भारतीय शेयर खरीदना जोखिम भरा लगता है, खासकर जब अन्य बाजार बहुत सस्ते प्रवेश बिंदु (entry points) प्रदान करते हैं। सतर्क फंडों का यह समूह पूंजी के एक विशाल पूल का प्रतिनिधित्व करता है—लगभग $320 बिलियन (करीब ₹26.5 लाख करोड़)—जो वर्तमान में बाहर बैठा है या कहीं और निवेश किया गया है।

भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है

औसत भारतीय रिटेल निवेशक के लिए, इन वैश्विक दिग्गजों की अनुपस्थिति एक दोधारी तलवार है। एक तरफ, यह दर्शाता है कि शेयर बाजार में हालिया तेजी काफी हद तक स्थानीय निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फंडों द्वारा संचालित है। दूसरी ओर, यह बताता है कि बाजार में उस 'भारी समर्थन' की कमी है जो विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) प्रदान करते हैं। यदि ये 70 फंड अपना रुख बदलने और वैश्विक सूचकांकों में भारत के वास्तविक वेटेज के साथ तालमेल बिठाने का फैसला करते हैं, तो इससे नकदी का भारी प्रवाह हो सकता है, जो निफ्टी और सेंसेक्स को और भी ऊंचे स्तर पर ले जा सकता है। तब तक, बाजार वैश्विक समाचारों और घरेलू लिक्विडिटी के प्रति संवेदनशील बना रह सकता है।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय सलाह शामिल नहीं है।

Frequently asked questions

भारत पर फंड का 'अंडरवेट' (underweight) होने का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि फंड ने भारत में अपने पैसे का उतना हिस्सा निवेश नहीं किया है जितना कि वैश्विक शेयर बाजार सूचकांक (indices) सुझाते हैं। आमतौर पर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि फंड मैनेजर को लगता है कि बाजार बहुत महंगा या जोखिम भरा है।

$320 बिलियन का आंकड़ा महत्वपूर्ण क्यों है?

यह इन सतर्क फंडों द्वारा प्रबंधित कुल संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है; यदि वे वैश्विक बेंचमार्क के अनुरूप भारत में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लेते हैं, तो इससे देश में विदेशी निवेश की भारी बाढ़ आ सकती है।

क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय शेयर बाजार गिर जाएगा?

जरूरी नहीं; हालांकि इसका मतलब विदेशी समर्थन कम होना है, लेकिन भारतीय बाजार ने हाल ही में घरेलू रिटेल और संस्थागत खरीदारी के माध्यम से मजबूती दिखाई है। हालांकि, विदेशी पूंजी के बिना विकास की गति धीमी हो सकती है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.