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केवल भारतीय बाजारों पर निर्भर न रहें: आपके पोर्टफोलियो में ग्लोबल स्टॉक्स की आवश्यकता क्यों है

By Arth Vani Desk · 2026-06-17

वित्तीय विशेषज्ञ भारतीय निवेशकों से अपने 'होम-कंट्री बायस' (स्वदेश के प्रति झुकाव) को छोड़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विविधता लाने का आग्रह कर रहे हैं। वैश्विक इक्विटी में निवेश करके, रिटेल निवेशक घरेलू अस्थिरता, मुद्रास्फीति और मुद्रा के उतार-चढ़ाव के खिलाफ अपनी संपत्ति की रक्षा कर सकते हैं।

Key takeaways

वित्तीय विशेषज्ञ भारतीय निवेशकों से अपने 'होम-कंट्री बायस' (स्वदेश के प्रति झुकाव) को छोड़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विविधता लाने का आग्रह कर रहे हैं। वैश्विक इक्विटी में निवेश करके, रिटेल निवेशक घरेलू अस्थिरता, मुद्रास्फीति और मुद्रा के उतार-चढ़ाव के खिलाफ अपनी संपत्ति की रक्षा कर सकते हैं।

भारतीय निवेशक पारंपरिक रूप से अपनी पूंजी को घरेलू विकास की कहानी पर भरोसा करते हुए देश के भीतर ही निवेश करते आए हैं। हालांकि, हाल ही में आयोजित ET Alpha Wealth Summit में, PPFAS Mutual Fund के राजीव ठक्कर सहित उद्योग जगत के दिग्गजों ने एक महत्वपूर्ण कमी को रेखांकित किया: धनी भारतीयों का ग्लोबल स्टॉक्स में निवेश अब भी बहुत कम है। ऐसी संपत्ति बनाने के लिए जो पीढ़ियों तक चले, विशेषज्ञों का तर्क है कि एक पोर्टफोलियो को एक ही देश की सीमाओं से परे देखना चाहिए।

एक ही टोकरी में सभी अंडे रखने का जोखिम

हालांकि भारतीय बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन पूरी तरह से घरेलू इक्विटी पर निर्भर रहना निवेशकों को 'होम-कंट्री बायस' के जोखिम में डालता है। इसका मतलब है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी का सामना करती है, तो निवेशक का पूरा पोर्टफोलियो प्रभावित होता है। वैश्विक विविधीकरण (Global diversification) एक 'हेज' के रूप में कार्य करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि यदि एक अर्थव्यवस्था धीमी हो जाती है, तो अन्य क्षेत्रों की संपत्ति स्थिरता प्रदान कर सके।

अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर पर विचार करने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

दिखावे के बजाय फंडामेंटल्स पर ध्यान दें

शिखर सम्मेलन में एक बार-बार दोहराया जाने वाला विषय यह था कि लोकप्रिय निवेश 'थीम्स' या अल्पकालिक बाजार रुझानों के पीछे भागने के बजाय बिजनेस फंडामेंटल्स पर टिके रहना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों की सलाह है कि दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण के लिए बाजार के वार्षिक उतार-चढ़ाव से परे देखने और मजबूत बैलेंस शीट तथा टिकाऊ बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

टैक्स और रणनीति

स्थायी संपत्ति बनाना केवल उच्च रिटर्न के बारे में नहीं है; यह इस बारे में है कि टैक्स और मुद्रास्फीति के बाद आपके पास क्या बचता है। निवेशकों को अपनी अंतरराष्ट्रीय होल्डिंग्स को कुशलतापूर्वक संरचित करने के लिए सलाहकारों से परामर्श करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। भारत में विदेशी निवेश के लिए बदलते टैक्स परिदृश्य के बावजूद, भौगोलिक विविधीकरण के माध्यम से जोखिम कम करने का मुख्य लाभ किसी भी गंभीर रिटेल निवेशक के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति बनी हुई है।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं है।

Frequently asked questions

यदि भारतीय बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो मुझे अमेरिकी या वैश्विक शेयरों में निवेश क्यों करना चाहिए?

भले ही भारत अच्छा प्रदर्शन करे, वैश्विक स्टॉक एक सुरक्षा कवच (safety net) प्रदान करते हैं यदि भारतीय बाजार गिरता है, साथ ही ये आपको उन वैश्विक टेक दिग्गजों तक पहुंच प्रदान करते हैं जो NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं हैं।

क्या वैश्विक निवेश मुझे रुपये के गिरते मूल्य से बचाता है?

हाँ, क्योंकि आपके अंतरराष्ट्रीय निवेश अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में मूल्यांकित होते हैं, इसलिए यदि रुपया कमजोर होता है तो उनका मूल्य रुपये में बढ़ जाता है।

क्या मुझे AI या इलेक्ट्रिक वाहन जैसी विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय थीम्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए?

विशेषज्ञ अस्थायी निवेश रुझानों या थीम्स के पीछे भागने के बजाय मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स और दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.