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सोना ₹1.5 लाख से नीचे फिसला, दो दिनों की बिकवाली में चांदी ₹20,000 लुढ़की

By Arth Vani Desk · 2026-07-13

MCX पर बहुमूल्य धातुओं में भारी गिरावट देखी गई, जहां केवल दो दिनों में सोने की कीमतों में ₹7,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी में ₹20,000 प्रति किलोग्राम की कमी आई। यह बिकवाली मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और मुद्रास्फीति पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर चिंताओं के कारण हुई है।

Key takeaways

MCX पर बहुमूल्य धातुओं में भारी गिरावट देखी गई, जहां केवल दो दिनों में सोने की कीमतों में ₹7,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी में ₹20,000 प्रति किलोग्राम की कमी आई। यह बिकवाली मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और मुद्रास्फीति पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर चिंताओं के कारण हुई है।

बहुमूल्य धातुओं में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को पिछले 48 घंटों में भारी उथल-पुथल का सामना करना पड़ा, क्योंकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट आई। शुक्रवार को गिरावट का यह सिलसिला और तेज हो गया, जिससे सोने की कीमतें ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गईं, जो पहले बाजार के लिए एक मनोवैज्ञानिक समर्थन (psychological support) के रूप में कार्य कर रहा था।

गिरावट का पैमाना

सिर्फ शुक्रवार को ही, सोने का वायदा भाव ₹2,269 गिरकर लगभग ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इस एक दिन की गिरावट ने दो दिनों की कुल ₹7,000 की भारी गिरावट में योगदान दिया। चांदी ने भी इसी तरह का, हालांकि अधिक आक्रामक रुख अपनाया। शुक्रवार को चांदी वायदा 2.3% गिरकर ₹2.32 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। यदि पिछले दिन के नुकसान के साथ जोड़ दिया जाए, तो केवल दो कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमत में ₹20,000 प्रति किलोग्राम की भारी कमी आई है।

कीमतों में गिरावट के वैश्विक कारण

इस सुधार (correction) के प्राथमिक कारण अंतरराष्ट्रीय हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर ने अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोने जैसी डॉलर-मूल्य वाली संपत्तियों को अधिक महंगा बना दिया है, जिससे स्वाभाविक रूप से मांग में कमी आई है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 'कड़े रुख' (hawkish stance)—जिसमें संकेत दिया गया है कि मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं—ने सोने के आकर्षण को कम कर दिया है। चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता है, इसलिए ब्याज दरें अधिक होने या बढ़ने पर निवेशक अक्सर इससे दूर रहने लगते हैं।

भारतीय खुदरा निवेशकों पर प्रभाव

भारतीय परिवारों के लिए, जहां सोने को अक्सर धन संचय के प्राथमिक माध्यम के रूप में देखा जाता है, यह अचानक आई अस्थिरता काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि कीमतों में गिरावट मौजूदा निवेशकों के लिए अस्थायी चिंता का कारण बन सकती है, लेकिन यह उन लोगों के लिए एक संभावित प्रवेश बिंदु (entry point) भी प्रदान करती है जो नई खरीदारी करने से पहले कीमतों में नरमी का इंतजार कर रहे थे। बाजार अभी भी वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, और निवेशकों द्वारा आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों का विश्लेषण करने के साथ आगे भी अस्थिरता की उम्मीद है।

बहुमूल्य धातुओं में निवेश में बाजार जोखिम शामिल है; यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently asked questions

सोने और चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट क्यों आई?

यह गिरावट मुख्य रूप से मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इस संकेत के कारण हुई कि मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं, जिससे सोने जैसी ब्याज न देने वाली संपत्तियां कम आकर्षक हो जाती हैं।

पिछले दो दिनों में सोने और चांदी में कितनी गिरावट आई?

दो दिनों की अवधि में सोने में ₹7,000 प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई, जबकि चांदी में ₹20,000 प्रति किलोग्राम की बहुत बड़ी गिरावट देखी गई।

क्या यह सोना या चांदी खरीदने का सही समय है?

हालांकि इस गिरावट के कारण कीमतें पहले की तुलना में कम हो गई हैं, लेकिन बाजार फिलहाल अस्थिर है; निवेशकों को अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों का आकलन करना चाहिए और संभवतः छोटे-छोटे हिस्सों (tranches) में खरीदारी करनी चाहिए।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.