वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्टील निर्माताओं से कार्बन कम करने और विशेष इस्पात उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय इस्पात उद्योग से डीकार्बोनाइजेशन को प्राथमिकता देने और विशेष इस्पात के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने का आह्वान किया है। इस कदम का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और क्षेत्र को वैश्विक हरित ऊर्जा मानकों के अनुरूप लाना है।
Key takeaways
- वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारतीय स्टील निर्माताओं को 'ग्रीन स्टील' तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- सरकार आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू विशेष इस्पात में तेज वृद्धि चाहती है।
- निर्यात पर संभावित अंतरराष्ट्रीय कार्बन करों से बचने के लिए डीकार्बोनाइजेशन अब एक प्राथमिकता है।
- उद्योग के खिलाड़ियों को उच्च-स्तरीय इस्पात निर्माण के लिए पीएलआई (PLI) योजना का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय इस्पात उद्योग से डीकार्बोनाइजेशन को प्राथमिकता देने और विशेष इस्पात के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने का आह्वान किया है। इस कदम का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और क्षेत्र को वैश्विक हरित ऊर्जा मानकों के अनुरूप लाना है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय इस्पात उत्पादकों से डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) और उच्च-स्तरीय विशेष इस्पात (specialty steel) के निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है। एक उद्योग कार्यक्रम में बोलते हुए, मंत्री ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने और महत्वपूर्ण औद्योगिक सामग्रियों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए क्षेत्र को विकसित होना चाहिए।
डीकार्बोनाइजेशन पर ध्यान दें
वित्त मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 'ग्रीन स्टील' की ओर वैश्विक बदलाव अब वैकल्पिक नहीं है। जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार, विशेष रूप से यूरोपीय संघ, कार्बन सीमा कर (carbon border taxes) लागू करने की ओर बढ़ रहे हैं, भारतीय निर्यातकों को स्वच्छ उत्पादन प्रौद्योगिकियों को अपनाना होगा। सीतारमण ने कहा कि इस्पात उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना वैश्विक बाजार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
विशेष इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देना
भारत की उच्च-श्रेणी की इस्पात आवश्यकताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वर्तमान में आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है। मंत्री ने घरेलू खिलाड़ियों से विशेष इस्पात के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना जैसी सरकारी पहलों का लाभ उठाने का आग्रह किया। इस्पात की यह श्रेणी रक्षा, अंतरिक्ष और उच्च-स्तरीय इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां सटीकता और स्थायित्व सर्वोपरि है।
अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक महत्व
घरेलू विशेष इस्पात के लिए यह जोर व्यापक 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का हिस्सा है। इन उच्च-मूल्य वाले उत्पादों को स्थानीय रूप से उत्पादित करके, भारत विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को कम कर सकता है और वैश्विक व्यवधानों से अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को बचा सकता है। मंत्री का आह्वान उद्योग के लिए थोक वस्तु उत्पादक से उच्च-मूल्य विनिर्माण केंद्र में संक्रमण के लिए एक रोडमैप के रूप में कार्य करता है।
- पर्यावरणीय अनुपालन: भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कार्बन दंड से बचने के लिए हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
- आयात प्रतिस्थापन: महंगे आयातित विशेष मिश्र धातुओं पर निर्भरता कम करना।
- तकनीकी उन्नयन: पुरानी संयंत्र अवसंरचना को आधुनिक बनाने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश करना।
यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
Frequently asked questions
विशेष इस्पात क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेष इस्पात रक्षा और एयरोस्पेस जैसे विशेष क्षेत्रों में उपयोग किया जाने वाला उच्च-मूल्य वाला इस्पात है; इसे स्थानीय रूप से उत्पादित करने से भारत का आयात बिल कम हो जाता है।
वित्त मंत्री इस्पात में डीकार्बोनाइजेशन पर ध्यान क्यों केंद्रित कर रही हैं?
यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारतीय इस्पात वैश्विक पर्यावरणीय मानकों को पूरा करता है और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों द्वारा लगाए गए भारी कार्बन करों से बचता है।
इस्पात कंपनियां इस बदलाव से कैसे लाभ उठा सकती हैं?
कंपनियां पीएलआई (PLI) योजना जैसी सरकारी प्रोत्साहनों का लाभ उठा सकती हैं और 'ग्रीन स्टील' का उत्पादन करके दीर्घकालिक निर्यात व्यवहार्यता सुरक्षित कर सकती हैं।