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ITAT के फैसले: अनरिपोर्टेड विदेशी खाते 'ब्लैक मनी एक्ट' कार्रवाई का कारण बन सकते हैं

By Arth Vani Desk · 2026-09-30

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के हालिया फैसलों से पता चलता है कि आयकर रिटर्न (ITRs) में विदेशी बैंक खातों का खुलासा न करने पर 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015' के तहत कार्रवाई शुरू हो सकती है। यह सभी विदेशी वित्तीय हितों के सटीक और पूर्ण खुलासे के महत्व को रेखांकित करता है।

Key takeaways

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के हालिया फैसलों से पता चलता है कि आयकर रिटर्न (ITRs) में विदेशी बैंक खातों का खुलासा न करने पर 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015' के तहत कार्रवाई शुरू हो सकती है। यह सभी विदेशी वित्तीय हितों के सटीक और पूर्ण खुलासे के महत्व को रेखांकित करता है।

भारतीय करदाताओं को अपने आयकर रिटर्न (ITRs) में अपने सभी विदेशी बैंक खातों का खुलासा करने के बारे में सतर्क रहना चाहिए। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के हालिया फैसलों ने गैर-खुलासे के गंभीर परिणामों को पुष्ट किया है, जिससे 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015' के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

ये फैसले एक स्पष्ट अनुस्मारक के रूप में काम करते हैं कि भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा रखा गया कोई भी विदेशी बैंक खाता, भले ही वह निष्क्रिय हो या उसमें न्यूनतम धनराशि हो, ITR में घोषित किया जाना चाहिए। ब्लैक मनी एक्ट अधिकारियों को अघोषित विदेशी आय और संपत्ति पर भारी कर और जुर्माना लगाने का अधिकार देता है। ITAT का रुख खुलासे के मानदंडों की सख्त व्याख्या का संकेत देता है, इस बात पर जोर देता है कि अज्ञानता या चूक बचाव का मान्य आधार नहीं है।

करदाताओं को अपनी वित्तीय होल्डिंग्स की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने की सलाह दी जाती है। इसमें भारत के बाहर स्थित बैंकों, वित्तीय संस्थानों और किसी अन्य इकाई में खाते शामिल हैं। इन खातों की रिपोर्ट करने में विफलता के परिणामस्वरूप उनसे उत्पन्न आय, या स्वयं संपत्ति के मूल्य को अघोषित माना जा सकता है और महत्वपूर्ण कर देनदारियों के अधीन किया जा सकता है, जो संभावित रूप से 30% कर और दंड तक हो सकता है।

ITAT के फैसले कर चोरी से निपटने और अघोषित विदेशी संपत्तियों को कर के दायरे में लाने की सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हैं। ब्लैक मनी एक्ट को विशेष रूप से ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए अधिनियमित किया गया था, जो ऐसी संपत्तियों और आय पर कर लगाने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। न्यायाधिकरण के फैसले बताते हैं कि कर अधिकारी उन मामलों में सक्रिय रूप से कार्रवाई करेंगे जहां विदेशी खातों का ठीक से खुलासा नहीं किया गया है।

विदेशी खातों वाले व्यक्तियों के लिए, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी प्रासंगिक विवरण, जिसमें खाता संख्या, संस्थानों के नाम और देश शामिल हैं, उनके ITR के अनुसूची FA (विदेशी संपत्ति) में सटीक रूप से रिपोर्ट किए गए हैं। अनुपालन सुनिश्चित करने और संभावित कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए कर पेशेवर से परामर्श करने की अत्यधिक अनुशंसा की जाती है।

यह लेख केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और कर सलाह का गठन नहीं करता है।

Frequently asked questions

ब्लैक मनी एक्ट क्या है?

ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015, भारतीय संसद द्वारा भारतीयों द्वारा विदेशों में जमा किए गए काले धन से निपटने के लिए अधिनियमित एक कानून है।

किन विदेशी खातों का खुलासा किया जाना चाहिए?

भारत के बाहर किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के साथ रखे गए बचत, चालू, सावधि जमा और किसी अन्य प्रकार के खाते सहित सभी विदेशी बैंक खातों का आपकी आयकर रिटर्न में खुलासा किया जाना चाहिए।

विदेशी खातों का खुलासा न करने के क्या परिणाम हैं?

खुलासा न करने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप अघोषित आय या संपत्ति के मूल्य पर 30% की कर दर और संभावित दंड लग सकता है।

Source: GNews Tax
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