ArthVani
markets

रिलायंस ने ₹10 लाख करोड़ के राजस्व का रिकॉर्ड स्तर छुआ: निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी

By Arth Vani Desk · 2026-06-19

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना अब तक का सबसे शानदार वार्षिक प्रदर्शन किया है, और वह ₹10 लाख करोड़ के राजस्व के आंकड़े को पार करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद, इस समूह ने अपने रिटेल, डिजिटल और ऊर्जा व्यवसायों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की है।

Key takeaways

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अब तक का अपना सबसे सफल वित्तीय वर्ष दर्ज करके भारत में कॉर्पोरेट बेंचमार्क को एक बार फिर से परिभाषित किया है। वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव वाले इस वर्ष में, मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले इस समूह ने ₹10,00,122 करोड़ का रिकॉर्ड समेकित राजस्व (consolidated revenue) दर्ज किया। यह उपलब्धि इसे '₹10 लाख करोड़ क्लब' में प्रवेश करने वाली पहली भारतीय इकाई बनाती है, जो इसके विविध बिजनेस मॉडल में मजबूत लचीलेपन (resilience) का संकेत देती है।

रिटेल और डिजिटल ने दिखाई राह

हालांकि रिलायंस की शुरुआत एक औद्योगिक दिग्गज के रूप में हुई थी, लेकिन इसकी आधुनिक वृद्धि अब तेजी से भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा संचालित हो रही है। रिलायंस रिटेल और जियो प्लेटफॉर्म्स (डिजिटल और टेलीकॉम शाखा) अब कंपनी के परिचालन लाभ (EBITDA) में लगभग आधे का योगदान करते हैं। रिलायंस रिटेल ने देश भर में 18,800 से अधिक स्टोरों तक अपनी पहुंच का विस्तार किया, जबकि जियो ने 48 करोड़ (480 million) ग्राहकों का आंकड़ा पार कर टेलीकॉम क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए रखा।

ऊर्जा और रसायन क्षेत्र में स्थिरता

ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट, जो पारंपरिक रूप से कंपनी की रीढ़ रहा है, वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता के बावजूद स्थिर रहा। रिलायंस ने अपने सोर्सिंग को अनुकूलित (optimize) करके और अपनी रिफाइनरियों में उच्च परिचालन दक्षता बनाए रखते हुए अपने लाभ मार्जिन (profit margins) को सुरक्षित रखा। कंपनी अपनी 'न्यू एनर्जी' (New Energy) की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ा रही है, जिसमें सौर और हाइड्रोजन परियोजनाओं में भारी निवेश किया जा रहा है, जिससे अगले दशक की वृद्धि संचालित होने की उम्मीद है।

रिटेल निवेशकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी के रूप में, रिलायंस लगभग हर प्रमुख भारतीय म्यूचुअल फंड और रिटेल पोर्टफोलियो का आधार है। इसका रिकॉर्ड प्रदर्शन व्यापक शेयर बाजार के लिए 'सेंटिमेंट बूस्टर' का काम करता है। एक औसत निवेशक के लिए, वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बड़े पैमाने पर कैश फ्लो (cash flows) उत्पन्न करने की कंपनी की क्षमता उस स्थिरता को दर्शाती है जो हाई-ग्रोथ स्टॉक में शायद ही कभी देखी जाती है। रिटेल और टेलीकॉम क्षेत्रों में निरंतर वृद्धि वैश्विक ऊर्जा व्यवसाय की चक्रीय प्रकृति (cyclical nature) के खिलाफ एक सुरक्षा (hedge) भी प्रदान करती है।

आगे की राह

भविष्य की ओर देखते हुए, कंपनी का ध्यान डीप-टेक और ग्रीन एनर्जी पर बना हुआ है। साल के लिए ₹79,020 करोड़ के शुद्ध लाभ (net profit) के साथ, रिलायंस के पास अपनी बैलेंस शीट पर अत्यधिक कर्ज लिए बिना अपने महत्वाकांक्षी ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन को वित्तपोषित (fund) करने की वित्तीय क्षमता है। रिटेल शेयरधारकों के लिए, मुख्य ध्यान रिटेल और टेलीकॉम शाखाओं के संभावित डिमर्जर (demerger) या लिस्टिंग पर बना हुआ है, जिसे लेकर कई विश्लेषकों का मानना है कि यह आने वाले वर्षों में शेयरधारकों के लिए और अधिक वैल्यू अनलॉक कर सकता है।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें निवेश की कोई सलाह नहीं दी गई है; कृपया कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले SEBI-पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

Frequently asked questions

₹10 लाख करोड़ के राजस्व का आंकड़ा स्टॉक के लिए क्या मायने रखता है?

यह कंपनी के बड़े पैमाने और वैश्विक समस्याओं के बावजूद विकास करने की क्षमता को दर्शाता है, जो आमतौर पर लंबी अवधि के शेयर की स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को मजबूती देता है।

क्या रिलायंस अभी भी केवल एक तेल कंपनी है?

नहीं, हालांकि तेल व्यवसाय का एक बड़ा हिस्सा बना हुआ है, लेकिन इसके परिचालन लाभ का लगभग आधा हिस्सा अब जियो (टेलीकॉम) और रिलायंस रिटेल से आता है।

क्या जियो या रिटेल को अलग से लिस्ट करने की कोई योजना है?

हालांकि कंपनी ने कोई विशिष्ट तारीख नहीं दी है, प्रबंधन ने पहले संकेत दिया है कि भविष्य में शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक करने के लिए इन इकाइयों का डिमर्जर (demerger) संभव है।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.