ArthVani
real-estate

मेडिकल डिवाइस निर्माताओं को अब आउटसोर्स स्टरलाइजेशन के लिए लोन लाइसेंस की आवश्यकता नहीं

By Arth Vani Desk · 2026-08-24

भारत सरकार ने मेडिकल डिवाइस निर्माताओं के लिए नियमों में ढील दी है, जिससे स्टरलाइजेशन सेवाओं को आउटसोर्स करते समय लोन लाइसेंस की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक संचालन को सरल बनाना है, हालांकि नए लेबलिंग नियम उद्योग के भीतर चिंता पैदा कर रहे हैं।

Key takeaways

भारत सरकार ने मेडिकल डिवाइस निर्माताओं के लिए नियमों में ढील दी है, जिससे स्टरलाइजेशन सेवाओं को आउटसोर्स करते समय लोन लाइसेंस की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक संचालन को सरल बनाना है, हालांकि नए लेबलिंग नियम उद्योग के भीतर चिंता पैदा कर रहे हैं।

भारत सरकार ने मेडिकल डिवाइस निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण नियामक बदलाव की घोषणा की है, जिसके तहत स्टरलाइजेशन (कीटाणुशोधन) सेवाओं को आउटसोर्स करने पर लोन लाइसेंस की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इस कदम से चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन में शामिल कंपनियों के लिए व्यावसायिक प्रक्रियाओं के सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।

इससे पहले, निर्माताओं को अपने मेडिकल डिवाइस के महत्वपूर्ण स्टरलाइजेशन के लिए थर्ड-पार्टी सुविधाओं का उपयोग करने पर भी लोन लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक था। इस आवश्यकता को हटाने को नौकरशाही बाधाओं को कम करने और संभावित रूप से विनिर्माण चक्र को तेज करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, जहां उद्योग लोन लाइसेंस प्रक्रिया के सरलीकरण का स्वागत कर रहा है, वहीं इस बदलाव के साथ पेश किए गए नए लेबलिंग नियमों ने निर्माताओं के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए नियमों के अनुसार, स्टरलाइज़र का लाइसेंस नंबर सीधे मेडिकल डिवाइस के लेबल पर प्रिंट किया जाना अनिवार्य है। उद्योग जगत के दिग्गजों को डर है कि इससे विशेष रूप से निर्यात के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

निर्माता चिंतित हैं कि यह विशिष्ट लेबलिंग आवश्यकता स्टरलाइजेशन सुविधाओं को चुनने में उनकी लचीलापन (flexibility) को सीमित कर सकती है। वर्तमान में, वे उत्पादन की समय सीमा और निर्यात प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सबसे तेज़ उपलब्ध और कुशल स्टरलाइजेशन सेवा प्रदाता चुनने की क्षमता को प्राथमिकता देते हैं। लेबल पर एक विशिष्ट स्टरलाइज़र का लाइसेंस नंबर प्रिंट करने का मतलब यह हो सकता है कि यदि उनका प्राथमिक स्टरलाइज़र अनुपलब्ध है या उन्हें प्रदाता बदलने की आवश्यकता है, तो उन्हें री-लेबलिंग या री-पैकेजिंग के लिए देरी और अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ेगा।

इस तरह की देरी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिकित्सा उपकरणों की समय पर डिलीवरी को प्रभावित कर सकती है, जिससे वैश्विक चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होने की संभावना है। उद्योग लेबलिंग के लिए अधिक लचीले दृष्टिकोण की वकालत कर रहा है जो उनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में चपलता (agility) की अनुमति दे।

एक संबंधित घटनाक्रम में, सरकार ने क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन छूट (waivers) के लिए यूरोपीय संघ (EU) को भी मान्यता दी है। इसका मतलब है कि EU में स्वीकृत मेडिकल डिवाइस भारत में कुछ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन आवश्यकताओं से छूट के पात्र हो सकते हैं, जिससे कुछ उपकरणों के लिए बाजार में प्रवेश की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी।

मेडिकल डिवाइस उद्योग के लिए इसका क्या अर्थ है

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर सलाह का गठन नहीं करता है।

Frequently asked questions

What is the main change for medical device manufacturers?

Medical device manufacturers no longer need to obtain a loan license when they outsource sterilization services to third-party facilities.

Why are manufacturers concerned about the new labeling rules?

Manufacturers are worried that printing the sterilizer's license number on device labels will reduce their flexibility in choosing sterilization facilities, potentially causing shipment delays and hindering exports if they need to switch providers.

How does this change impact exports of medical devices?

The industry fears that the new labeling requirement could lead to delays in choosing the fastest sterilization facility, thereby impacting the timely delivery of devices to international markets and potentially affecting India's export competitiveness.

Source: ET Real Estate
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.