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ITAT का फैसला: NRI पति के फंड से खरीदी गई संपत्ति 'अनएक्सप्लेंड इनकम' के रूप में कर योग्य नहीं

By Arth Vani Desk · 2026-07-25

मुंबई आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने ₹80 लाख के टैक्स एडिशन को हटा दिया है, यह फैसला सुनाते हुए कि यदि फंड का स्रोत अन्यथा सिद्ध हो जाता है, तो एक दस्तावेज की कमी के लिए करदाता को दंडित नहीं किया जा सकता है। यह मामला एक महिला से जुड़ा था जिसने अपने NRI पति द्वारा आधिकारिक बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भेजे गए धन का उपयोग करके संपत्ति खरीदी थी।

Key takeaways

मुंबई आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने ₹80 लाख के टैक्स एडिशन को हटा दिया है, यह फैसला सुनाते हुए कि यदि फंड का स्रोत अन्यथा सिद्ध हो जाता है, तो एक दस्तावेज की कमी के लिए करदाता को दंडित नहीं किया जा सकता है। यह मामला एक महिला से जुड़ा था जिसने अपने NRI पति द्वारा आधिकारिक बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भेजे गए धन का उपयोग करके संपत्ति खरीदी थी।

मुंबई आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि आयकर विभाग किसी निवेश को केवल इसलिए 'अनएक्सप्लेंड' (अस्पष्ट) नहीं मान सकता क्योंकि एक दस्तावेज गायब है, बशर्ते कि पूरा लेनदेन विश्वसनीय साक्ष्यों द्वारा समर्थित हो। न्यायाधिकरण ने हाल ही में एक महिला के खिलाफ किए गए ₹80 लाख के टैक्स एडिशन को रद्द कर दिया, जिसने अपने NRI पति द्वारा भेजे गए धन का उपयोग करके संपत्ति खरीदी थी।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद तब शुरू हुआ जब कर विभाग ने ₹80 लाख की संपत्ति खरीद की जांच की। करदाता ने दावा किया कि यह धनराशि उसके पति, जो एक अनिवासी भारतीय (NRI) हैं, द्वारा वैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्रदान की गई थी। हालांकि, कर अधिकारियों ने फंड के स्रोत के प्रमाण के रूप में एक विशिष्ट प्रेषण (remittance) दस्तावेज की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए पूरी राशि को उसकी कर योग्य आय में जोड़ दिया।

ITAT का तर्क

अपील पर, ITAT ने पाया कि करदाता ने यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत दिए थे कि पैसा उसके पति की विदेशी कमाई से आया था। न्यायाधिकरण ने नोट किया कि धन आधिकारिक बैंकिंग मार्गों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया था और पति की ऐसी धनराशि प्रदान करने की वित्तीय क्षमता पर कोई संदेह नहीं था।

करदाताओं के लिए इसका क्या अर्थ है

यह फैसला उन भारतीय निवासियों को बड़ी राहत देता है जिन्हें रियल एस्टेट जैसी उच्च-मूल्य वाली संपत्तियों के लिए विदेश में रहने वाले परिवार के सदस्यों से वित्तीय सहायता मिलती है। यह इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि जब तक करदाता स्पष्ट पेपर ट्रेल और स्रोत की वैधता प्रदर्शित कर सकता है, तब तक मामूली दस्तावेजी कमियों के कारण भारी कर बोझ या दंड नहीं होना चाहिए।

हालांकि, कर विशेषज्ञ अभी भी आयकर विभाग के साथ लंबी कानूनी लड़ाई से बचने के लिए फॉरेन इनवर्ड रेमिटेंस सर्टिफिकेट (FIRC) और बैंक स्टेटमेंट का सावधानीपूर्वक रिकॉर्ड बनाए रखने की सलाह देते हैं।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी या कर सलाह का गठन नहीं करती है।

Frequently asked questions

क्या मैं अपने NRI जीवनसाथी द्वारा भेजे गए धन का उपयोग करके भारत में संपत्ति खरीद सकता हूँ?

हाँ, आप कर सकते हैं। हालांकि, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धन आधिकारिक बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भेजा जाए और कर जांच से बचने के लिए धन के स्रोत को साबित करने के लिए रिकॉर्ड बनाए रखें।

धारा 69 के तहत 'अनएक्सप्लेंड इन्वेस्टमेंट' क्या है?

यह एक करदाता द्वारा किए गए उन निवेशों को संदर्भित करता है जो उनके खातों की पुस्तकों में दर्ज नहीं हैं, और जिनके लिए वे धन के स्रोत के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकते हैं।

विदेशी प्रेषण (foreign remittances) के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?

सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज फॉरेन इनवर्ड रेमिटेंस सर्टिफिकेट (FIRC) है, साथ ही बैंक स्टेटमेंट जो विदेशी खाते से भारतीय खाते में स्थानांतरण दिखाते हैं।

Source: Mint Money
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