ArthVani
banking

सार्वजनिक बैंक ₹39,000 करोड़ के फंसे कर्ज को दोबारा बेच रहे हैं, 80% दोहराए गए प्रयास हैं

By Arth Vani Desk · 2026-08-20

भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ₹39,000 करोड़ के फंसे कर्ज को बेचने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें से 80% से अधिक ऐसी संपत्तियाँ हैं जिन्हें पिछले प्रयासों में खरीदार नहीं मिले थे। यह बैंकिंग क्षेत्र में, विशेष रूप से बड़े, पुरानी कॉर्पोरेट खातों के लिए लगातार चुनौतियों को उजागर करता है।

Key takeaways

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एक बार फिर ₹39,000 करोड़ के दबावग्रस्त आस्तियों (स्ट्रेस्ड एसेट्स) का एक महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो बिक्री के लिए पेश कर रहे हैं। इस नवीनतम प्रयास का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि इन ऋणों में से लगभग 80% को पहले भी बिक्री के लिए रखा गया था, जो उनके तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) से गैर-निष्पादित आस्तियों (NPAs) को हटाने के लगातार संघर्ष को दर्शाता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाताओं में, इंडियन ओवरसीज बैंक और इंडियन बैंक कथित तौर पर फंसे कर्ज को बेचने के इन दोहराए गए प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति निजी क्षेत्र के बैंकों के ठीक विपरीत है, जिनके दबावग्रस्त आस्तियों के लिए बार-बार बिक्री के प्रयासों का अनुपात बहुत कम है।

फंसे कर्ज क्या हैं और बैंक इन्हें क्यों बेचते हैं?

फंसे कर्ज, जिन्हें गैर-निष्पादित आस्तियाँ (NPAs) भी कहा जाता है, मूल रूप से ऐसे ऋण होते हैं जहाँ उधारकर्ता एक निश्चित अवधि के लिए, आमतौर पर 90 दिनों के लिए मूलधन या ब्याज भुगतान करने में विफल रहा होता है। जब कोई ऋण खराब हो जाता है, तो वह बैंक के लिए आय उत्पन्न करना बंद कर देता है और इसके बजाय एक देनदारी बन जाता है, क्योंकि बैंक को संभावित नुकसान को कवर करने के लिए पूंजी अलग रखनी पड़ती है।

बैंक अक्सर इन फंसे कर्ज को परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (ARCs) या अन्य वित्तीय संस्थानों को बेचने का प्रयास करते हैं। इन्हें बेचने से बैंकों को अपने तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) को साफ करने, प्रावधान संबंधी आवश्यकताओं को कम करने और पूंजी को मुक्त करने में मदद मिलती है, जिसका उपयोग बाद में नए ऋण देने के लिए किया जा सकता है। बैंकों के लिए वित्तीय स्वास्थ्य बनाए रखने और नियामक मानदंडों का पालन करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

दोबारा बिक्री की चुनौती

यह तथ्य कि वर्तमान में पेश किए गए ₹39,000 करोड़ के फंसे कर्ज का 80% दोबारा बिक्री के लिए है, महत्वपूर्ण अंतर्निहित चुनौतियों को रेखांकित करता है। एक प्राथमिक कारण बड़े, पुरानी कॉर्पोरेट खातों को बेचने में कठिनाई है। इन खातों में अक्सर जटिल वित्तीय संरचनाएं शामिल होती हैं, जिनके समाधान के लिए महत्वपूर्ण प्रयासों की आवश्यकता होती है, और ऐसे खरीदारों को ढूंढना मुश्किल हो सकता है जो स्वीकार्य मूल्यांकन पर ऐसे जोखिमों को उठाने के लिए तैयार हों।

बैंकों द्वारा इन आस्तियों के लिए अपेक्षित मूल्य और संभावित खरीदारों (जैसे ARCs) द्वारा भुगतान करने को तैयार मूल्य के बीच बेमेल होना एक सामान्य बाधा है। ARCs आमतौर पर ऐसी आस्तियों की तलाश करते हैं जो छूट पर उचित वसूली की संभावनाएँ प्रदान करती हों, जबकि बैंकों का उद्देश्य अपने नुकसान को कम करना होता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर प्रभाव

निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ देखे गए तीव्र अंतर से पता चलता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अद्वितीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, शायद उनके पुरानी कॉर्पोरेट ऋण पोर्टफोलियो की प्रकृति और पैमाने या परिसंपत्ति समाधान के लिए उनकी परिचालन प्रक्रियाओं के कारण।

इन ऋणों को बेचने के चल रहे प्रयास भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूत वित्तीय स्वास्थ्य की दिशा में यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, दोबारा बिक्री का उच्च अनुपात यह दर्शाता है कि भारत के संचित फंसे कर्ज, विशेष रूप से बड़े कॉर्पोरेट चूक से उत्पन्न होने वाले, के लिए प्रभावी और समय पर समाधान खोजने में महत्वपूर्ण बाधाएँ अभी भी बनी हुई हैं।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Frequently asked questions

रिपोर्ट में 'फंसे कर्ज' क्या हैं?

फंसे कर्ज, जिन्हें गैर-निष्पादित आस्तियाँ (NPAs) भी कहा जाता है, ऐसे ऋण होते हैं जहाँ उधारकर्ताओं ने एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 90 दिन) के लिए भुगतान नहीं किया है। वे बैंकों के लिए आय उत्पन्न करना बंद कर देते हैं और एक देनदारी बन जाते हैं।

कौन से विशिष्ट बैंक इन ऋणों को बार-बार बेचने की कोशिश कर रहे हैं?

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में इंडियन ओवरसीज बैंक और इंडियन बैंक को इन फंसे कर्ज को बार-बार बिक्री के लिए पेश करने के प्रयासों में अग्रणी के रूप में पहचाना गया है।

बैंक इन फंसे कर्ज को बेचने के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं?

प्राथमिक चुनौती बड़े, पुरानी कॉर्पोरेट खातों को बेचने में है, अक्सर जटिल संरचनाओं और बैंकों द्वारा अपेक्षित बिक्री मूल्य तथा संभावित खरीदारों (जैसे ARCs) द्वारा दिए जाने वाले खरीद मूल्य के बीच बेमेल होने के कारण।

Source: Economictimes
Investments are subject to market risks. This article is for informational purposes only and not financial advice.