SEBI ने अनधिकृत प्लेटफार्मों के माध्यम से असूचीबद्ध शेयरों (Unlisted Shares) के व्यापार के खिलाफ निवेशकों को चेतावनी दी
Source: Economictimes
बाजार नियामक SEBI ने खुदरा निवेशकों को अवैध ऑनलाइन पोर्टल्स के माध्यम से असूचीबद्ध कंपनियों के शेयर खरीदने के प्रति आगाह किया है। ये ग्रे मार्केट प्लेटफॉर्म कोई कानूनी सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं, जिससे कुछ भी गलत होने पर निवेशकों के पास अपना पैसा वापस पाने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचता है।
- ▸असूचीबद्ध शेयर बेचने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्मों को SEBI द्वारा मान्यता या अधिकार नहीं दिया गया है।
- ▸इन पोर्टल्स पर ट्रेडिंग करने में महत्वपूर्ण 'निहित जोखिम' होते हैं और शेयर की डिलीवरी या कीमतों की निष्पक्षता की कोई गारंटी नहीं होती है।
- ▸इन प्लेटफार्मों से जुड़े विवादों के लिए निवेशकों की SEBI के कानूनी शिकायत निवारण तंत्र (जैसे SCORES) तक कोई पहुंच नहीं है।
- ▸ग्रे मार्केट में असूचीबद्ध शेयरों के लेन-देन में विनियमित स्टॉक एक्सचेंजों जैसी लिक्विडिटी (तरलता) और पारदर्शिता की कमी होती है।
- ✓असूचीबद्ध शेयर बेचने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्मों को SEBI द्वारा मान्यता या अधिकार नहीं दिया गया है।
- ✓इन पोर्टल्स पर ट्रेडिंग करने में महत्वपूर्ण 'निहित जोखिम' होते हैं और शेयर की डिलीवरी या कीमतों की निष्पक्षता की कोई गारंटी नहीं होती है।
- ✓इन प्लेटफार्मों से जुड़े विवादों के लिए निवेशकों की SEBI के कानूनी शिकायत निवारण तंत्र (जैसे SCORES) तक कोई पहुंच नहीं है।
- ✓ग्रे मार्केट में असूचीबद्ध शेयरों के लेन-देन में विनियमित स्टॉक एक्सचेंजों जैसी लिक्विडिटी (तरलता) और पारदर्शिता की कमी होती है।
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खुदरा निवेशकों की पूंजी को सुरक्षित रखने के प्रयास में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अनधिकृत डिजिटल प्लेटफार्मों पर असूचीबद्ध शेयरों (unlisted shares) के व्यापार के बढ़ते चलन के संबंध में कड़ी चेतावनी जारी की है। चूंकि कई भारतीय निवेशक रिटर्न को अधिकतम करने के लिए 'प्री-IPO' (pre-IPO) अवसरों की तलाश में रहते हैं, इसलिए ऐसे कई ऑनलाइन पोर्टल सामने आए हैं जो उन कंपनियों के शेयरों की बिक्री की सुविधा देने का दावा करते हैं जो अभी तक स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं हैं। हालांकि, SEBI ने स्पष्ट किया है कि ये प्लेटफॉर्म बिना किसी आधिकारिक मान्यता या कानूनी आधार के काम करते हैं।
अनियामित ग्रे मार्केट का खतरा
नियामक ने इस बात पर जोर दिया कि ये इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म न तो SEBI द्वारा मान्यता प्राप्त हैं और न ही अधिकृत हैं। हालांकि वे पेशेवर ट्रेडिंग ऐप की तरह दिख सकते हैं, लेकिन उनमें उस निगरानी (oversight) की कमी होती है जो NSE या BSE जैसे स्थापित एक्सचेंजों को नियंत्रित करती है। चूंकि ये प्लेटफॉर्म नियामक दायरे से बाहर हैं, इसलिए इन पर किए गए लेनदेन को उच्च जोखिम वाला माना जाता है और इनमें सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक पारदर्शिता की कमी होती है।
कई खुदरा निवेशकों के लिए, किसी प्रसिद्ध स्टार्टअप या बड़ी कंपनी के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से पहले उसके शेयर खरीदने का आकर्षण काफी प्रबल होता है। यह अक्सर 'छूट जाने के डर' (FOMO - Fear Of Missing Out) से प्रेरित होता है, जहाँ निवेशकों को लगता है कि वे मुख्य बाजार में आने से पहले कम कीमत पर शेयर सुरक्षित कर सकते हैं। हालांकि, SEBI ने रेखांकित किया है कि इन ग्रे मार्केट सौदों में शामिल 'निहित जोखिम' संभावित लाभों की तुलना में कहीं अधिक हैं।
निवेशकों के लिए शून्य कानूनी सुरक्षा
नियामक द्वारा उठाई गई सबसे महत्वपूर्ण चिंता शिकायत निवारण तंत्र (grievance redressal mechanism) की कमी है। यदि आप किसी विनियमित एक्सचेंज पर शेयर खरीदते हैं और आपको किसी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो आप SEBI के SCORES प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं या एक्सचेंज की मध्यस्थता (arbitration) प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं। अनधिकृत असूचीबद्ध शेयर प्लेटफार्मों के मामले में, ये सुरक्षा मौजूद नहीं है।
- कोई शिकायत निवारण नहीं: यदि कोई प्लेटफॉर्म आपसे पैसा लेने के बाद शेयर देने में विफल रहता है, तो SEBI हस्तक्षेप नहीं कर सकता क्योंकि वह संस्था उनके पास पंजीकृत नहीं है।
- पारदर्शिता की कमी: यह सत्यापित करने का कोई तरीका नहीं है कि इन प्लेटफार्मों पर दी जाने वाली कीमतें उचित हैं या शेयर वास्तव में अस्तित्व में हैं।
- लिक्विडिटी (तरलता) की समस्या: निवेशकों को बाद में इन शेयरों को बेचना असंभव लग सकता है, क्योंकि असूचीबद्ध प्रतिभूतियों के लिए कोई औपचारिक द्वितीयक बाजार (secondary market) नहीं होता है।
सावधानी का आह्वान
SEBI की चेतावनी जनता के लिए एक अनुस्मारक (reminder) के रूप में कार्य करती है कि प्रतिभूति बाजार में कोई भी निवेश पंजीकृत मध्यस्थों (intermediaries) और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। अनधिकृत प्लेटफार्मों पर लेनदेन करके, निवेशक अनिवार्य रूप से एक कानूनी शून्य (legal vacuum) में कदम रख रहे हैं जहाँ उनकी पूंजी धोखाधड़ी और प्रणालीगत विफलताओं के प्रति असुरक्षित है। नियामक इन प्लेटफार्मों की निगरानी करना जारी रखता है ताकि उन खुदरा निवेशकों के शोषण को रोका जा सके जो असूचीबद्ध शेयर हस्तांतरण की कानूनी जटिलताओं को पूरी तरह से नहीं समझते हैं।
प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय सलाह शामिल नहीं है।
Some listings may be sponsored. Mutual fund data is from AMFI and for information only — funds are subject to market risks. Review terms & suitability before investing. Not investment advice.
Frequently Asked Questions
क्या भारत में असूचीबद्ध शेयर (unlisted shares) खरीदना अवैध है?
असूचीबद्ध शेयरों का मालिक होना अवैध नहीं है, लेकिन अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्मों के माध्यम से उनका व्यापार करना अनियंत्रित है और निवेशक सुरक्षा की कमी के कारण SEBI ने इसके खिलाफ चेतावनी दी है।
यदि मैं किसी अनधिकृत ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा खो देता हूं तो क्या होगा?
यदि आपके साथ धोखाधड़ी होती है या प्लेटफॉर्म विफल हो जाता है, तो SEBI आपको अपना धन वापस पाने में मदद नहीं कर सकता क्योंकि वह प्लेटफॉर्म उसके कानूनी ढांचे के तहत पंजीकृत या मान्यता प्राप्त नहीं है।
मैं कैसे जांच सकता हूं कि कोई प्लेटफॉर्म SEBI द्वारा अधिकृत है या नहीं?
आप SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर किसी भी मध्यस्थ या प्लेटफॉर्म के पंजीकरण को सत्यापित कर सकते हैं; वर्तमान में, असूचीबद्ध कंपनी के शेयरों के सार्वजनिक व्यापार के लिए कोई भी इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म अधिकृत नहीं है।
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