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अत्यधिक गर्मी से दक्षिण एशिया में सालाना 3.1 करोड़ नौकरियाँ खत्म, भारत के 2047 के विजन को खतरा

Arth Vani Deskप्रकाशित: अपडेट: 2 मिनट पढ़ें
अत्यधिक गर्मी से दक्षिण एशिया में सालाना 3.1 करोड़ नौकरियाँ खत्म, भारत के 2047 के विजन को खतरा

Source: Mint Economy

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AI सारांश

विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि अत्यधिक गर्मी के कारण दक्षिण एशिया में हर साल 3.1 करोड़ नौकरियाँ खत्म हो रही हैं। पर्याप्त अनुकूलन के बिना, 2050 तक इस क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 7% तक सिकुड़ सकता है, जो भारत के 'विकसित भारत 2047' विकास लक्ष्यों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें
  • ▸Extreme heat is causing 31 million job losses annually in South Asia.
  • ▸The region's GDP could shrink by 7% by 2050 without adaptation.
  • ▸This poses a significant challenge to India's 'Viksit Bharat 2047' goals.
  • ▸Proactive adaptation measures are crucial to mitigate economic damage.
Key Takeaways
  • ✓Extreme heat is causing 31 million job losses annually in South Asia.
  • ✓The region's GDP could shrink by 7% by 2050 without adaptation.
  • ✓This poses a significant challenge to India's 'Viksit Bharat 2047' goals.
  • ✓Proactive adaptation measures are crucial to mitigate economic damage.

विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक गर्मी दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रही है, जिससे सालाना 3.1 करोड़ नौकरियों का नुकसान हो रहा है। यह चिंताजनक प्रवृत्ति क्षेत्र के आर्थिक विकास और प्रगति के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती है, जिसमें भारत का महत्वाकांक्षी 'विकसित भारत 2047' विजन भी शामिल है, जिसका लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है।

रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि प्रभावी अनुकूलन रणनीतियों के बिना, 2050 तक दक्षिण एशिया का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 7% तक छोटा हो सकता है। यह अनुमानित नुकसान विश्व स्तर पर सभी विकासशील क्षेत्रों में सबसे अधिक है, जो बढ़ते तापमान के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

भारत और क्षेत्र पर आर्थिक प्रभाव

हर साल 3.1 करोड़ नौकरियों का नुकसान दक्षिण एशिया भर में लाखों लोगों की आजीविका के लिए एक बड़ा झटका है। ये नौकरी के नुकसान मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में केंद्रित हैं जो बाहरी काम के लिए अत्यधिक उजागर हैं, जैसे कृषि, निर्माण और विनिर्माण, जहाँ श्रमिक अत्यधिक गर्मी की स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं। भारत के लिए, एक बड़ा अनौपचारिक क्षेत्र और इन कमजोर उद्योगों में लगे कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण, इसके निहितार्थ विशेष रूप से गंभीर हैं।

2050 तक जीडीपी में अनुमानित 7% की कमी एक कड़ी चेतावनी है। इस तरह की गिरावट से अरबों भारतीय रुपये का आर्थिक उत्पादन का नुकसान होगा, जिससे सरकारी राजस्व, सार्वजनिक सेवाओं और जीवन स्तर पर समग्र रूप से प्रभाव पड़ेगा। यह भारत की महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में निवेश करने की क्षमता को भी बाधित कर सकता है, जो 'विकसित भारत 2047' एजेंडे के सभी आवश्यक घटक हैं।

'विकसित भारत 2047' के लिए चुनौतियाँ

भारत की 'विकसित भारत 2047' पहल स्वतंत्रता की शताब्दी तक एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना करती है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी नागरिकों के लिए निरंतर आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और बेहतर जीवन स्तर की आवश्यकता है। हालाँकि, विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि अत्यधिक गर्मी इन आकांक्षाओं के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है।

  • उत्पादकता में गिरावट: उच्च तापमान से श्रमिकों की उत्पादकता कम होती है, खासकर उन लोगों के लिए जो शारीरिक श्रम करते हैं, जिससे उत्पादन और आर्थिक दक्षता कम होती है।
  • स्वास्थ्य लागत: गर्मी से संबंधित बीमारियाँ स्वास्थ्य सेवा व्यय को बढ़ाती हैं और कार्यबल के लिए उपलब्ध स्वस्थ कार्य दिवसों को कम करती हैं।
  • खाद्य सुरक्षा: अत्यधिक गर्मी कृषि उपज को प्रभावित करती है, खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालती है और खाद्य कीमतों को बढ़ाती है, जिससे निम्न-आय वाले परिवार असमान रूप से प्रभावित होते हैं।
  • बुनियादी ढाँचे पर दबाव: बढ़ता तापमान सड़कों और बिजली ग्रिड जैसे बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे रखरखाव लागत और व्यवधान बढ़ सकते हैं।

अनुकूलन और शमन की आवश्यकता

विश्व बैंक की रिपोर्ट दक्षिण एशियाई देशों, जिसमें भारत भी शामिल है, के लिए अनुकूलन उपायों में निवेश की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देती है। इन उपायों में शामिल हो सकते हैं:

  • गर्मी-प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचा: ऐसी इमारतों और सार्वजनिक स्थानों का डिज़ाइन और निर्माण करना जो उच्च तापमान का सामना कर सकें और शीतलन प्रदान कर सकें।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: कमजोर आबादी और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मजबूत हीटवेव प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लागू करना।
  • कार्य प्रथाओं में परिवर्तन: काम के घंटों को समायोजित करना, छायादार विश्राम क्षेत्र प्रदान करना और बाहरी श्रमिकों के लिए हाइड्रेशन तक पहुँच सुनिश्चित करना।
  • जलवायु-स्मार्ट कृषि: कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए सूखा-प्रतिरोधी फसलों, कुशल सिंचाई तकनीकों और अन्य प्रथाओं को बढ़ावा देना।
  • हरियाली बढ़ाना: शहरी गर्मी द्वीप प्रभावों को कम करने के लिए शहरी हरे स्थानों और वृक्षों के आवरण को बढ़ाना।

जबकि रिपोर्ट एक चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश करती है, यह इस बात पर भी जोर देती है कि सक्रिय उपाय अत्यधिक गर्मी की आर्थिक और सामाजिक लागतों को काफी कम कर सकते हैं। भारत के लिए, अपनी विकास योजना में जलवायु लचीलेपन को एकीकृत करना केवल एक पर्यावरणीय अनिवार्यता नहीं है, बल्कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को सुरक्षित करने के लिए एक आर्थिक आवश्यकता है।

यह लेख केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय या निवेश सलाह का गठन नहीं करता है।

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Frequently Asked Questions

How many jobs are lost due to extreme heat in South Asia each year?

According to the World Bank, extreme heat leads to the loss of 31 million jobs annually across South Asia.

What is the projected economic impact on South Asia's GDP by 2050?

Without adaptation, the World Bank report projects that South Asia's GDP could be nearly 7% smaller by 2050, the steepest loss among developing regions.

How does extreme heat affect India's 'Viksit Bharat 2047' vision?

Extreme heat threatens India's 'Viksit Bharat 2047' goals by reducing worker productivity, increasing health costs, impacting food security, and straining infrastructure, all of which hinder sustained economic growth and development.

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