भारत और दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ 12 अगस्त को व्यापार समझौते की शर्तों पर करेंगे हस्ताक्षर

Source: ET Economy
भारत और दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU) 12 अगस्त को एक नए तरजीही व्यापार समझौते (PTA) के लिए संदर्भ की शर्तों (ToR) को औपचारिक रूप देने के लिए तैयार हैं। इस कदम का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और भारत और पांच देशों के अफ्रीकी ब्लॉक के बीच प्रमुख वस्तुओं पर टैरिफ कम करना है।
- ▸भारत और SACU (दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो, इस्वातिनी) 12 अगस्त को व्यापार वार्ता की शर्तों पर हस्ताक्षर करेंगे।
- ▸इसका लक्ष्य विशिष्ट वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करने के लिए एक तरजीही व्यापार समझौता (PTA) करना है।
- ▸दक्षिण अफ्रीका प्राथमिक भागीदार बना हुआ है, लेकिन नामीबिया और बोत्सवाना के साथ व्यापार बढ़ रहा है।
- ▸इस समझौते का उद्देश्य पिछले वित्त वर्ष में द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा में देखी गई हालिया गिरावट को दूर करना है।
- ✓भारत और SACU (दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो, इस्वातिनी) 12 अगस्त को व्यापार वार्ता की शर्तों पर हस्ताक्षर करेंगे।
- ✓इसका लक्ष्य विशिष्ट वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करने के लिए एक तरजीही व्यापार समझौता (PTA) करना है।
- ✓दक्षिण अफ्रीका प्राथमिक भागीदार बना हुआ है, लेकिन नामीबिया और बोत्सवाना के साथ व्यापार बढ़ रहा है।
- ✓इस समझौते का उद्देश्य पिछले वित्त वर्ष में द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा में देखी गई हालिया गिरावट को दूर करना है।
भारत अफ्रीका के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। 12 अगस्त को, भारत और दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU) द्वारा तरजीही व्यापार समझौते (PTA) के लिए बातचीत शुरू करने हेतु औपचारिक 'संदर्भ की शर्तों' (ToR) पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है। यह समझौता वस्तुओं की एक विशिष्ट सूची पर सीमा शुल्क को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे क्षेत्रों के बीच आयात और निर्यात सस्ता हो जाएगा।
SACU क्या है?
SACU एक रणनीतिक व्यापार ब्लॉक है जिसमें पांच देश शामिल हैं: दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो और इस्वातिनी। हालांकि दक्षिण अफ्रीका इस समूह के भीतर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है, लेकिन भारत सरकार अन्य सदस्य देशों में अपनी पहुंच में विविधता लाने और विस्तार करने की कोशिश कर रही है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वित्त वर्ष में दक्षिण अफ्रीका के साथ व्यापार में मामूली गिरावट देखी गई थी, वहीं बोत्सवाना और नामीबिया के साथ व्यापार की मात्रा बढ़ रही है।
तरजीही व्यापार पर ध्यान
व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के विपरीत, जो लगभग सभी व्यापारों को कवर करता है, एक PTA अधिक केंद्रित होता है। भारत और SACU उत्पादों की एक 'पॉजिटिव लिस्ट' पर बातचीत करेंगे। इसका मतलब है कि केवल समझौते में विशेष रूप से उल्लिखित वस्तुओं को ही कर लाभ या कम आयात शुल्क प्राप्त होगा। भारतीय व्यवसायों के लिए, इसका मतलब अफ्रीकी कच्चे माल तक आसान पहुंच और भारतीय निर्मित वस्तुओं, रसायनों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए एक बड़ा बाजार हो सकता है।
भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
ToR पर हस्ताक्षर तकनीकी स्तर की वार्ता के लिए आधिकारिक शुरुआत है। भारतीय खुदरा पाठक और छोटे व्यवसाय के मालिक के लिए, यह पारंपरिक पश्चिमी बाजारों के बाहर आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने की दिशा में सरकार के दीर्घकालिक बदलाव का संकेत देता है। जैसे-जैसे व्यापार बाधाएं कम होंगी, भारतीय उपभोक्ता अंततः इन दक्षिणी अफ्रीकी देशों से आयातित वस्तुओं पर अधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य देख सकते हैं, जबकि भारतीय निर्यातकों को अफ्रीकी महाद्वीप में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
- प्रमुख भागीदार: इस ब्लॉक में व्यापार की मात्रा का अधिकांश हिस्सा दक्षिण अफ्रीका का है।
- विकास क्षेत्र: बोत्सवाना और नामीबिया खनिज और संसाधन व्यापार के लिए महत्वपूर्ण भागीदारों के रूप में उभर रहे हैं।
- अगले कदम: 12 अगस्त के हस्ताक्षर के बाद, अधिकारी यह तय करने के लिए मिलेंगे कि किन विशिष्ट उत्पादों को शुल्क में कटौती मिलेगी।
यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वाणिज्यिक या निवेश सलाह शामिल नहीं है।
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Frequently Asked Questions
तरजीही व्यापार समझौता (PTA) क्या है?
PTA देशों के बीच एक ऐसा समझौता है जहां वे उत्पादों की एक विशिष्ट सूची पर सीमा शुल्क को कम करने या समाप्त करने के लिए सहमत होते हैं, जिससे उन वस्तुओं का व्यापार सस्ता हो जाता है।
SACU का हिस्सा कौन से देश हैं?
दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU) में दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो और इस्वातिनी शामिल हैं।
यह भारतीय उपभोक्ता को कैसे प्रभावित करता है?
हालांकि प्रभाव अप्रत्यक्ष है, ऐसे समझौतों से इन क्षेत्रों से आयातित वस्तुओं की कीमतें कम हो सकती हैं और भारतीय निर्यात क्षेत्रों में अधिक रोजगार पैदा हो सकते हैं।
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