भारत और UAE ने लागत और देरी को कम करने के लिए रुपया-दिरहम व्यापार को बढ़ावा दिया

Source: Economictimes
Arth Insight · What this means for your wallet
- अगर आप UAE से भारत पैसे भेजते हैं या प्राप्त करते हैं, तो अब आपको डॉलर में बदलने का शुल्क कम देना होगा, जिससे आपके पैसे बचेंगे।
- भारतीय व्यवसायों के लिए UAE से व्यापार करना सस्ता हो जाएगा, जिससे कुछ उत्पादों की कीमतें कम हो सकती हैं या भारतीय निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है।
- यह कदम रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर सकता है, जिससे लंबी अवधि में आपकी बचत और निवेश को फायदा हो सकता है।
भारत और UAE द्विपक्षीय व्यापार को अमेरिकी डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में निपटाने के प्रयासों को तेज कर रहे हैं। वर्तमान में, 15% व्यापार रुपया (₹) और दिरहम में किया जा रहा है, यह एक ऐसा कदम है जो व्यवसायों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए सस्ते और तेज़ लेनदेन का वादा करता है।
- ▸भारत और UAE अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए रुपये और दिरहम में अधिक व्यापार निपटाने पर जोर दे रहे हैं।
- ▸वर्तमान में, द्विपक्षीय व्यापार का 15% हिस्सा इस स्थानीय मुद्रा तंत्र का उपयोग करता है।
- ▸इस कदम का उद्देश्य लेनदेन लागत को कम करना और व्यवसायों के लिए भुगतान प्रसंस्करण को तेज करना है।
- ▸रिटेल उपयोगकर्ता और भारतीय प्रवासी भविष्य में सीमा पार पैसा भेजने के सस्ते और तेज़ तरीके देख सकते हैं।
- ✓भारत और UAE अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए रुपये और दिरहम में अधिक व्यापार निपटाने पर जोर दे रहे हैं।
- ✓वर्तमान में, द्विपक्षीय व्यापार का 15% हिस्सा इस स्थानीय मुद्रा तंत्र का उपयोग करता है।
- ✓इस कदम का उद्देश्य लेनदेन लागत को कम करना और व्यवसायों के लिए भुगतान प्रसंस्करण को तेज करना है।
- ✓रिटेल उपयोगकर्ता और भारतीय प्रवासी भविष्य में सीमा पार पैसा भेजने के सस्ते और तेज़ तरीके देख सकते हैं।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्विपक्षीय व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर जैसी तीसरी मुद्रा से दूर जाने के लिए अपनी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। लगभग तीन साल पहले लोकल करेंसी सेटलमेंट सिस्टम (LCSS) की शुरुआत के बाद से, दोनों देशों के बीच लगभग 15% व्यापार पहले ही रुपये (₹) और दिरहम में किया जा चुका है।
यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है
पारंपरिक रूप से, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पहले स्थानीय मुद्रा को अमेरिकी डॉलर में बदलना पड़ता है, जिससे विनिमय दर (exchange rate) शुल्क बढ़ जाता है और देरी होती है। रुपया-दिरहम तंत्र का उपयोग करके, भारतीय व्यवसाय UAE से होने वाले आयात के लिए ₹ में भुगतान कर सकते हैं, जबकि अमीरात में रहने वाले भारतीय प्रवासी अंततः अधिक कुशल प्रेषण (remittance) चैनलों का लाभ उठा सकेंगे। दोनों देशों के अधिकारी अब उन संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जिन्होंने इसके व्यापक प्रसार को धीमा कर दिया है।
वर्तमान प्रगति और चुनौतियां
हालांकि 15% की अपनाने की दर एक महत्वपूर्ण शुरुआत है, लेकिन दोनों सरकारें इस आंकड़े को और बढ़ाना चाहती हैं। इसे प्राप्त करने के लिए, कई प्रमुख पहल की जा रही हैं:
- बैंकों की भागीदारी बढ़ाना: वित्तीय नियामक अधिक वाणिज्यिक बैंकों को सेटलमेंट सिस्टम से जोड़ने के लिए काम कर रहे हैं ताकि लघु और मध्यम उद्यमों के लिए व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
- प्रक्रियाओं को सरल बनाना: स्थानीय मुद्रा लेनदेन के लिए आवश्यक दस्तावेज़ीकरण और अनुपालन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- लागत कम करना: डॉलर को दरकिनार करके, व्यवसाय कन्वर्शन स्प्रेड (conversion spreads) पर बचत कर सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यात UAE के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएगा।
व्यक्तिगत पाठकों पर प्रभाव
यद्यपि यह तंत्र मुख्य रूप से बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बदलाव है, लेकिन इसके व्यक्तिगत पाठकों के लिए भी महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। व्यापार के लिए बनाया जा रहा बुनियादी ढांचा तेज और सस्ते सीमा पार प्रेषण (remittances) का मार्ग प्रशस्त करता है। जैसे-जैसे अधिक बैंक इस नेटवर्क में शामिल होंगे, UAE में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए डॉलर-पेग्ड ट्रांसफर से जुड़ी छिपी लागतों के बिना भारत पैसा भेजना जल्द ही आसान और अधिक लागत प्रभावी हो सकता है।
आगे की राह
उत्साह के बावजूद, उद्योग विशेषज्ञ कुछ संरचनात्मक बाधाओं का हवाला देते हैं, जैसे व्यापार की मात्रा में असंतुलन और दोनों मुद्राओं के लिए तरल बाजारों (liquid markets) की आवश्यकता। हालांकि, दोनों सरकारों की प्रतिबद्धता एक अधिक बहु-मुद्रा व्यापार वातावरण की ओर दीर्घकालिक बदलाव का सुझाव देती है, जो नई दिल्ली और अबू धाबी के बीच आर्थिक गलियारे को मजबूत करती है।
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय या निवेश सलाह शामिल नहीं है। मुद्रा बाजार अस्थिरता और नियामक परिवर्तनों के अधीन हैं।
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Frequently Asked Questions
यह व्यापार समझौता UAE से मेरे मनी ट्रांसफर को कैसे प्रभावित करता है?
हालांकि वर्तमान में यह व्यापार पर केंद्रित है, यह प्रणाली बैंकिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करती है जिससे अमेरिकी डॉलर को बीच से हटाकर UAE से भारत में व्यक्तिगत प्रेषण (remittance) को तेज़ और सस्ता बनाया जा सके।
सभी व्यवसाय अभी तक रुपया-दिरहम प्रणाली का उपयोग क्यों नहीं कर रहे हैं?
कुछ व्यवसायों को जटिल कागजी कार्रवाई और भाग लेने वाले बैंकों की सीमित संख्या जैसी संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिसे सरल बनाने के लिए सरकार अब काम कर रही है।
क्या इसका मतलब यह है कि रुपया एक वैश्विक मुद्रा बन रहा है?
यह रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में एक कदम है, क्योंकि यह भारत को डॉलर में विदेशी मुद्रा भंडार की आवश्यकता के बिना UAE जैसे प्रमुख भागीदार के साथ सीधे व्यापार करने की अनुमति देता है।
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