Open a free Demat account & get ₹500 in stocks.Claim
Nifty 5023,053.10.51%H 23,118.1 · L 22,905.1upd. 30 Oct, 3:31 PM IST|Sensex74,459.530.42%H 74,742.59 · L 74,082.03upd. 30 Oct, 3:32 PM IST|Bank Nifty54,686.950.41%H 55,068.5 · L 54,580.75upd. 30 Oct, 3:31 PM IST|USD / INR₹94.940.28%H ₹94.95 · L ₹94.94as of 2:55 AM IST|Gold Intl (10g)₹1,19,009.620%H ₹1,23,261.6 · L ₹1,18,411.35as of 31 Oct, 2:29 AM IST|Silver Intl (1kg)₹1,50,409.550%H ₹1,59,685.76 · L ₹1,49,246.59as of 31 Oct, 2:29 AM IST|Crude WTI₹9,885.150%H ₹9,967.75 · L ₹9,724.7as of 31 Oct, 2:29 AM IST|Bitcoin₹73,86,7810.41%H ₹74,02,002.6 · L ₹73,71,559.4as of 01 Nov, 5:48 PM IST|Ethereum₹2,14,4910.64%H ₹2,15,177.53 · L ₹2,13,804.47as of 01 Nov, 5:48 PM IST|Nifty 5023,053.10.51%H 23,118.1 · L 22,905.1upd. 30 Oct, 3:31 PM IST|Sensex74,459.530.42%H 74,742.59 · L 74,082.03upd. 30 Oct, 3:32 PM IST|Bank Nifty54,686.950.41%H 55,068.5 · L 54,580.75upd. 30 Oct, 3:31 PM IST|USD / INR₹94.940.28%H ₹94.95 · L ₹94.94as of 2:55 AM IST|Gold Intl (10g)₹1,19,009.620%H ₹1,23,261.6 · L ₹1,18,411.35as of 31 Oct, 2:29 AM IST|Silver Intl (1kg)₹1,50,409.550%H ₹1,59,685.76 · L ₹1,49,246.59as of 31 Oct, 2:29 AM IST|Crude WTI₹9,885.150%H ₹9,967.75 · L ₹9,724.7as of 31 Oct, 2:29 AM IST|Bitcoin₹73,86,7810.41%H ₹74,02,002.6 · L ₹73,71,559.4as of 01 Nov, 5:48 PM IST|Ethereum₹2,14,4910.64%H ₹2,15,177.53 · L ₹2,13,804.47as of 01 Nov, 5:48 PM IST|
0%
Business & Economy

भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात 2025-26 तक 16% बढ़कर $2.4 बिलियन हुआ

Arth Vani Deskप्रकाशित: 3 मिनट पढ़ें
भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात 2025-26 तक 16% बढ़कर $2.4 बिलियन हुआ

Source: ET Economy

Arth Insight · What this means for your wallet

Immediate action
खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के स्टॉक्स या सेक्टर-आधारित म्यूचुअल फंड्स पर नज़र रखें और निवेश पर विचार करें।
  • निर्यात बढ़ने से इस क्षेत्र की कंपनियों के मुनाफे और शेयर की कीमतों में ₹2.4 बिलियन के लक्ष्य के साथ बढ़ोतरी हो सकती है।
  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे घरेलू आय के स्तर में सुधार होगा।
  • उत्पादन क्षमता बढ़ने से घरेलू बाजार में भी बेहतर गुणवत्ता वाले और विविध खाद्य उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकते हैं।
Recommended for you
Track markets & economic indicators
Open Markets
Listen to this article
AI voice · Podcast mode
Get IPO & market alerts free on Telegram / WhatsApp
AI सारांश

भारत के तैयार-खाद्य और पके हुए खाद्य पदार्थों का निर्यात वित्तीय वर्ष 2025-26 तक 16% बढ़कर $2.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि पिछले वित्तीय वर्ष में $2.1 बिलियन से एक महत्वपूर्ण उछाल है, जो भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाता है।

मुख्य बातें
  • ▸भारत के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के वित्त वर्ष 2025-26 में 16% बढ़कर $2.4 बिलियन होने का अनुमान है।
  • ▸यह वृद्धि पास्ता, बिस्कुट, पापड़, कॉफी और चाय जैसे विविध उत्पादों को प्रभावित करती है।
  • ▸यह प्रवृत्ति भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण दर्शाती है और विदेशी मुद्रा आय में योगदान करती है।
  • ▸बढ़े हुए निर्यात से रोजगार सृजन हो सकता है और देश के समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिल सकता है।
Key Takeaways
  • ✓भारत के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के वित्त वर्ष 2025-26 में 16% बढ़कर $2.4 बिलियन होने का अनुमान है।
  • ✓यह वृद्धि पास्ता, बिस्कुट, पापड़, कॉफी और चाय जैसे विविध उत्पादों को प्रभावित करती है।
  • ✓यह प्रवृत्ति भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण दर्शाती है और विदेशी मुद्रा आय में योगदान करती है।
  • ✓बढ़े हुए निर्यात से रोजगार सृजन हो सकता है और देश के समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत अपने प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में एक महत्वपूर्ण उछाल देखने के लिए तैयार है, जिसमें तैयार-खाद्य और पके हुए खाद्य पदार्थों का मूल्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में $2.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। ईटी द्वारा किए गए एक विश्लेषण के अनुसार, यह पूर्वानुमान पिछले वित्तीय वर्ष, 2024-25 में दर्ज किए गए $2.1 बिलियन की तुलना में 16% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है।

यह मजबूत वृद्धि प्रक्षेपवक्र 11 प्रमुख प्रसंस्कृत खाद्य श्रेणियों की एक टोकरी के प्रदर्शन पर आधारित है। इनमें पास्ता, मीठे बिस्कुट, पेस्ट्री, पापड़, कॉफी और चाय जैसे विविध और लोकप्रिय उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। वैश्विक मंच पर इन वस्तुओं की मांग में लगातार वृद्धि अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में भारत की मजबूत स्थिति को रेखांकित करती है।

'मेड इन इंडिया' खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग

भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती वैश्विक मांग राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेतक है। मूल्य-वर्धित उत्पादों जैसे इन उत्पादों के निर्यात में वृद्धि भारत की विदेशी मुद्रा आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है, जो आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और आवश्यक आयात के वित्तपोषण के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारत के व्यापार संतुलन में सुधार करने में भी मदद करता है, जो दुनिया भर में उच्च गुणवत्ता वाले, मांग वाले खाद्य पदार्थों का उत्पादन और आपूर्ति करने की देश की क्षमता को दर्शाता है।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो कृषि को विनिर्माण और सेवाओं से जोड़ता है। इस क्षेत्र में वृद्धि से न केवल बड़े पैमाने के निर्माताओं को लाभ होता है, बल्कि किसानों और छोटे पैमाने के उत्पादकों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है जो कच्चे माल की आपूर्ति करते हैं। यह खेत से थाली तक एक मजबूत मूल्य श्रृंखला बनाता है, और समग्र कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है।

घरेलू उद्योग और रोजगार को बढ़ावा

निर्यात में इस तरह की ऊपर की प्रवृत्ति सीधे घरेलू उत्पादन की मांग में वृद्धि में बदल जाती है। बढ़ती वैश्विक मांगों को पूरा करने के लिए, पूरे भारत में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ परिचालन का विस्तार करने की संभावना रखती हैं, जिससे नई मशीनरी, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में संभावित निवेश हो सकता है। यह विस्तार, बदले में, रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण चालक है। विनिर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, रसद और विपणन सहित विभिन्न क्षेत्रों में अधिक नौकरियां पैदा की जा सकती हैं, जो एक विविध कार्यबल के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं।

इसके अलावा, एक संपन्न निर्यात बाजार घरेलू उद्योग के भीतर नवाचार को प्रोत्साहित कर सकता है। भारतीय खाद्य निर्माता नए उत्पादों को बनाने, मौजूदा उत्पादों को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्वाद और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुकूल होने के लिए अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश कर सकते हैं। यह निरंतर सुधार खाद्य क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और ब्रांड प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है।

भारतीय उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था के लिए इसका क्या मतलब है

औसत भारतीय उपभोक्ता के लिए, एक स्वस्थ और बढ़ता निर्यात क्षेत्र एक अधिक मजबूत राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देता है। एक मजबूत अर्थव्यवस्था समय के साथ बेहतर नौकरी की संभावनाओं, बढ़ी हुई आय के स्तर और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं को जन्म दे सकती है। जबकि व्यक्तिगत वित्त पर सीधा प्रभाव तत्काल नहीं हो सकता है, एक संपन्न निर्यात क्षेत्र एक स्थिर आर्थिक वातावरण बनाता है जो अप्रत्यक्ष रूप से सभी को लाभ पहुंचाता है।

यह सकारात्मक निर्यात दृष्टिकोण उन उद्यमियों और व्यवसायों के लिए भी क्षमता पर प्रकाश डालता है जो खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात मूल्य श्रृंखला में प्रवेश करने या विस्तार करने की तलाश में हैं। यह गति वाले एक क्षेत्र का संकेत देता है, जो भारत के वैश्विक व्यापार पदचिह्न में वृद्धि और योगदान के अवसर प्रदान करता है।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय या निवेश सलाह का गठन नहीं करती है।

Recommended for you
Products related to this story — compare & act
Smart picks
Nippon India Small Cap Fund
Nippon India Mutual Fund · Small Cap
12.9%
3Y CAGR
Parag Parikh Flexi Cap Fund
PPFAS Mutual Fund · Flexi Cap
12.4%
3Y CAGR
Gold / Sovereign Gold
Classic inflation hedge
Gold
Hedge
Mirae Asset ELSS Tax Saver Fund
Mirae Asset Mutual Fund · ELSS
11.9%
3Y CAGR
Axis ELSS- Tax Saver Fund
Axis Mutual Fund · ELSS
10.7%
3Y CAGR
Open a Demat Account
Participate in markets
Demat
Access

Some listings may be sponsored and Arth Vani may earn a referral fee. All information is for educational purposes only — verify terms and suitability with the provider before acting. Not financial advice.

Frequently Asked Questions

भारत के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में कितनी वृद्धि होने की उम्मीद है?

भारत के तैयार-खाद्य और पके हुए खाद्य पदार्थों का निर्यात वित्तीय वर्ष 2025-26 में 16% बढ़ने का अनुमान है।

इन अनुमानित निर्यातों का कुल मूल्य कितना है?

इन निर्यातों का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2025-26 तक $2.4 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में $2.1 बिलियन था।

इस निर्यात वृद्धि में किस प्रकार के खाद्य पदार्थ शामिल हैं?

विश्लेषण में पास्ता, मीठे बिस्कुट, पेस्ट्री, पापड़, कॉफी और चाय जैसी लोकप्रिय श्रेणियों सहित 11 वस्तुएं शामिल हैं।

Stay ahead of the market

Join the Arth Vani channels

Daily news summaries, IPO & market alerts on Telegram and WhatsApp.

क्योंकि आपने Business & Economy पढ़ा

PM मोदी 5 नवंबर को FY28 की बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे
Business & Economy

PM मोदी 5 नवंबर को FY28 की बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को नीति आयोग के नए नेतृत्व से मिलेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देते हुए वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए भारत की बजट प्राथमिकताओं को स्थापित करना है।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
प्रधानमंत्री मोदी 5 नवंबर को FY28 बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे
Business & Economy

प्रधानमंत्री मोदी 5 नवंबर को FY28 बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को नीति आयोग के नए नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का लक्ष्य वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देते हुए वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए भारत की बजट प्राथमिकताएं तय करना है।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने निवेश बढ़ाने के लिए भूमि, श्रम और स्थानीय अनुमोदनों में जीएसटी-शैली के सुधारों का आग्रह किया
Business & Economy

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने निवेश बढ़ाने के लिए भूमि, श्रम और स्थानीय अनुमोदनों में जीएसटी-शैली के सुधारों का आग्रह किया

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने जीएसटी परिषद के सफल दृष्टिकोण को, जिसमें छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाना भी शामिल है, भूमि, श्रम और निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक विस्तारित करने का आह्वान किया है। इस कदम का उद्देश्य भारत में कारोबार करने में आसानी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना और अधिक घरेलू तथा विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। प्रस्तावित सुधारों का लक्ष्य सरकार के सभी स्तरों पर जटिल नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें

संबंधित खबरें

PM मोदी 5 नवंबर को FY28 की बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे
Business & Economy

PM मोदी 5 नवंबर को FY28 की बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को नीति आयोग के नए नेतृत्व से मिलेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देते हुए वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए भारत की बजट प्राथमिकताओं को स्थापित करना है।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
प्रधानमंत्री मोदी 5 नवंबर को FY28 बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे
Business & Economy

प्रधानमंत्री मोदी 5 नवंबर को FY28 बजट प्राथमिकताओं के लिए नीति आयोग की बैठक बुलाएंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को नीति आयोग के नए नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का लक्ष्य वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देते हुए वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए भारत की बजट प्राथमिकताएं तय करना है।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने निवेश बढ़ाने के लिए भूमि, श्रम और स्थानीय अनुमोदनों में जीएसटी-शैली के सुधारों का आग्रह किया
Business & Economy

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने निवेश बढ़ाने के लिए भूमि, श्रम और स्थानीय अनुमोदनों में जीएसटी-शैली के सुधारों का आग्रह किया

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने जीएसटी परिषद के सफल दृष्टिकोण को, जिसमें छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाना भी शामिल है, भूमि, श्रम और निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक विस्तारित करने का आह्वान किया है। इस कदम का उद्देश्य भारत में कारोबार करने में आसानी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना और अधिक घरेलू तथा विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। प्रस्तावित सुधारों का लक्ष्य सरकार के सभी स्तरों पर जटिल नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
भारत का 'अनेक चुनावों' का मॉडल असंतोष को दिशा देता है, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन सुनिश्चित करता है
Business & Economy

भारत का 'अनेक चुनावों' का मॉडल असंतोष को दिशा देता है, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन सुनिश्चित करता है

भारत का अनूठा 'एक राष्ट्र, अनेक चुनाव' ढाँचा शांतिपूर्ण सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है, जो वैश्विक स्तर पर देखी जाने वाली हिंसक हलचलों के विपरीत है। यह चुनावी मॉडल सार्वजनिक निराशाओं को सक्रिय रूप से दिशा देता है और सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करता है। यह एक गतिशील और सहभागी राजनीतिक परिदृश्य बनाता है, जिससे नागरिकों को हिंसा का सहारा लिए बिना अपनी चिंताओं को व्यक्त करने का मौका मिलता है।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
DSP Mutual Fund