केरल HC ने डिजि यात्रा के लिए आधार की अनिवार्यता पर उठाए सवाल, निजता के फैसले का दिया हवाला

Source: Medianama
केरल उच्च न्यायालय ने डिजि यात्रा फेशियल रिकग्निशन सिस्टम में पंजीकरण के लिए आधार अनिवार्य करने पर चिंता जताई है। अदालत ने सुझाव दिया कि पहचान सत्यापन के लिए वैकल्पिक सरकारी आईडी पर्याप्त हो सकती है, जिसका जिक्र सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले में किया गया है।
- ▸केरल उच्च न्यायालय ने डिजि यात्रा के लिए आधार के अनिवार्य उपयोग पर सवाल उठाया है।
- ▸पहचान सत्यापन के लिए वैकल्पिक सरकारी आईडी स्वीकार्य हो सकती हैं।
- ▸यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले का संदर्भ देता है।
- ▸इससे डिजि यात्रा प्रणाली के लिए यात्रियों के पंजीकरण के तरीके पर असर पड़ सकता है।
- ✓केरल उच्च न्यायालय ने डिजि यात्रा के लिए आधार के अनिवार्य उपयोग पर सवाल उठाया है।
- ✓पहचान सत्यापन के लिए वैकल्पिक सरकारी आईडी स्वीकार्य हो सकती हैं।
- ✓यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले का संदर्भ देता है।
- ✓इससे डिजि यात्रा प्रणाली के लिए यात्रियों के पंजीकरण के तरीके पर असर पड़ सकता है।
केरल उच्च न्यायालय ने हवाई अड्डों पर डिजि यात्रा फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के साथ पंजीकरण कराने वाले यात्रियों के लिए आधार की अनिवार्य आवश्यकता पर सवाल उठाया है। अदालत ने कहा कि यदि यात्री अन्य सरकारी पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं, तो आधार को अनिवार्य रूप से लिंक करना आवश्यक नहीं हो सकता है।
निजता संबंधी चिंताएं और सुप्रीम कोर्ट का मिसाल
उच्च न्यायालय का यह अवलोकन न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी (सेवानिवृत्त) और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले निजता के मौलिक अधिकार, जिसमें सूचना निजता भी शामिल है, की पुष्टि की थी और वेबसाइटों को ब्लॉक करने से संबंधित आईटी अधिनियम की धारा 69ए और संबंधित नियमों को रद्द कर दिया था। डिजि यात्रा मामले में अदालत का रुख व्यक्तिगत निजता अधिकारों पर निरंतर जोर और जहां संभव हो, पहचान सत्यापन के कम दखल देने वाले तरीकों की आवश्यकता का सुझाव देता है।
डिजि यात्रा प्रणाली की व्याख्या
डिजि यात्रा नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो हवाई अड्डों पर यात्रियों की संपर्क रहित, निर्बाध प्रोसेसिंग प्रदान करता है। यह यात्रियों की पहचान सत्यापित करने और उसे उनके बोर्डिंग पास से जोड़ने के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करता है। इसका उद्देश्य प्रतीक्षा समय को कम करना और यात्रा अनुभव को बेहतर बनाना है। वर्तमान में, डिजि यात्रा ऐप पर पंजीकरण के लिए उपयोगकर्ताओं को सत्यापन के लिए अपना आधार कार्ड अपलोड करने की आवश्यकता होती है, जिसे बाद में उनके फेशियल बायोमेट्रिक डेटा से जोड़ा जाता है।
यात्रियों के लिए निहितार्थ
उच्च न्यायालय की पूछताछ से डिजि यात्रा पंजीकरण प्रक्रिया की समीक्षा हो सकती है। यदि वैकल्पिक पहचान विधियों को स्वीकार किया जाता है, तो यह उन यात्रियों के लिए अधिक लचीलापन प्रदान कर सकता है जो अपने आधार विवरण साझा करने में संकोच करते हैं या जिनके पास यह आसानी से उपलब्ध नहीं है। यह कदम डेटा निजता और सरकारी व निजी संस्थाओं द्वारा बायोमेट्रिक जानकारी के जिम्मेदार उपयोग के आसपास की व्यापक चर्चाओं के अनुरूप है।
अदालत के हस्तक्षेप से डिजिटल युग में सुरक्षा, सुविधा और व्यक्तिगत निजता के बीच संतुलन पर चल रही बहस उजागर होती है। डिजि यात्रा का उपयोग करने वाले या उपयोग करने की योजना बनाने वाले यात्रियों को पंजीकरण आवश्यकताओं में किसी भी बदलाव के बारे में अपडेट रहना चाहिए।
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें निवेश सलाह शामिल नहीं है।
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Frequently Asked Questions
डिजि यात्रा क्या है?
डिजि यात्रा हवाई यात्रियों के लिए एक फेशियल रिकग्निशन-आधारित डिजिटल प्रोसेसिंग सिस्टम है, जिसका उद्देश्य एक निर्बाध और संपर्क रहित यात्रा अनुभव प्रदान करना है।
केरल उच्च न्यायालय डिजि यात्रा की आधार आवश्यकता पर सवाल क्यों उठा रहा है?
अदालत का मानना है कि यात्रियों को अन्य सरकारी-जारी आईडी का उपयोग करके अपनी पहचान सत्यापित करने में सक्षम होना चाहिए, और निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है।
यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस पूछताछ से डिजि यात्रा पंजीकरण के लिए वैकल्पिक सरकारी आईडी स्वीकार कर सकता है, जिससे यात्रियों को अधिक लचीलापन मिलेगा।
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