छोटे निवेशकों की सुरक्षा के लिए सरकार ने प्रतिभूति बाजार (Securities Market) के नियमों को कड़ा किया
Source: Economictimes
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- Market investigations can now last up to one year to ensure thorough checks on fraud.
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Explore investmentsभारत सरकार ने प्रस्तावित प्रतिभूति बाजार संहिता (Securities Markets Code) में महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दे दी है ताकि बाजार की जांच को सुव्यवस्थित किया जा सके और डिपॉजिटरीज को सशक्त बनाया जा सके। इन अपडेट्स का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार संस्थानों के खिलाफ नियामक कार्रवाई विशेषज्ञ निगरानी पर आधारित हो।
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- ▸The government can only take over stock exchange boards if SEBI recommends it.
- ▸The changes aim to simplify complex laws into a single, unified Securities Markets Code.
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भारत सरकार ने ड्राफ्ट प्रतिभूति बाजार संहिता में कई महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकार करके देश के वित्तीय नियामक परिदृश्य को आधुनिक बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिया है। हितधारकों की व्यापक प्रतिक्रिया के आधार पर तैयार किए गए ये बदलाव रिटेल निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए एक अधिक मजबूत और पारदर्शी वातावरण बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
जांच के लिए समयसीमा बढ़ाई गई
नए ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक जांच की समयसीमा को बढ़ाकर एक वर्ष करना है। पहले, कम समयसीमा के कारण अक्सर जांच में जल्दबाजी होती थी या निष्कर्ष अधूरे रह जाते थे। जांच के लिए 12 महीने की अवधि की अनुमति देकर, सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले बाजार में हेरफेर या धोखाधड़ी की गतिविधियों की पूरी तरह से जांच की जाए। औसत निवेशक के लिए, इसका मतलब बाजार में कदाचार के मामलों में न्याय की अधिक संभावना है, क्योंकि नियामकों के पास जटिल वित्तीय पदचिह्नों (trails) को ट्रैक करने के लिए आवश्यक समय होगा।
डिपॉजिटरीज को सशक्त बनाना
अपडेटेड कोड डिपॉजिटरीज को भी उन्नत शक्तियां प्रदान करता है—वे संस्थान जो आपके शेयर और प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने के लिए जिम्मेदार हैं। नए प्रावधानों के तहत, डिपॉजिटरीज के पास रिकॉर्ड सुधारने का कानूनी अधिकार होगा। निवेशक सुरक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह शेयरहोल्डिंग डेटा में त्रुटियों के त्वरित सुधार की अनुमति देता है, जिससे व्यक्तिगत शेयरधारकों के लिए विवादों और प्रशासनिक बाधाओं का जोखिम कम हो जाता है।
बाजार संस्थानों पर संतुलित निगरानी
नियामक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs)—जैसे कि स्टॉक एक्सचेंज—के बोर्डों को अधिक्रमित (supersede) करने की केंद्र की शक्ति अब एक 'चेक-एंड-बैलेंस' प्रणाली के अधीन होगी। सरकार केवल भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की विशिष्ट सिफारिश पर ही इस शक्ति का प्रयोग कर सकेगी। यह बदलाव सुनिश्चित करता है कि स्टॉक एक्सचेंजों के कामकाज में कोई भी बड़ा हस्तक्षेप प्रशासनिक विवेक के बजाय तकनीकी और नियामक आवश्यकता पर आधारित हो।
- पारदर्शिता: सख्त समयसीमा और डिपॉजिटरीज के लिए स्पष्ट भूमिकाओं से एक स्वच्छ बाजार ईकोसिस्टम बनेगा।
- सुरक्षा: नियामकों के लिए बढ़ी हुई शक्तियों का अर्थ है प्रणालीगत जोखिमों के खिलाफ बेहतर सुरक्षा।
- गवर्नेंस: बोर्ड की निगरानी में SEBI की बढ़ी हुई भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि संकट प्रबंधन में बाजार विशेषज्ञ ही नेतृत्व करें।
ये संशोधन विभिन्न प्रतिभूति कानूनों को एक एकल, सुसंगत कोड में समेकित करने के सरकार के इरादे को उजागर करते हैं। इन नियमों को सुव्यवस्थित करके, वित्त मंत्रालय का लक्ष्य उन कानूनी अस्पष्टताओं को कम करना है जो अक्सर अदालती मामलों और नियामक कार्रवाइयों में देरी करती हैं, जिससे अंततः भारतीय बाजार घरेलू पूंजी के लिए एक सुरक्षित स्थान बन सके।
यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय या निवेश सलाह शामिल नहीं है; पाठकों को कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले एक योग्य पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।
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