भारतीय निवेशकों को बाजार को मात देने के लिए स्थानीय शेयरों से आगे क्यों सोचना चाहिए
Source: Economictimes
शेयर बाजार विशेषज्ञ देविना मेहरा का मानना है कि हालांकि इंडेक्स को पछाड़ना अभी भी संभव है, लेकिन निवेश की पुरानी रणनीतियाँ विफल हो रही हैं। उनका सुझाव है कि निरंतर रिटर्न के लिए व्यवस्थित विविधीकरण और वैश्विक निवेश अब अनिवार्य हैं।
- ▸एक 'नैरो रैली' बाजार को स्वस्थ दिखा सकती है, भले ही अधिकांश व्यक्तिगत पोर्टफोलियो संघर्ष कर रहे हों।
- ▸बाजार को मात देना (अल्फा) अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए अधिक अनुशासित और गणितीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
- ▸विविधीकरण जोखिम कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है, न कि केवल भाग्य की बात।
- ▸स्थानीय आर्थिक मंदी से संपत्ति की रक्षा के लिए वैश्विक बाजारों में निवेश करना आवश्यक है।
- ✓एक 'नैरो रैली' बाजार को स्वस्थ दिखा सकती है, भले ही अधिकांश व्यक्तिगत पोर्टफोलियो संघर्ष कर रहे हों।
- ✓बाजार को मात देना (अल्फा) अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए अधिक अनुशासित और गणितीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
- ✓विविधीकरण जोखिम कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है, न कि केवल भाग्य की बात।
- ✓स्थानीय आर्थिक मंदी से संपत्ति की रक्षा के लिए वैश्विक बाजारों में निवेश करना आवश्यक है।
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कई भारतीय रिटेल निवेशकों को अक्सर तब भ्रम महसूस होता है जब वे निफ्टी या सेंसेक्स को रिकॉर्ड ऊंचाई छूते हुए देखते हैं, जबकि उनके निजी पोर्टफोलियो स्थिर रहते हैं या नुकसान भी दिखाते हैं। फर्स्ट ग्लोबल (First Global) की संस्थापक देविना मेहरा के अनुसार, यह घटना अक्सर 'नैरो रैली' (narrow rally) का परिणाम होती है—ऐसी स्थिति जहां केवल मुट्ठी भर हैवी-वेट शेयर ही इंडेक्स को ऊपर ले जाते हैं, जिससे अधिकांश अन्य शेयर पीछे रह जाते हैं।
स्टॉक पिकिंग का बदलता खेल
लंबे समय से, कई निवेशकों का लक्ष्य 'अल्फा' (alpha) खोजना रहा है, जो कि बाजार के औसत से अधिक रिटर्न उत्पन्न करने की क्षमता है। मेहरा का तर्क है कि हालांकि यह लक्ष्य अभी भी प्राप्त करने योग्य है, लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए उपयोग की जाने वाली विधियों को बदलना होगा। पारंपरिक स्टॉक-पिकिंग विधियों पर भरोसा करना या लोकप्रिय रुझानों का पालन करना आज के जटिल बाजार परिवेश में सफलता सुनिश्चित करने के लिए अब पर्याप्त नहीं है।
विविधीकरण विज्ञान है, भाग्य नहीं
ईटी अल्फा वेल्थ समिट (ET Alpha Wealth Summit) में हाइलाइट किए गए सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक यह है कि विविधीकरण (diversification) को केवल एक सुरक्षा घेरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय, मेहरा इसे एक गणितीय आवश्यकता बताती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में निवेश फैलाकर, एक निवेशक किसी एक खराब उद्योग के चुनाव के कारण अपने पूरे पोर्टफोलियो के बर्बाद होने के जोखिम को कम कर सकता है। यह व्यवस्थित दृष्टिकोण किसी एक भाग्यशाली स्टॉक पिक के 'चमत्कार' पर भरोसा करने के बजाय लंबी अवधि में अधिक स्थिर विकास की अनुमति देता है।
विदेश में निवेश का मामला
भारतीय निवेशकों के बीच एक आम गलती 'होम बायस' (home bias) है—अपना सारा पैसा भारतीय शेयर बाजार में ही रखने की प्रवृत्ति। मेहरा इस बात पर जोर देती हैं कि वैश्विक विविधीकरण अब एक सफल रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश करके, भारतीय विभिन्न आर्थिक चक्रों का लाभ उठा सकते हैं और स्थानीय मुद्रा के उतार-चढ़ाव से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। केवल एक देश में ₹-मूल्यवर्ग की संपत्तियों तक सीमित रहने से जोखिम बढ़ जाता है, जबकि वैश्विक दृष्टिकोण घरेलू अस्थिरता के खिलाफ एक आवश्यक सुरक्षा प्रदान करता है।
प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं; कृपया निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को पढ़ें और सेबी (SEBI) पंजीकृत सलाहकार से परामर्श लें।
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Frequently Asked Questions
मेरे निवेश के लिए 'नैरो रैली' का क्या अर्थ है?
नैरो रैली तब होती है जब केवल कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर बढ़ रहे होते हैं, जो मुख्य इंडेक्स को ऊपर ले जाते हैं, भले ही बाजार के अधिकांश अन्य शेयर गिर रहे हों या स्थिर हों।
मेरा पोर्टफोलियो सेंसेक्स जितनी तेजी से क्यों नहीं बढ़ रहा है?
यह आमतौर पर तब होता है जब आपके पास वे विशिष्ट शेयर नहीं होते जो वर्तमान में इंडेक्स को ऊपर ले जा रहे हैं, या यदि आपका पोर्टफोलियो विभिन्न क्षेत्रों में ठीक से विविधीकृत नहीं है।
क्या भारतीय निवेशक के लिए विदेशी शेयर खरीदना वास्तव में आवश्यक है?
हाँ, क्योंकि यह आपके जोखिम को विभिन्न देशों और मुद्राओं में फैलाने में मदद करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी आपके जीवन भर की बचत को प्रभावित न करे।
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