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बेंचमार्क को पीछे छोड़ने में सक्रिय प्रबंधकों के संघर्ष के बीच भारतीय निवेशकों का पैसिव फंड्स की ओर झुकाव

Arth Vani Deskप्रकाशित: 2 मिनट पढ़ें
बेंचमार्क को पीछे छोड़ने में सक्रिय प्रबंधकों के संघर्ष के बीच भारतीय निवेशकों का पैसिव फंड्स की ओर झुकाव

Source: Economictimes

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Review your portfolio to see if your large-cap active funds are consistently beating their benchmarks; if not, consider switching to a low-cost index fund.
  • Passive funds have grown from 6% to 25% of the Indian mutual fund industry in ten years.
  • The majority of active large-cap funds are currently failing to beat their market benchmarks.
  • Investors are choosing index funds to avoid high management fees and human-manager error.

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AI सारांश

भारत का म्यूचुअल फंड परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां पैसिव निवेश की बाजार हिस्सेदारी अब 25% हो गई है। सक्रिय प्रबंधन द्वारा बेंचमार्क से कम प्रदर्शन किए जाने के कारण रिटेल निवेशक अब सक्रिय प्रबंधन के बजाय कम लागत वाले इंडेक्स फंड को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मुख्य बातें
  • Passive funds have grown from 6% to 25% of the Indian mutual fund industry in ten years.
  • The majority of active large-cap funds are currently failing to beat their market benchmarks.
  • Investors are choosing index funds to avoid high management fees and human-manager error.
  • India is adopting passive investing at a faster rate than almost any other international market.
Key Takeaways
  • Passive funds have grown from 6% to 25% of the Indian mutual fund industry in ten years.
  • The majority of active large-cap funds are currently failing to beat their market benchmarks.
  • Investors are choosing index funds to avoid high management fees and human-manager error.
  • India is adopting passive investing at a faster rate than almost any other international market.

भारत का निवेश परिदृश्य एक संरचनात्मक बदलाव से गुजर रहा है जो लगभग किसी भी अन्य वैश्विक बाजार की तुलना में अधिक तेज है। दशकों तक, रिटेल निवेशक जीतने वाले शेयरों को चुनने के लिए सक्रिय फंड प्रबंधकों (active fund managers) पर निर्भर थे, लेकिन 'पैसिव' निवेश का एक नया युग म्यूचुअल फंड उद्योग में तेजी से प्रमुख शक्ति बन रहा है।

कम लागत वाले निवेश का उदय

सिर्फ एक दशक में, पैसिव फंड्स—जिसमें इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) शामिल हैं—उद्योग के 6% के छोटे से हिस्से से बढ़कर 25% की विशाल हिस्सेदारी तक पहुंच गए हैं। ET Alpha Wealth Summit के विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिवर्तन बाजार की परिपक्वता और आम भारतीयों के बीच निवेश लागत के प्रति बढ़ती जागरूकता के संयोजन से प्रेरित है।

सक्रिय फंडों के विपरीत, जहां एक प्रबंधक बाजार को मात देने की कोशिश करता है, पैसिव फंड केवल Nifty 50 या Sensex जैसे सूचकांक (index) को ट्रैक करते हैं। यह दृष्टिकोण मानवीय त्रुटि की संभावना को खत्म करता है और अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेशकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले शुल्क (एक्सपेंस रेशियो) को काफी कम कर देता है।

प्रदर्शन का अंतर

इस बदलाव का प्राथमिक कारण सक्रिय प्रबंधकों का अपने उच्च शुल्क को उचित ठहराने के लिए संघर्ष करना है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश लार्ज-कैप एक्टिव फंड अपने संबंधित बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने में विफल हो रहे हैं। जब कोई फंड अपने इंडेक्स को पछाड़ने में विफल रहता है, तो निवेशक मूल रूप से एक बुनियादी इंडेक्स फंड की तुलना में कम रिटर्न के लिए अधिक शुल्क दे रहे होते हैं।

इस प्रवृत्ति के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

  • बाजार की दक्षता (Market Efficiency): जैसे-जैसे भारतीय शेयर बाजार परिपक्व हो रहा है, प्रबंधकों के लिए ऐसे 'छिपे हुए रत्न' (hidden gems) खोजना कठिन होता जा रहा है जिनकी कीमत बाजार ने पहले से तय न की हो।
  • शुल्क के प्रति संवेदनशीलता: निवेशक महसूस कर रहे हैं कि 10-20 वर्षों में, वार्षिक शुल्क में 1% का अंतर भी उनकी अंतिम संपत्ति के एक बड़े हिस्से को कम कर सकता है।
  • सरलता: पैसिव फंड पारदर्शिता प्रदान करते हैं, क्योंकि निवेशकों को पता होता है कि इंडेक्स संरचना के आधार पर उनके पास कौन से शेयर हैं।

एक वैश्विक गति रिकॉर्ड

सिड स्वामीनाथन ने शिखर सम्मेलन के दौरान उल्लेख किया कि भारत में इस बदलाव की गति अन्य विकसित बाजारों में देखी गई गति से बिल्कुल अलग है। जबकि अमेरिका में पैसिव निवेश को हावी होने में दशकों लग गए, भारतीय रिटेल निवेशक डिजिटल प्लेटफॉर्म और ETFs तक आसान पहुंच की मदद से रिकॉर्ड समय में इस ओर रुख कर रहे हैं।

जैसे-जैसे उद्योग विकसित हो रहा है, रुझान बताते हैं कि हालांकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में सक्रिय प्रबंधन का मूल्य अभी भी बना रह सकता है, लेकिन लार्ज-कैप क्षेत्र तेजी से पैसिव निवेशकों का कार्यक्षेत्र बनता जा रहा है।

प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय सलाह शामिल नहीं है।

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Mutual fund data is sourced from AMFI and shown for information only — funds are subject to market risks. Read all scheme-related documents carefully. Some listings may be sponsored. Not investment advice.

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मोतीलाल ओसवाल डिजिटल इंडिया फंड का NAV 5 दिनों में 10% बढ़ा: निवेशकों को क्या जानना चाहिए
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