क्या सोने की तेज़ी खत्म हो गई? ICICI प्रूडेंशियल के टॉप फंड मैनेजर ने अब इक्विटी और डेट पर ध्यान केंद्रित किया

Source: Economictimes
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- सोने में निवेश पर संभावित रिटर्न कम हो सकता है, क्योंकि इसकी तेज़ी थमने की उम्मीद है।
- भारतीय शेयर बाजार में निवेश से लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है।
- डेट फंड से स्थिर आय (yield) मिल सकती है, जो पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करेगी।
मनीष बंथिया, वह फंड मैनेजर जिन्होंने सोने में हालिया उछाल की सटीक भविष्यवाणी की थी, अब इस कीमती धातु पर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका सुझाव है कि बेहतर दीर्घकालिक मूल्य के लिए निवेशकों को भारतीय शेयरों और फिक्स्ड-इनकम साधनों के संतुलित मिश्रण की ओर रुख करना चाहिए।
- ▸Manish Banthia believes gold valuations are no longer as attractive for fresh investments.
- ▸The fund manager recommends a balanced mix of equity and debt for retail portfolios.
- ▸Indian stocks and emerging markets are viewed as having better growth potential than bullion at current levels.
- ▸Fixed-income assets are suggested as a necessary hedge to manage equity market volatility.
- ✓Manish Banthia believes gold valuations are no longer as attractive for fresh investments.
- ✓The fund manager recommends a balanced mix of equity and debt for retail portfolios.
- ✓Indian stocks and emerging markets are viewed as having better growth potential than bullion at current levels.
- ✓Fixed-income assets are suggested as a necessary hedge to manage equity market volatility.
ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम), मनीष बंथिया, सोने पर अपने रुख को नरम कर रहे हैं। 2023 की भारी सर्राफा तेज़ी का सही पूर्वानुमान लगाने के बाद, यह दिग्गज फंड मैनेजर—जो ₹2.7 लाख करोड़ की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं—अब मानते हैं कि सोने की आक्रामक खरीदारी का समय बीत चुका है।
सोने से मोहभंग क्यों?
सोना पारंपरिक रूप से मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितता के खिलाफ एक बचाव (hedge) के रूप में कार्य करता रहा है। हालांकि, बंथिया के अनुसार, पिछले एक साल में देखी गई कीमतों में तेज़ वृद्धि ने वैल्युएशन को काफी बढ़ा दिया है, जिससे निकट भविष्य में किसी महत्वपूर्ण लाभ की गुंजाइश कम बची है। हालांकि सोना पोर्टफोलियो में स्थिरता बनाए रखने वाला कारक बना हुआ है, लेकिन उनका सुझाव है कि मौजूदा स्तरों पर नया निवेश उतना जोखिम-इनाम लाभ (risk-reward benefits) नहीं दे सकता जितना कि अन्य एसेट क्लास दे सकते हैं।
इक्विटी और डेट का पक्ष
सोने के पीछे भागने के बजाय, बंथिया एक "संतुलित" दृष्टिकोण की वकालत कर रहे हैं। वह इस बात पर जोर देते हैं कि भारतीय इक्विटी और अन्य उभरते बाजार वर्तमान में दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक प्रवेश बिंदु (entry points) प्रदान करते हैं। उनकी रणनीति दो मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है:
- घरेलू इक्विटी: भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और कॉर्पोरेट अर्निंग की क्षमता शेयर बाजार में निरंतर निवेश के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है।
- फिक्स्ड इनकम (डेट): ब्याज दरों के स्थिर होने के साथ, डेट फंड और फिक्स्ड-इनकम साधन विश्वसनीय यील्ड प्रदान कर रहे हैं जो इक्विटी बाजार की अस्थिरता को संतुलित करते हैं।
संतुलित आवंटन ही कुंजी है
CIO इस बात पर जोर देते हैं कि रिटेल निवेशकों को अपने सभी अंडे एक ही टोकरी में रखने से बचना चाहिए। इक्विटी और डेट का मिश्रण बनाए रखकर, निवेशक भारत की विकास गाथा में भाग ले सकते हैं और साथ ही यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनके पोर्टफोलियो का फिक्स्ड-इनकम हिस्सा बाजार सुधार (market corrections) के दौरान एक कुशन के रूप में कार्य करे।
रिटेल निवेशकों के लिए, यह बदलाव सोने में "मोमेंटम" खरीदारी से हटकर अधिक अनुशासित और वैल्युएशन-आधारित निवेश रणनीति की ओर बढ़ने का संकेत है। जैसे-जैसे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य बदल रहा है, अब ध्यान उन संपत्तियों पर है जो घरेलू बाजार के भीतर टिकाऊ विकास प्रदान कर सकें।
प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें वित्तीय सलाह शामिल नहीं है।
Mutual fund data is sourced from AMFI and shown for information only — funds are subject to market risks. Read all scheme-related documents carefully. Some listings may be sponsored. Not investment advice.
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