Open a free Demat account & get ₹500 in stocks.Claim
Nifty 5023,346.40.33%H 23,389.15 · L 23,286.6|Sensex74,294.960.06%H 74,728.44 · L 74,294.96|Bank Nifty56,358.70.54%H 56,497.45 · L 56,073.55|USD / INR₹95.880.04%H ₹95.88 · L ₹95.88|Gold Intl (10g)₹1,36,402.470.57%H ₹1,36,861.78 · L ₹1,34,777.93|Silver Intl (1kg)₹2,06,994.261.59%H ₹2,09,293.89 · L ₹2,02,650.87|Crude WTI₹9,212.151.18%H ₹9,397.2 · L ₹9,092.3|Bitcoin₹77,12,3680.94%H ₹77,48,508.42 · L ₹76,76,227.58|Ethereum₹2,48,3001.28%H ₹2,49,886.51 · L ₹2,46,713.49|Nifty 5023,346.40.33%H 23,389.15 · L 23,286.6|Sensex74,294.960.06%H 74,728.44 · L 74,294.96|Bank Nifty56,358.70.54%H 56,497.45 · L 56,073.55|USD / INR₹95.880.04%H ₹95.88 · L ₹95.88|Gold Intl (10g)₹1,36,402.470.57%H ₹1,36,861.78 · L ₹1,34,777.93|Silver Intl (1kg)₹2,06,994.261.59%H ₹2,09,293.89 · L ₹2,02,650.87|Crude WTI₹9,212.151.18%H ₹9,397.2 · L ₹9,092.3|Bitcoin₹77,12,3680.94%H ₹77,48,508.42 · L ₹76,76,227.58|Ethereum₹2,48,3001.28%H ₹2,49,886.51 · L ₹2,46,713.49|
0%
Banking

वेल्स फ़ार्गो ने अमेरिकी कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए 24/7 टोकनाइज़्ड जमा सेवा शुरू की

Arth Vani Deskप्रकाशित: 2 मिनट पढ़ें
वेल्स फ़ार्गो ने अमेरिकी कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए 24/7 टोकनाइज़्ड जमा सेवा शुरू की

Source: Finextra

Arth Insight · What this means for your wallet

Immediate action
Note this development as an important step in the global evolution of digital banking, which may influence future financial services in India.
  • वेल्स फ़ार्गो ने अपने अमेरिकी कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए टोकनाइज़्ड जमा शुरू की है, जिससे 24/7 धन का आवागमन और निपटान संभव होगा।
  • टोकनाइज़्ड जमा बैंक के धन को डिजिटल रूप से दर्शाने के लिए ब्लॉकचेन जैसी तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे तेज़ और अधिक लचीले लेनदेन संभव होते हैं।
  • यह नवाचार बैंकिंग में 24/7 डिजिटल सेवाओं की ओर एक वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाता है और भारत में भविष्य के बैंकिंग विकास को प्रभावित कर सकता है।
Recommended for you
Compare savings accounts, FDs & loans
Explore Banking
Listen to this article
AI voice · Podcast mode
Get IPO & market alerts free on Telegram / WhatsApp
AI सारांश

वेल्स फ़ार्गो ने अपने कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए टोकनाइज़्ड जमा सेवा शुरू की है, जिससे वे चौबीसों घंटे (24/7) धन हस्तांतरित करने, प्रोग्राम करने और निपटाने में सक्षम होंगे। यह नवाचार लेनदेन को तेज़ और अधिक कुशल बनाने के लिए ब्लॉकचेन जैसी तकनीक का उपयोग करता है।

मुख्य बातें
  • वेल्स फ़ार्गो ने अपने अमेरिकी कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए टोकनाइज़्ड जमा शुरू की है, जिससे 24/7 धन का आवागमन और निपटान संभव होगा।
  • टोकनाइज़्ड जमा बैंक के धन को डिजिटल रूप से दर्शाने के लिए ब्लॉकचेन जैसी तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे तेज़ और अधिक लचीले लेनदेन संभव होते हैं।
  • यह नवाचार बैंकिंग में 24/7 डिजिटल सेवाओं की ओर एक वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाता है और भारत में भविष्य के बैंकिंग विकास को प्रभावित कर सकता है।
Key Takeaways
  • वेल्स फ़ार्गो ने अपने अमेरिकी कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए टोकनाइज़्ड जमा शुरू की है, जिससे 24/7 धन का आवागमन और निपटान संभव होगा।
  • टोकनाइज़्ड जमा बैंक के धन को डिजिटल रूप से दर्शाने के लिए ब्लॉकचेन जैसी तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे तेज़ और अधिक लचीले लेनदेन संभव होते हैं।
  • यह नवाचार बैंकिंग में 24/7 डिजिटल सेवाओं की ओर एक वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाता है और भारत में भविष्य के बैंकिंग विकास को प्रभावित कर सकता है।

वेल्स फ़ार्गो, एक प्रमुख अमेरिकी वित्तीय संस्थान, ने अपने कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए टोकनाइज़्ड जमा की पेशकश करने वाली एक नई सेवा शुरू की है। यह अभिनव कदम व्यवसायों को चौबीसों घंटे, सातों दिन (24/7) वित्तीय लेनदेन करने, जिसमें धन हस्तांतरित करना, प्रोग्राम करना और निपटाना शामिल है, की अनुमति देता है।

टोकनाइज़्ड जमा क्या हैं?

टोकनाइज़्ड जमा अनिवार्य रूप से एक डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) नेटवर्क, जिसे अक्सर ब्लॉकचेन के रूप में संदर्भित किया जाता है, पर पारंपरिक बैंक जमा का एक डिजिटल प्रतिनिधित्व हैं। पारंपरिक बैंकिंग प्रणालियों पर निर्भर रहने के बजाय जिनकी विशिष्ट कार्य घंटे और निपटान चक्र होते हैं, ये 'टोकन' धन को लगभग तुरंत और लगातार हस्तांतरित और निपटाया जा सकता है। इसे पैसे के डिजिटलीकरण के रूप में सोचें जो इसे विशिष्ट उपयोगों या स्वचालित भुगतानों के लिए प्रोग्राम करने की अनुमति देता है, जिससे लेनदेन अधिक लचीले और कुशल बन जाते हैं।

कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए मुख्य लाभ

  • 24/7 उपलब्धता: पारंपरिक बैंकिंग प्रणालियों में अक्सर कट-ऑफ समय होता है, खासकर बड़े कॉर्पोरेट लेनदेन के लिए। टोकनाइज़्ड जमा इसे समाप्त करता है, जिससे व्यवसायों को सप्ताहांत और छुट्टियों सहित किसी भी समय अपने धन का प्रबंधन करने में सक्षम बनाता है।
  • तत्काल निपटान: DLT का उपयोग लेनदेन को अंतिम रूप देने में लगने वाले समय को काफी कम कर सकता है, दिनों या घंटों से लगभग-तत्काल निपटान तक।
  • प्रोग्राम करने की क्षमता: धन को कुछ शर्तों के पूरा होने पर स्वचालित रूप से भुगतान निष्पादित करने के लिए 'प्रोग्राम' किया जा सकता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला वित्त, एस्क्रो सेवाओं और अन्य जटिल वित्तीय परिचालनों के लिए दक्षता बढ़ती है।

हालांकि वेल्स फ़ार्गो की प्रारंभिक शुरुआत यूएस में कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक ग्राहकों के उद्देश्य से है, यह विकास बैंकिंग सेवाओं के विश्व स्तर पर कैसे विकसित हो सकती है, इसमें एक व्यापक बदलाव का संकेत देता है। यह मुख्यधारा के वित्त में DLT का एक व्यावहारिक अनुप्रयोग प्रस्तुत करता है, जो प्रायोगिक चरणों से एक प्रमुख बैंक द्वारा वास्तविक-दुनिया में तैनाती की ओर बढ़ रहा है।

भारतीय पाठकों और बैंकिंग के भविष्य के लिए निहितार्थ

हालांकि वेल्स फ़ार्गो की टोकनाइज़्ड जमा सेवा भारतीय खुदरा ग्राहकों या व्यवसायों के लिए सीधे उपलब्ध नहीं है, यह कदम बैंकिंग की भविष्य की दिशा को समझने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। भारत डिजिटल भुगतान नवाचार में सबसे आगे रहा है, खासकर UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) जैसी प्रणालियों की सफलता के साथ।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी DLT और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) की अवधारणा, जिसे डिजिटल रुपया (e₹) के नाम से जाना जाता है, में गहरी रुचि दिखाई है। वैश्विक बैंकों द्वारा टोकनाइज़्ड जमा जैसे नवाचार यह प्रभावित कर सकते हैं कि भारतीय बैंक और नियामक अपनी स्वयं की परिचालन में DLT को कैसे एकीकृत करते हैं। खुदरा ग्राहकों के लिए, यह अंततः निम्नलिखित का कारण बन सकता है:

  • तेज़ और अधिक कुशल डिजिटल लेनदेन।
  • प्रोग्राम योग्य धन का लाभ उठाने वाले नए प्रकार के वित्तीय उत्पाद।
  • विभिन्न डिजिटल भुगतान प्रणालियों के बीच बढ़ी हुई अंतर-संचालनीयता।

वित्त के डिजिटलीकरण की दिशा में वैश्विक दबाव, इसे 24/7 उपलब्ध कराना और DLT जैसी नई तकनीकों का लाभ उठाना एक ऐसे भविष्य का सुझाव देता है जहां पैसा सीमाओं के पार और घरेलू अर्थव्यवस्थाओं के भीतर अधिक स्वतंत्र रूप से और कुशलता से चलता है। जबकि एक भारतीय खुदरा पाठक पर तत्काल प्रभाव अप्रत्यक्ष है, यह एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रवृत्ति पर प्रकाश डालता है जो आने वाले वर्षों में भारत में बैंकिंग सेवाओं को नया आकार दे सकता है।

यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह या किसी विशिष्ट उत्पाद का समर्थन नहीं करती है।

Recommended for you
Products related to this story — compare & act
Smart picks
IDFC FIRST Savings
Savings Account
7.0%
Interest p.a.
Current Account Pro
Current Account · ICICI
₹0
Min Balance
Bandhan Bank FD
Fixed Deposit
7.85%
FD Rate
SBI Recurring Deposit
Recurring Deposit
7.0%
RD Rate
HDFC Millennia Card
Credit Card
5%
Cashback
Axis Ace Credit Card
Credit Card
5%
Cashback

Interest rates, fees and eligibility for banking products are set by the respective banks and change frequently — verify the current terms with the provider before applying. Some listings may be sponsored. Not financial advice.

Frequently Asked Questions

टोकनाइज़्ड जमा क्या हैं?

टोकनाइज़्ड जमा सुरक्षित डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर नेटवर्क (जैसे ब्लॉकचेन) पर पारंपरिक बैंक जमा का डिजिटल प्रतिनिधित्व हैं, जिससे धन का तेज़, अक्सर तत्काल, और 24/7 आवागमन और निपटान संभव होता है।

वेल्स फ़ार्गो की नई टोकनाइज़्ड जमा सेवा का उपयोग कौन कर सकता है?

वर्तमान में, वेल्स फ़ार्गो की टोकनाइज़्ड जमा सेवा विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में उसके कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।

यह तकनीक भारत में बैंकिंग को कैसे प्रभावित कर सकती है?

यद्यपि यह अभी भारत में सीधे उपलब्ध नहीं है, यह नवाचार 24/7 डिजिटल बैंकिंग की दिशा में एक वैश्विक प्रवृत्ति का संकेत देता है। यह भारतीय बैंकों और नियामकों को समान DLT-आधारित समाधानों का पता लगाने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे भविष्य में भारतीय व्यवसायों और खुदरा ग्राहकों के लिए तेज़, अधिक कुशल डिजिटल लेनदेन और नए वित्तीय उत्पाद बन सकते हैं।

Stay ahead of the market

Join the Arth Vani channels

Daily news summaries, IPO & market alerts on Telegram and WhatsApp.

क्योंकि आपने Banking पढ़ा

RBI के डिप्टी गवर्नर मुर्मू: MDR की चिंताएँ भारतीयों को वापस नकदी की ओर धकेलने की संभावना नहीं
Banking

RBI के डिप्टी गवर्नर मुर्मू: MDR की चिंताएँ भारतीयों को वापस नकदी की ओर धकेलने की संभावना नहीं

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जताई जा रही चिंताओं से भारत में नकद के उपयोग में वृद्धि होने की उम्मीद नहीं है। यह मौजूदा आशंकाओं के बावजूद डिजिटल भुगतान को अपनाने की केंद्रीय बैंक की निरंतरता में विश्वास को दर्शाता है।

3h ago·1 मिनट पढ़ेंसुनें
विश्लेषकों का अनुमान: 2026 के अंत तक RBI दो बार बढ़ा सकता है दरें
ताज़ा
Banking

विश्लेषकों का अनुमान: 2026 के अंत तक RBI दो बार बढ़ा सकता है दरें

वित्तीय विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) कैलेंडर वर्ष 2026 के अंत तक ब्याज दरों में दो बार वृद्धि कर सकता है। इस संभावित कदम से भारतीय बैंकिंग प्रणाली में उधार और जमा दरों पर असर पड़ सकता है, जिससे उधारकर्ता और बचतकर्ता दोनों प्रभावित होंगे।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच अमेरिकी फेड द्वारा नीति सख्त करने से आरबीआई पर दर वृद्धि का दबाव
ताज़ा
Banking

बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच अमेरिकी फेड द्वारा नीति सख्त करने से आरबीआई पर दर वृद्धि का दबाव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति को सख्त करने के बाद ब्याज दरें बढ़ाने का लगातार दबाव बढ़ रहा है। RBI की यह अपेक्षित कार्रवाई भारत में बढ़ती मुद्रास्फीति से निपटने का लक्ष्य रखती है, जिसे वैश्विक आर्थिक कारक और बढ़ा रहे हैं।

1d ago·3 मिनट पढ़ेंसुनें

संबंधित खबरें

RBI के डिप्टी गवर्नर मुर्मू: MDR की चिंताएँ भारतीयों को वापस नकदी की ओर धकेलने की संभावना नहीं
Banking

RBI के डिप्टी गवर्नर मुर्मू: MDR की चिंताएँ भारतीयों को वापस नकदी की ओर धकेलने की संभावना नहीं

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जताई जा रही चिंताओं से भारत में नकद के उपयोग में वृद्धि होने की उम्मीद नहीं है। यह मौजूदा आशंकाओं के बावजूद डिजिटल भुगतान को अपनाने की केंद्रीय बैंक की निरंतरता में विश्वास को दर्शाता है।

3h ago·1 मिनट पढ़ेंसुनें
विश्लेषकों का अनुमान: 2026 के अंत तक RBI दो बार बढ़ा सकता है दरें
ताज़ा
Banking

विश्लेषकों का अनुमान: 2026 के अंत तक RBI दो बार बढ़ा सकता है दरें

वित्तीय विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) कैलेंडर वर्ष 2026 के अंत तक ब्याज दरों में दो बार वृद्धि कर सकता है। इस संभावित कदम से भारतीय बैंकिंग प्रणाली में उधार और जमा दरों पर असर पड़ सकता है, जिससे उधारकर्ता और बचतकर्ता दोनों प्रभावित होंगे।

3h ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच अमेरिकी फेड द्वारा नीति सख्त करने से आरबीआई पर दर वृद्धि का दबाव
ताज़ा
Banking

बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच अमेरिकी फेड द्वारा नीति सख्त करने से आरबीआई पर दर वृद्धि का दबाव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति को सख्त करने के बाद ब्याज दरें बढ़ाने का लगातार दबाव बढ़ रहा है। RBI की यह अपेक्षित कार्रवाई भारत में बढ़ती मुद्रास्फीति से निपटने का लक्ष्य रखती है, जिसे वैश्विक आर्थिक कारक और बढ़ा रहे हैं।

1d ago·3 मिनट पढ़ेंसुनें
भारतीय बैंकिंग प्रणाली में आरबीआई तरलता क्यों समायोजित करता है, यह समझना
Banking

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में आरबीआई तरलता क्यों समायोजित करता है, यह समझना

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) तरलता का प्रबंधन करने, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए वाणिज्यिक बैंकों से समय-समय पर अतिरिक्त नकदी वापस लेता है। इस कार्रवाई में आमतौर पर रिवर्स रेपो परिचालन या खुले बाजार की बिक्री जैसे उपकरण शामिल होते हैं, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में उधार देने के लिए उपलब्ध धन की मात्रा को कम करना है।

2d ago·2 मिनट पढ़ेंसुनें
DSP Mutual Fund