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Business & Economy

राज्यों का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 तक कर राजस्व में सुधार से 3.4% तक घटेगा: आईसीआईसीआई बैंक

Arth Vani Deskप्रकाशित: 1 मिनट पढ़ें
राज्यों का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 तक कर राजस्व में सुधार से 3.4% तक घटेगा: आईसीआईसीआई बैंक

Source: ET Economy

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Note the improving fiscal health of states as a positive economic indicator.
  • राज्यों का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 तक GSDP के 3.4% तक गिरने की उम्मीद है।
  • कर संग्रह में सुधार इस कमी का एक प्रमुख चालक है।
  • बेहतर राजस्व प्राप्तियां भी राज्य के वित्त का समर्थन करेंगी।
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AI सारांश

राज्यों का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2027 तक उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3.4% तक कम होने का अनुमान है। आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से अपेक्षित मजबूत कर संग्रह और समग्र रूप से बेहतर राजस्व प्रदर्शन से प्रेरित है।

मुख्य बातें
  • ▸राज्यों का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 तक GSDP के 3.4% तक गिरने की उम्मीद है।
  • ▸कर संग्रह में सुधार इस कमी का एक प्रमुख चालक है।
  • ▸बेहतर राजस्व प्राप्तियां भी राज्य के वित्त का समर्थन करेंगी।
  • ▸कम घाटे से राज्यों के लिए उधार लेने की लागत कम हो सकती है।
Key Takeaways
  • ✓राज्यों का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 तक GSDP के 3.4% तक गिरने की उम्मीद है।
  • ✓कर संग्रह में सुधार इस कमी का एक प्रमुख चालक है।
  • ✓बेहतर राजस्व प्राप्तियां भी राज्य के वित्त का समर्थन करेंगी।
  • ✓कम घाटे से राज्यों के लिए उधार लेने की लागत कम हो सकती है।

भारत में राज्य वित्त वर्ष 27 तक अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3.4% तक राजकोषीय घाटे को कम करने की राह पर हैं। आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट में विस्तृत इस सकारात्मक दृष्टिकोण का श्रेय मुख्य रूप से कर संग्रह में अपेक्षित वृद्धि और राजस्व प्राप्तियों में सामान्य सुधार को दिया जाता है।

घाटे में कमी लाने वाले कारक

रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि बढ़ी हुई कर लोच, जिसका अर्थ है कि कर राजस्व अर्थव्यवस्था की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, राज्य के वित्त को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही, अन्य राजस्व धाराओं में सुधार से राज्यों की वित्तीय स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। कम राजकोषीय घाटा दर्शाता है कि राज्य अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कम उधार ले रहे हैं, जिसे आम तौर पर आर्थिक स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाता है।

राज्य के वित्त के लिए निहितार्थ

राजकोषीय घाटे में कमी से राज्यों को कई लाभ हो सकते हैं। इससे उनके ब्याज भुगतान का बोझ कम हो सकता है, जिससे विकासात्मक व्यय के लिए संसाधन मुक्त हो सकते हैं। इसके अलावा, एक अनुशासित राजकोषीय दृष्टिकोण निवेशकों के विश्वास को बढ़ा सकता है और संभावित रूप से राज्यों के लिए बेहतर क्रेडिट रेटिंग का कारण बन सकता है, जिससे बुनियादी ढांचे और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए धन जुटाना उनके लिए आसान और सस्ता हो जाएगा।

राजकोषीय घाटे में अनुमानित गिरावट एक स्वागत योग्य विकास है, जो आने वाले वर्षों में राज्य-स्तरीय सार्वजनिक वित्त के लिए एक अधिक टिकाऊ मार्ग का सुझाव देता है। यदि यह प्रवृत्ति साकार होती है, तो यह भारत में समग्र मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता में योगदान कर सकती है।

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें निवेश सलाह शामिल नहीं है।

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Frequently Asked Questions

राजकोषीय घाटा क्या है?

राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का कुल व्यय उसके द्वारा उत्पन्न राजस्व से अधिक हो जाता है, जिसमें उधार से प्राप्त धन शामिल नहीं होता है। यह उस अंतर का प्रतिनिधित्व करता है जिसे उधार के माध्यम से वित्तपोषित करने की आवश्यकता होती है।

GSDP क्या है?

GSDP का मतलब सकल राज्य घरेलू उत्पाद है। यह किसी दिए गए अवधि में किसी राज्य के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य है, ठीक उसी तरह जैसे GDP राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है।

कम राजकोषीय घाटा राज्यों के लिए अच्छा क्यों है?

कम राजकोषीय घाटे का मतलब है कि राज्य कम उधार ले रहे हैं, जिससे उनके ब्याज भुगतान का बोझ कम हो सकता है, विकास के लिए धन मुक्त हो सकता है और उनकी वित्तीय विश्वसनीयता में सुधार हो सकता है।

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