Zerodha, Groww, Angel One को मिला GIFT City का अप्रूवल: US Stocks में निवेश करना होगा और भी आसान

Source: Economictimes
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- अब आप Apple और Google जैसे अमेरिकी शेयरों में कम ट्रांजैक्शन फीस और कम करेंसी कन्वर्जन चार्ज पर निवेश कर पाएंगे।
- फ्रैक्शनल ओनरशिप के जरिए आप महंगे अमेरिकी शेयरों का एक छोटा हिस्सा (जैसे ₹500-₹1000 में) भी खरीद सकेंगे।
- LRS के तहत ₹2.1 करोड़ तक के निवेश की सुविधा अब सीधे आपके मौजूदा ट्रेडिंग ऐप से आसान कागजी कार्रवाई के साथ मिलेगी।
भारत की टॉप चार ब्रोकरेज फर्मों को GIFT City में काम करने के लिए नियामक मंजूरी मिल गई है। इस कदम से रिटेल निवेशक अपने मौजूदा ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए अमेरिकी शेयर आसानी से खरीद सकेंगे, जिससे रेमिटेंस (धन प्रेषण) से जुड़ी पारंपरिक बाधाएं खत्म हो जाएंगी।
- ▸Zerodha, Groww, Angel One और Upstox को ग्लोबल इन्वेस्टिंग की सुविधा प्रदान करने के लिए IFSCA की मंजूरी मिल गई है।
- ▸यह कदम भारतीय रिटेल निवेशकों को कम कागजी कार्रवाई के साथ परिचित ऐप्स के माध्यम से अमेरिकी शेयर खरीदने की अनुमति देगा।
- ▸निवेश RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) की सीमाओं के दायरे में होंगे।
- ▸इस विकास का उद्देश्य विदेशी ट्रेडिंग से जुड़ी उच्च लागत और जटिलता को कम करना है।
- ✓Zerodha, Groww, Angel One और Upstox को ग्लोबल इन्वेस्टिंग की सुविधा प्रदान करने के लिए IFSCA की मंजूरी मिल गई है।
- ✓यह कदम भारतीय रिटेल निवेशकों को कम कागजी कार्रवाई के साथ परिचित ऐप्स के माध्यम से अमेरिकी शेयर खरीदने की अनुमति देगा।
- ✓निवेश RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) की सीमाओं के दायरे में होंगे।
- ✓इस विकास का उद्देश्य विदेशी ट्रेडिंग से जुड़ी उच्च लागत और जटिलता को कम करना है।
ग्लोबल इन्वेस्टिंग के लिए एक बड़ा बदलाव
Apple, Google या Tesla जैसे अंतरराष्ट्रीय टेक दिग्गजों के साथ अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने की चाहत रखने वाले भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए अब कागजी कार्रवाई में बड़ी कमी आने वाली है। भारत के सबसे लोकप्रिय ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स—Zerodha, Groww, Angel One और Upstox—ने गुजरात स्थित GIFT City में काम करने के लिए इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से लाइसेंस प्राप्त कर लिए हैं।
इस रेगुलेटरी मंजूरी से घरेलू निवेशकों की विदेशी इक्विटी बाजारों तक पहुंच बदलने की उम्मीद है। वर्तमान में, अमेरिकी शेयर खरीदने के लिए जटिल बैंक प्रक्रियाओं, उच्च फॉरेन एक्सचेंज मार्कअप और विदेशी रेमिटेंस के लिए बोझिल कागजी कार्रवाई से गुजरना पड़ता है। GIFT City के विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर, ये ब्रोकर्स अपने डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से इस प्रक्रिया को सीधे और सरल बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
GIFT City और RBI की भूमिका
GIFT City एक वित्तीय गेटवे के रूप में कार्य करता है, जो भारतीय निवासियों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशी संपत्ति में निवेश करने की अनुमति देता है। LRS के तहत, एक व्यक्ति कानूनी रूप से एक वित्तीय वर्ष में विदेश में स्टॉक और संपत्ति में निवेश सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए $250,000 (लगभग ₹2.1 करोड़) तक भेज सकता है।
हालांकि LRS ढांचा सालों से मौजूद है, लेकिन Zerodha और Groww जैसे मास-मार्केट ब्रोकर्स का प्रवेश एक 'गेम-चेंजर' है। इन प्लेटफॉर्म्स के पास लाखों सक्रिय यूजर्स हैं, जो अब तक मुख्य रूप से NSE और BSE पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। नए लाइसेंस इन ब्रोकर्स को भारतीय और अमेरिकी दोनों इक्विटी के लिए एक सहज 'वन-ऐप' अनुभव प्रदान करने की अनुमति देंगे।
रिटेल निवेशकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
एक औसत निवेशक के लिए, इस कदम से कई लाभ होने की उम्मीद है:
- लागत में कमी: GIFT City के माध्यम से सीधे जुड़ाव से ट्रांजैक्शन फीस और करेंसी कन्वर्जन कॉस्ट (मुद्रा परिवर्तन लागत) कम होने की उम्मीद है, जो वर्तमान में पारंपरिक बैंक काफी अधिक वसूलते हैं।
- इस्तेमाल में आसानी: निवेशक संभवतः कुछ ही क्लिक के साथ अपने ग्लोबल अकाउंट्स में फंड डाल सकेंगे और ट्रेड कर सकेंगे, ठीक उसी तरह जैसे वे स्थानीय शेयर खरीदते हैं।
- फ्रैक्शनल ओनरशिप (आंशिक स्वामित्व): इस क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश प्लेटफॉर्म 'फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग' की अनुमति देते हैं, जिसका अर्थ है कि एक निवेशक महंगे अमेरिकी शेयर का एक छोटा हिस्सा कुछ ही डॉलर में खरीद सकता है।
आगे क्या होगा?
हालांकि लाइसेंस दे दिए गए हैं, लेकिन इन सेवाओं के औपचारिक रूप से शुरू होने की उम्मीद चरणों में है। प्रत्येक ब्रोकरेज को अपने बैक-एंड सिस्टम को GIFT City के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ना होगा। एक बार लाइव होने के बाद, इससे भारतीय घरों से वैश्विक बाजारों में पूंजी के प्रवाह में बड़ी वृद्धि हो सकती है क्योंकि निवेश की बाधाएं अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ जाएंगी।
प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। विदेशी निवेश में अतिरिक्त जोखिम शामिल होते हैं, जिनमें मुद्रा में उतार-चढ़ाव और राजनीतिक अस्थिरता शामिल है।
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Frequently Asked Questions
क्या मैं तुरंत इन ऐप्स पर अमेरिकी शेयर खरीदना शुरू कर सकता हूं?
अभी नहीं; हालांकि ब्रोकर्स को नियामक मंजूरी मिल गई है, लेकिन वे वर्तमान में यूजर्स के लिए इस फीचर को रोल आउट करने से पहले आवश्यक तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं।
मैं शेयर खरीदने के लिए विदेश में कितना पैसा भेज सकता हूं?
RBI के LRS नियमों के तहत, आप अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए प्रति वित्तीय वर्ष $250,000 (लगभग ₹2.1 करोड़) तक भेज सकते हैं।
क्या मैं एक अमेरिकी शेयर का केवल एक अंश (fraction) खरीद पाऊंगा?
हाँ, अधिकांश GIFT City आधारित प्लेटफॉर्म फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग की सुविधा देते हैं, जिससे आप Berkshire Hathaway या Amazon जैसे महंगे शेयरों का एक हिस्सा कम रुपयों में भी खरीद सकते हैं।
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क्योंकि आपने GIFT City पढ़ा

GIFT City भारत के समुद्री वित्त के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित
भारत का अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) गिफ्ट सिटी, समुद्री क्षेत्र से संबंधित वित्त गतिविधियों को सुगम बनाने के लिए एक केंद्रीय बिंदु के रूप में उभर रहा है, जिसका उद्देश्य देश के महत्वाकांक्षी शिपिंग और बंदरगाह विकास लक्ष्यों का समर्थन करना है।

आनंद राठी वेल्थ की सहायक कंपनी को गिफ्ट सिटी में फंड मैनेजर का लाइसेंस मिला
आनंद राठी वेल्थ की सहायक कंपनी, एआरडब्ल्यू कैपिटल, को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से श्रेणी-1 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) का लाइसेंस मिला है। इससे यह गिफ्ट सिटी के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) के भीतर फंड मैनेजर के रूप में कार्य कर सकेगी।

BRICS राष्ट्र AI गवर्नेंस और स्टार्टअप इनोवेशन फ्रेमवर्क लॉन्च करने के लिए एकजुट
BRICS गठबंधन ने वैश्विक AI गवर्नेंस स्थापित करने और सीमा पार स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए नई पहलों का औपचारिक रूप से समर्थन किया है। इस कदम का उद्देश्य भारत सहित सदस्य देशों के लिए एक सहयोगी डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाते हुए पश्चिमी प्लेटफार्मों पर तकनीकी निर्भरता को कम करना है।
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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जहाज स्वामित्व और समुद्री वित्त के लिए भारत को एक अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की भारत की महत्वाकांक्षा की घोषणा की। इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य भारत की विशाल तटरेखा और बढ़ती आर्थिक शक्ति का लाभ उठाकर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और निवेश को आकर्षित करना है, जिसमें गिफ्ट सिटी की महत्वपूर्ण भूमिका होने की संभावना है।
