कर पेशेवर समूह एआईएमटीपीए ने ऑडिट आईटीआर, टीएआर की नियत तारीखों के विस्तार की मांग की

Source: GNews Tax
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- यदि नियत तारीख बढ़ती है, तो आप देर से फाइलिंग पर लगने वाले भारी जुर्माने से बच सकते हैं, जिससे आपके हजारों रुपये बचेंगे।
- अतिरिक्त समय मिलने पर, आप अपनी फाइलिंग में गलतियों की संभावना को कम कर सकते हैं, जिससे भविष्य में संभावित नोटिस और अतिरिक्त खर्चों से बचा जा सकेगा।
- आपके कर सलाहकार को पर्याप्त समय मिलने से वे बेहतर और सटीक सेवा दे पाएंगे, जिससे सही अनुपालन सुनिश्चित होगा और अनावश्यक लागतें कम हो सकती हैं।
कर पेशेवरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संघ, एआईएमटीपीए ने औपचारिक रूप से वित्त मंत्रालय से टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (टीएआर) और आयकर रिटर्न (ऑडिट आईटीआर) की नियत तारीखों को बढ़ाने का अनुरोध किया है। समूह ने कार्यभार में उल्लेखनीय वृद्धि का हवाला दिया है, जिससे पेशेवरों के लिए वर्तमान समय-सीमा को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
- ▸एआईएमटीपीए, कर पेशेवरों के एक निकाय ने, वित्त मंत्रालय से कर की नियत तारीखों को बढ़ाने का अनुरोध किया है।
- ▸यह अनुरोध विशेष रूप से टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (टीएआर) और आयकर रिटर्न (ऑडिट आईटीआर) को लक्षित करता है।
- ▸विस्तार का मुख्य कारण कर पेशेवरों पर बढ़ते कार्यभार को बताया गया है।
- ▸वित्त मंत्रालय से आधिकारिक प्रतिक्रिया का फिलहाल इंतजार है।
- ✓एआईएमटीपीए, कर पेशेवरों के एक निकाय ने, वित्त मंत्रालय से कर की नियत तारीखों को बढ़ाने का अनुरोध किया है।
- ✓यह अनुरोध विशेष रूप से टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (टीएआर) और आयकर रिटर्न (ऑडिट आईटीआर) को लक्षित करता है।
- ✓विस्तार का मुख्य कारण कर पेशेवरों पर बढ़ते कार्यभार को बताया गया है।
- ✓वित्त मंत्रालय से आधिकारिक प्रतिक्रिया का फिलहाल इंतजार है।
कर पेशेवरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन, एआईएमटीपीए ने औपचारिक रूप से वित्त मंत्रालय से टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (टीएआर) और आयकर रिटर्न (ऑडिट आईटीआर) दाखिल करने की आगामी नियत तारीखों को बढ़ाने का आग्रह किया है।
इस अनुरोध का मुख्य कारण कर पेशेवरों और लेखा परीक्षकों द्वारा वर्तमान में सामना किए जा रहे कार्यभार में उल्लेखनीय वृद्धि है। कथित तौर पर, यह बढ़ा हुआ कार्यभार उनके लिए वर्तमान निर्धारित समय-सीमा के भीतर व्यापक दस्तावेज़ीकरण और अनुपालन प्रक्रियाओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बना रहा है, जिससे समय पर प्रस्तुतियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
करदाताओं के लिए इसका क्या मतलब है
भारतीय खुदरा करदाताओं के लिए, विशेष रूप से व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए जिनके खातों को आयकर अधिनियम की विशिष्ट धाराओं के तहत ऑडिट की आवश्यकता होती है, एक विस्तार से बहुत आवश्यक अतिरिक्त समय मिलेगा। इन रिपोर्टों को समय पर जमा करना दंड से बचने और कर नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (टीएआर) कुछ करदाताओं के लिए एक अनिवार्य दस्तावेज़ है, जिसे एक चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 44एबी के अनुसार वित्तीय लेनदेन का विवरण होता है। इसी तरह, ऑडिट आईटीआर उन करदाताओं द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न को संदर्भित करता है जो अनिवार्य कर ऑडिट के अधीन हैं।
वित्त मंत्रालय ने एआईएमटीपीए के अनुरोध पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। करदाताओं और कर पेशेवरों को संभावित नियत तारीख विस्तार के संबंध में किसी भी अपडेट के लिए आधिकारिक सरकारी घोषणाओं पर बारीकी से नज़र रखने की सलाह दी जाती है।
यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय या कर सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
Tax figures shown are indicative estimates for education only and depend on your specific situation. Consult a qualified tax professional or the Income-Tax Department before acting.
Frequently Asked Questions
कर की नियत तारीखों के विस्तार का अनुरोध किसने किया है?
कर पेशेवरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन, एआईएमटीपीए ने औपचारिक रूप से वित्त मंत्रालय से विस्तार का अनुरोध किया है।
एआईएमटीपीए किन विशिष्ट नियत तारीखों को बढ़ाने के लिए कह रहा है?
एआईएमटीपीए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (टीएआर) और आयकर रिटर्न (ऑडिट आईटीआर) की नियत तारीखों के विस्तार का अनुरोध कर रहा है।
इन कर समय-सीमाओं के लिए विस्तार क्यों मांगा जा रहा है?
कर पेशेवरों द्वारा सामना किए जा रहे कार्यभार में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण विस्तार मांगा जा रहा है, जिससे वर्तमान समय-सीमा तक रिपोर्टों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
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क्योंकि आपने Taxation पढ़ा

ITAT दिल्ली ने ट्रस्टों के लिए धारा 11 छूट की समयबद्धता की जांच की
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) दिल्ली ने हाल ही में इस महत्वपूर्ण मुद्दे का विश्लेषण किया है कि क्या धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्ट धारा 11 के तहत कर छूट का दावा कर सकते हैं, यदि उनके आयकर रिटर्न (ITR) विलंब से दाखिल किए जाते हैं। यह जांच आयकर अधिनियम के तहत कर लाभ चाहने वाले संगठनों के लिए समय पर अनुपालन के चल रहे महत्व पर प्रकाश डालती है। निर्णय का विशिष्ट विवरण प्रदान किए गए स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं था।

ITAT देर से ITR दाखिल करने वाले संस्थानों के लिए कर छूट के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश देता है
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने कर अधिकारियों को धारा 10(23C)(iiiab) के तहत छूट के आवेदनों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है, भले ही आयकर रिटर्न (ITR) देर से दाखिल किया गया हो। यह निर्देश कुछ शैक्षिक और चिकित्सा संस्थानों के लिए संभावित राहत प्रदान करता है, जिसमें देरी से दाखिल करने के कारण स्वचालित अस्वीकृति के बजाय योग्यता के आधार पर नए सिरे से मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने देर से दाखिल किए गए आईटीआर वाले संस्थानों के लिए कर छूट के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने कर अधिकारियों को धारा 10(23C)(iiiab) के तहत छूट के आवेदनों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है, भले ही आयकर रिटर्न (ITR) देर से दाखिल किया गया हो। यह निर्देश कुछ शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों के लिए संभावित राहत प्रदान करता है, जिसमें विलंब से दाखिल करने के कारण स्वचालित अस्वीकृति के बजाय योग्यता के आधार पर नए सिरे से मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।
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ताज़ाITAT चेन्नई ने स्टाल इंडिया के लिए सद्भावना मूल्यह्रास की अनुमति दी और सीसीडी ब्याज स्थानांतरण मूल्य निर्धारण समायोजन को हटाया
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) चेन्नई ने स्टाल इंडिया के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे कंपनी को एकमुश्त बिक्री (स्लम सेल) के माध्यम से अधिग्रहित सद्भावना (गुडविल) पर कर मूल्यह्रास का दावा करने की अनुमति मिल गई है। इसके अतिरिक्त, न्यायाधिकरण ने अनिवार्य परिवर्तनीय डिबेंचर (CCDs) पर भुगतान किए गए ब्याज से संबंधित स्थानांतरण मूल्य निर्धारण समायोजन (ट्रांसफर प्राइसिंग एडजस्टमेंट) को रद्द कर दिया है। यह निर्णय कॉर्पोरेट कर कानून के दो जटिल क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण स्पष्टता प्रदान करता है।
