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US Fed के फैसले से पहले रुपया डॉलर के मुकाबले 84.52 पर स्थिर
बुधवार को भारतीय रुपया सपाट स्तर पर बंद हुआ। तेल की गिरती कीमतों के कारण मिली शुरुआती बढ़त को आयातकों की भारी डॉलर मांग ने खत्म कर दिया। अब सभी की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसले पर हैं, जो विदेशी यात्रा और आयातित वस्तुओं की लागत तय करेगा।
डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होकर ₹84.56 पर पहुंचा; कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और शांति की उम्मीदों से मिला सहारा
भारतीय रुपया लगातार तीसरे सत्र में बढ़त बनाते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹84.56 पर बंद हुआ। यह रिकवरी वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान शांति समझौते की संभावना से उत्पन्न उत्साह के कारण हुई है, जिससे भारतीय परिवारों के लिए लागत कम हो सकती है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर ₹95.76 पर पहुंचा, तेल कंपनियों की मांग में भारी उछाल
भारतीय रुपया आज भारी दबाव में रहा और घरेलू तेल कंपनियों द्वारा डॉलर की भारी मांग के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर ₹95.76 पर आ गया। इस गिरावट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप के बाद हाल ही में हुई रिकवरी को लगभग पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
डॉलर के बढ़ते दबाव के बीच मुद्राओं को स्थिर करने के लिए एशियाई केंद्रीय बैंकों ने उठाए कदम
भारत सहित पूरे एशिया के केंद्रीय बैंक स्थानीय मुद्राओं को नए निचले स्तर पर गिरने से बचाने के लिए ऑफशोर मुद्रा व्यापार (offshore currency trading) पर नियमों को सख्त कर रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य आयातित मुद्रास्फीति (imported inflation) को नियंत्रित करना और आम नागरिकों के लिए विदेश यात्रा और शिक्षा की लागत को स्थिर करना है।
रुपये को स्थिर करने के लिए RBI का हस्तक्षेप: केंद्रीय बैंक के इस कदम का आपके लिए क्या मतलब है
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये को कमजोर होने से बचाने के लिए कथित तौर पर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया है। रणनीतिक स्वैप और मार्केट ट्रेडों का उपयोग करके, केंद्रीय बैंक का लक्ष्य भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए स्थिरता बनाए रखना है।
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर स्थिर; रुपये और विदेशी खर्चों पर प्रभाव
मिडिल ईस्ट में सैन्य हमलों के बाद अमेरिकी डॉलर स्थिर बना रहा क्योंकि निवेशकों का ध्यान आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है। ये वैश्विक बदलाव भारतीय निवासियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे सीधे विदेशी शिक्षा, यात्रा की लागत और आयातित वस्तुओं की कीमत को प्रभावित करते हैं।
RBI के कदमों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को मिली मजबूती
भारतीय रिजर्व बैंक के रणनीतिक हस्तक्षेप और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भारतीय रुपया स्थिरता के संकेत दे रहा है। बाजार विश्लेषकों ने अपने मूल्यह्रास (depreciation) के पूर्वानुमानों को कम कर दिया है, जिससे भारतीय परिवारों के लिए आयातित मुद्रास्फीति का जोखिम कम होने का संकेत मिलता है।
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