FII Outflows
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FII Outflows पर ताज़ा
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का संकेत: लंबे समय तक ऊंची रहेंगी दरें; भारतीय निवेशक रहें उतार-चढ़ाव के लिए तैयार
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि जिद्दी मुद्रास्फीति (sticky inflation) के कारण ब्याज दरें लंबी अवधि तक ऊंची बनी रहेंगी। इस 'हॉकिश' (सख्त) रुख से भारत से विदेशी फंडों की निकासी शुरू होने की संभावना है और इससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा स्थानीय ब्याज दरों में कटौती की योजनाओं में देरी हो सकती है।
FII की सावधानी: 61% इमर्जिंग मार्केट फंड्स भारत पर 'Underweight' क्यों हैं
वैश्विक वित्तीय फर्म Jefferies ने चेतावनी दी है कि भारत की विकास क्षमता के बावजूद, अधिकांश बड़े इमर्जिंग मार्केट (EM) फंड सतर्क बने हुए हैं। शेयरों का उच्च वैल्युएशन और टेक्नोलॉजी साइकिल में वैश्विक बदलाव वर्तमान में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने से रोक रहे हैं।
FII की बिकवाली की चिंता न करें: क्यों AI को अपनाना भारत का नया 'Opportunity Kaal' है
दिग्गज निवेशक हिरेन वेद ने रिटेल निवेशकों से अनुरोध किया है कि वे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के बाहर निकलने की चिंता छोड़कर उन घरेलू कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करें जो आक्रामक रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपना रही हैं। उनका मानना है कि AI अगले पांच वर्षों में भारतीय बाजार में प्रदर्शन का एक बड़ा अंतर पैदा करेगा।
Market Watch: घटती अस्थिरता और कच्चे तेल की कम कीमतों ने रिकवरी के संकेत दिए
भारतीय शेयर बाजारों ने मंगलवार को लचीलापन दिखाया क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों का उत्साह बढ़ा। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी है, लेकिन अस्थिरता सूचकांक (VIX) में तेज गिरावट खुदरा निवेशकों के लिए अधिक स्थिर वातावरण का संकेत देती है।
मिडल ईस्ट तनाव के कारण ₹4.5 लाख करोड़ साफ: क्या रिटेल निवेशकों को चिंता करनी चाहिए?
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और विदेशी निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली ने पिछले 100 दिनों में भारतीय बाजार की संपत्ति में भारी गिरावट पैदा की है। जहां बैंकिंग और आईटी सेक्टर दबाव झेल रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का सुझाव है कि कम वैल्यूएशन जल्द ही लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एंट्री पॉइंट पेश कर सकते हैं।
Sensex 800 अंक टूटा: सोमवार को बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
सोमवार को भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे Sensex 800 अंक गिर गया और Nifty 23,100 के स्तर से नीचे आ गया। वैश्विक कमजोरी और विदेशी फंडों की निरंतर निकासी के कारण आई इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है।
संघर्ष के कारण बढ़ती मुद्रास्फीति के बीच ECB ब्याज दरें बढ़ाने को तैयार: भारतीय निवेशकों पर इसका क्या होगा असर
मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) दो वर्षों से अधिक समय में अपनी पहली ब्याज दर वृद्धि की तैयारी कर रहा है। सख्त मौद्रिक नीति की ओर यह वैश्विक बदलाव भारतीय बाजारों से फंड निकासी (outflows) को गति दे सकता है और RBI पर घरेलू दरों को ऊंचा बनाए रखने का दबाव डाल सकता है।
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